
Ranchi : शिक्षा विभाग की गलतियों का दंश अब सरकारी स्कूल के बच्चों को झेलना पड़ सकता है. शिक्षकों की लापरवाही और तकनीकी कारणों के कारण बच्चों को ड्रापआउट समझा जाएगा. अगर बच्चों को ई-बुक नहीं मिल पाया है या उन्हें पुस्तकें उपलब्ध नहीं करायी जा सकी है तो वैसे बच्चों को ड्रापआउट मानने की तैयारी है. जबकि ऐसे बच्चों सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों व शिक्षा विभाग की है. उनकी जवाबदेही है कि वे बच्चों को समय पर सारी चीजें उपलब्ध क्यों नहीं करा पाए.
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लेकिन इस सर्वे में वैसे बच्चों को चिन्हित कर उन्हें ड्रापआउट समझा जाएगा. इसके लिए विभाग की ओर से हाउसहोल्ड सर्वे कराने की तैयारी की गई है. इस सर्वे में देखा जाएगा कि बच्चों को मिलने वाले डीजिटल कंटेंट मिल पाया है कि नहीं और उन्हें अगर मिला भी है तो बच्चें ने इसे इस्तमाल किया है कि नहीं. झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद इस सर्वे की शुरुआत पूरे राज्य में 25 नवंबर से कराएगा. इसमें यह भी देखा जाएगा कि बच्चों के नामांकन की क्या स्थिति है, सत्र 2019-20 में जो बच्चे नामांकित थे, उन्होंने वर्तमान शैक्षणिक सत्र में नामांकन लिया है या नहीं लिया है.
हाउसहोल्ड और स्कूल स्तर पर सर्वे के लिए पूरा सर्वे फॉर्म पर ऑफलाइन किया जाएगा. इसे लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. आठ दिसंबर तक चलने वाले इस हाउसहोल्ड सर्वे के बाद जिला स्तर से कम से कम 10 हाउसहोल्ड और पांच स्कूलों का सैंपल जांच कर सर्वे की सच्चाई भी देखी जाएगी. सर्वे की जिम्मेवारी प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों की होगी, जिन्हें 23 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी.
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एक माह तक स्कूल नहीं जाने वाले बच्चे माने जाएंगे ड्रापआउट
जो बच्चे इस शैक्षणिक सत्र में नामांकित थे और उन्होंने नामांकन नहीं लिया या जो एक माह तक स्कूल नहीं गए तो वैसे बच्चों को डा्रॅपआउट माना जाएगा. इतना ही नहीं विभाग की एक ओर गलती का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ सकता है. सर्वे में यह भी देखा जाना है कि पछले वर्ष के सरकारी स्कूलों में नामांकित छात्र इस साल डीजी-साथ प्रोजेक्ट इस प्रोजेक्ट के तहत ऑनलाइन क्लासेस और व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. बच्चों की शिक्षा के लिए कार्यक्रम में नहीं जुड़ पाए या फिर शिक्षक की ओर से शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं तो भी वे ड्रॉपआउट कहलायेंगे.
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सर्वे से बच्चों को भी मिलेगा लाभ
इस सर्वे से बच्चों के पढ़ाई में लाभ मिलने की भी उम्मीद जतायी जा रही है. जो बच्चे कोविड-19 की वजह से डीजी साथ कार्यक्रम से लाभान्वित नहीं हो पा रहे हैं उन्हें चिन्हित किया जाएगा. बच्चों को स्कूल से जोड़ने, एडमिशन कराने के लिए अभिभावकों को प्रेरित भी किया जाएगा. साथ ही स्कूल के शिशु पंजी को भी अपडेट किया जाएगा.
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