
New Delhi: जैसी उम्मीद थी, कोरोना संकट ने सरकार को कई सबक दिए हैं और इसी का परिणाम है कि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बजट में 137 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गयी है. सरकार ने देश के लोगों को आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना का तोहफा दिया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया, जिसके तहत शहरों में अमृत योजना को आगे बढ़ाया जायेगा.
इसके लिए दो लाख 87 हजार करोड़ रुपये जारी किए गए. मिशन पोषण 2.0 का भी ऐलान किया गया है क्योंकि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोग हमेशा से कहते आये हैं कि आधी से अधिक बीमारियां पोषण की कमी के कारण होती है . वित्त मंत्री ने कहा कि न्यूट्रिशन पर फोकस किया जायेगा और जल जीवन मिशन (शहरी) लॉन्च किया जायेगा.
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कोविड-19 वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रुपये का ऐलान से भी साफ है कि सरकार स्वास्थ्य को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है.
सरकार अगले छह सालों में स्वास्थ्य क्षेत्र पर करीब 61 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी. इन पैसों को प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च स्तर तक की स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जायेगा और नई बीमारियों पर भी ध्यान दिया जायेगा और यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से अलग होगा.
निर्मला सीतारमण ने बजट में घोषणा की कि देशभर में 75 हजार ग्रामीण हेल्थ सेंटर खोले जायेंग. साथ ही सभी जिलों में जांच केंद्र और 602 जिलों में क्रिटिकल केयर यूनिट (महत्वपूर्ण देखभाल इकाइयां) खोले जायेंग. इसके अलावा 17 नए पब्लिक हेल्थ यूनिट को भी चालू किया जायेगा.
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इसके साथ ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड हेल्थ बनाने की घोषणा भी की गयी है. इसके अलावा देश में नौ बायो लैब भी बनाई जाएंगी. कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए चार इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भी बनाए जाने की घोषणा की गयी है.
उन्होंने कहा कि शहरी स्वच्छ भारत मिशन 2.0 पर अगले पांच सालों में एक लाख 41 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जायेंग. इसके अलावा अगले पांच साल में दो हजार करोड़ रुपये क्लीन एयर (शुद्ध हवा) पर भी खर्च किए जायेंगे.
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