नई दिल्ली, 21 मार्च | सरकार द्वारा गरीबी रेखा के लिए निर्धारित नए मानकों पर विपक्षी सदस्यों ने एकजुट होकर बुधवार को लोकसभा में सरकार पर तीखा हमला किया। विपक्ष ने सरकार से गरीबी रेखा के नए मानक को वापस लेने की मांग की। सरकार ने नए मानकों के तहत शहरी इलाकों में प्रतिदिन 28 रुपये से कम तथा ग्रामीण इलाकों में प्रतिदिन 22.50 रुपये से कम खर्च करने वालों को गरीबी रेखा से नीचे माना है।
सदन की बैठक सुबह 11 बजे जैसे ही शुरू हुई, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने प्रश्नकाल में बाधा पहुंचाई। शोरशराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई तो मीरा कुमार ने सदस्यों को गरीबी रेखा के नए मानकों पर विशेष चर्चा की छूट दी।
विपक्षी सांसद सोमवार को जारी किए गए योजना आयोग के उस आकड़े का विरोध कर रहे थे, जिसमें दावा किया गया है कि 2004-05 और 2009-10 के बीच गरीबी काफी कम हुई है।
इसमें कहा गया है कि गरीब वे लोग हैं, जिन्होंने शहरी इलाकों में प्रतिदिन 28 रुपये से कम खर्च किया और ग्रामीण इलाकों में प्रतिदिन 22.50 रुपये से कम खर्च किया। ये आकड़े पूर्व के 32 रुपये प्रतिदिन से नीचे हैं और सरकार ने पिछले वर्ष जब यह आंकड़ा सर्वोच्च न्यायालय में पेश किया था, तो इसे लेकर काफी होहल्ला हुआ था।
चर्चा की शुरुआत करते हुए जनता दल-युनाइटेड (जेडी-यू) के नेता शरद यादव ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का नाम लिए बगैर उन पर तीखा हमला किया। यादव ने आयोग को बंद करने की मांग करते हुए उसके आंकड़ों को दोषपूर्ण बताया।
यादव ने कहा, “उपाध्यक्ष जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। उन्हें हटाया जाना चाहिए। जब भी वह बोलते हैं, चीजें गलत हो जाती हैं।”
उन्होंने कहा, “आप जब परिवार की न्यूनतम आय कम करेंगे तो गरीबी रेखा वास्तव में नीचे ही आएगी..मुझे बताइए, क्या शहरी इलाकों में प्रतिदिन 28 रुपये में और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना 22.50 रुपये में रहना सम्भव है।”
यादव ने कहा कि सरकार आर्थिक विकास दिखाने के लिए आंकड़े पेश कर रही है। उन्होंने कहा, “आपको अब क्या करना चाहिए। यदि आप गरीबी मिटाना चाहते हैं..तो गरीबों को गोली मार दीजिए, उन्हें जहर दे दीजिए।”
भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि इसके लिए योजना आयोग पर निशाना साधना गलत है क्योंकि इसकी असली जिम्मेदार सरकार है जिसने इन आंकड़ों को माना है।
सुषमा ने कहा, “योजना आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं तो हमें उपाध्यक्ष पर क्यों निशाना साधना चाहिए?”
उन्होंने कहा, “सरकार एक तरफ कीमतें बढ़ा रही है तो दूसरी ओर गरीबी के आंकड़ों को कम दिखा रही है।”
कांग्रेस अध्यक्ष एवं सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी को सम्बोधित करते हुए सुषमा ने सरकार से गरीबी रेखा के निर्धारण के लिए नए मानकों के साथ आने के लिए कहा।
उन्होंने कहा, “आप आंकड़ों को खारिज करें। सोनियाजी के पास ऐसा करने का माद्दा है।”
सुषमा ने कहा, “ग्रामीण इलाकों में रोजाना 22.50 पैसे में और शहरी क्षेत्रों में 28 रुपये में आपके परिवार को खिला पाना, बच्चों को शिक्षा दे पाना और रह पाना क्या सम्भव है? मैं अपील करती हूं कि इन आंकड़ों को सरकार से खारिज करने के लिए आप सदन के साथ जुड़ें।”
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने भी सरकार की खिंचाई की।
मुलायम सिंह ने अहलूवालिया को उनके पद से हटाए जाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि वातानुकूलित कमरों में रहने वाले लोगों को गरीबों के बारे में जानकारी नहीं है। सिंह ने कहा कि देश में बिना बिजली और पेयजल के 65 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं। उन्होंने गरीबी के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराया।
वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता बासुदेब आचार्य ने कहा कि आयोग के ये आंकड़े देश की गरीबी कम आंकते हैं। उन्होंने सरकार से गरीबी की इस नई परिभाषा को वापस लेने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि चर्चा के दौरान सरकार की ओर से केवल कांग्रेस के अरुण कुमार ने अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष संसद को गुमराह कर रहा है।
कुमार ने कहा कि गरीबी के ये आंकड़े प्रतिव्यक्ति आय के हिसाब से है न कि किसी एक परिवार के मुताबिक। शहरी इलाकों में एक महीने में प्रति परिवार की आय 4824 रुपये और ग्रामीण इलाकों में एक महीने में प्रति परिवार आय 3905 रुपये है।




