भुवनेश्वर, 21 मार्च | ओडिशा में नक्सलियों द्वारा पिछले सप्ताह अगवा किए गए इटली के दो नागरिकों के भविष्य को लेकर बुधवार को भी अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नक्सलियों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।
इस बीच एक नक्सली नेता ने यद्यपि कहा है कि यदि सरकार बातचीत शुरू होने से पहले नक्सलियों की दो मांगें मान ले तो वे इटली के एक नागरिक को छोड़ने को तैयार हैं।
खुद को सुनील बताने वाले जिस व्यक्ति ने फोन पर यह बात कही है, उसे नक्सली नेता सब्यसाची पांडा के नाम से जाना जाता है। उसने एक बंधक को छोड़े जाने के बदले अपनी पत्नी सुभाश्री पांडा सहित पांच नक्सलियों को रिहा करने का सरकार से आग्रह किया है। हालांकि सरकार ने अभी इस प्रस्ताव का कोई जवाब नहीं दिया है।
चुनिंदा पत्रकारों को यहां फोन पर दिए संदेश में उसने राज्य में फर्जी मुठभेड़ों व बलात्कारों के लिए जिम्मेदार सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है।
राज्य के गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “जबतक नक्सली यह स्पष्ट नहीं कर देते कि उनका प्रतिनिधित्व कौन करेगा, तबतक बातचीत शुरू हो पाना बहुत कठिन है।”
नक्सलियों ने मंगलवार देर रात सरकार के लिए मांगे मानने की समय सीमा बुधवार शाम तक बढ़ा दी। लेकिन वार्ताकारों के चयन को लेकर प्रक्रिया बार-बार बाधित होती रही।
नक्सलियों ने सोमवार देर शाम तीन मध्यस्थों के नाम की घोषणा की थी, उनमें वरिष्ठ नक्सली नारायण सान्याल, सामाजिक कार्यकर्ता दंडपाणि मोहंती और मानवाधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता बिश्वप्रिय कानूनगो शामिल थे।
कानूनगो ने जहां तत्काल मध्यस्थता करने से इंकार कर दिया, वहीं मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मंगलवार शाम नारायण सान्याल को मध्यस्थ के तौर पर स्वीकार करने से इंकार कर दिया, क्योंकि वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
पटनायक ने नक्सलियों से दूसरे नाम सुझाने को कहा। उसके बाद नक्सलियों ने मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रफुल्ल सामोंत्रा और जनजातीय मामलों के विशेषज्ञ बी.डी. शर्मा के नाम घोषित किए। लेकिन सामोंत्रा ने भी यह कहते हुए मध्यस्थता करने से इंकार कर दिया कि उन्हें सरकार पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।
राज्य में विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के कारण हुए विस्थापनों का विरोध करने वाले सामोंत्रा ने कहा कि क्या सरकार ने उन पर या उनके आंदोलन पर विश्वास किया। उन्होंने कहा, “सरकार के साथ बातचीत करने का कोई अर्थ नहीं है।”
राज्य सरकार ने कहा है कि तीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी- पी.के. जेना, संतोष सारंगी और यू.एन. बेहरा बातचीत में हिस्सा लेंगे। अधिकारी ने कहा कि अब गेंद नक्सलियों के पाले में है।
ज्ञात हो कि नक्सलियों ने बोसुस्को पाओलो और क्लाउडिओ कोलैंजेलो को 14 मार्च को कंधमाल जिले से अगवा कर लिया था। नक्सलियों ने और राज्य सरकार ने कहा है कि बंधक सुरक्षित हैं और उनका स्वास्थ्य बेहतर है।
अपहर्ताओं ने रिहाई के लिए 13 सूत्री मांगें रखी हैं। उन्होंने इसके पहले मांगे मानने के लिए मंगलवार शाम तक की समय सीमा निर्धारित की थी।




