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कृषि बिल और श्रम कोड के विरोध में श्रमिकों ने 17 जिलों में मनाया विरोध दिवस

अखिल भारतीय विरोध दिवस में खनन श्रमिकों से लेकर आंगनबाड़ी सेविकाएं भी हुईं शामिल

Ranchi : कृषि बिल और चार श्रम कोड के विरोध में राज्य भर में शुक्रवार को भी विरोध दिवस मनाया गया. सेंटर ऑफ ट्रेड यूनियन सीटू की ओर से घोषित विरोध दिवस के दौरान राज्य के 17 जिलों के 700 से अधिक कार्य स्थलों पर कर्मचारियों ने बिल के विरोध में प्रदर्शन किया.

सीटू की ओर से जानकारी दी गयी कि दो दिवसीय विरोध दिवस राज्य में सफल रहा. इस दौरान अलग-अलग सेक्टरों के कर्मी प्रदर्शन में शामिल हुए. सीटू के राज्य अध्यक्ष मिथिलेश सिंह ने बताया कि केंद्रीय टेड यूनियनों की ओर से ये दो दिवसीय विरोध दिवस का आह्वान किया गया था. इसके समर्थन में राज्य में भी ये विरोध सप्ताह मनाया गया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के कृषि बिल का विरोध देश भर में किया जा रहा है. इसके बावजूद केंद्र सरकार बिल वापस नहीं ले रही.

किसानों को वार्ता के लिये बुलाया जाता है लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा. उन्होंने कहा कि यूनियन की ओर से पहले ही तय किया गया है कि आंदोलन को तेज किया जायेगा. इसी तर्ज पर राज्य में कृषि आंदोलन को गति दी जा रही है.

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 इन क्षेत्र के कर्मचारियों ने किया समर्थन

सीटू की ओर से बताया गया कि इस विरोध दिवस में कोयला, इस्पात, परिवहन, निर्माण, बीड़ी और पत्थर उद्योग के कर्मचारी इसमें शामिल हुए. इसके अलावा आइसीडीएस के परियोजना कर्मियों, मध्यान्ह भोजन कर्मियों समेत स्वास्थ्य सेवाओं से जुडी सहिया कामगारों ने भी बड़ी संख्या में अपने कार्य स्थलों विरोध दर्ज किया.

यह विरोध दिवस 10 सूत्री मांगों के पक्ष में मनाया गया. हालांकि कोरोना संक्रमण के खतरे की वजह से चलते आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक व मध्य विद्यालय बंद हैं लेकिन आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं और मिड डे मील कामगारों ने अपने – अपने परियोजना सेंटर और विधालयों के समक्ष विरोध दर्ज किया.

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