Ranchi: राज्य के हिस्से के रूप में जीएसटी मुआवजे के बकाया राशि की भुगतान के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने इस बात का जिक्र किया है कि केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य को हुए जीएसटी राजस्व में हुए नुकसान के लिए मुआवजा देने में असमर्थता व्यक्त की है. उन्होंने कहा है कि इस वित्तीय वर्ष में राज्य को करीब 2500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, लेकिन केंद्र से अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिलना चिंतनीय विषय है.
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हेमंत ने बीते दिनों हुए जीएसटी काउंसिल की बैठक जिक्र करते हुए पत्र में कहा कि केंद्रीय मंत्री ने राज्य को उचित आश्वासन की जगह दो विकल्प सुझाए, जिसमें राज्य को करोड़ों रुपये उधार लेने की बात की गयी. जबकि यह सभी जानते है कि झारखंड जैसे गरीब राज्य के लिए यह आसान नहीं है. हेमंत ने पीएम से अपील किया है कि वे मामले में हस्तक्षेप करें. साथ ही संबंधित मंत्रालय को निर्देश दें कि वह जल्द से जल्द राज्य के बकाया राशि का भुगतान करें. तभी सहकारी संघवाद की भावना मजबूत हो सकेगी.
पीएम ने कहा था कि घटक राज्य के विकास से ही राष्ट्र का होगा विकास
पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि अकेले खनिज क्षेत्र से झारखंड केंद्र को लगभग 5000 करोड़ रुपये का सेस भुगतान करता है. लेकिन बदले में राज्य को महज मुआवजे के रूप में मासिक 150 करोड़ रुपये का भुगतान होता है. हेमंत ने पीएम से कहा कि 1 जुलाई 2017 के मध्यरात्रि को जब जीएसटी लॉंच किया था, उस दौरान का उनका भाषण उन्हें आज भी याद है. देश के नाम संबोधन में आपने समावेशी विकास की बात की थी. साथ ही कहा था कि एक राष्ट्र के रूप में भारत तभी विकसित हो सकता है, जब उसके घटक राज्य भी विकसित और आत्मनिर्भर हो. तीन साल पहले किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि केंद्र सरकार इस तरह का कदम उठाएगी, जिससे राज्यों को काफी नुकसान होगा. लेकिन आज जब केंद्र जीएसटी के नुकसान की भरपाई नहीं करने में केंद्र का प्रयास सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है.
तीन साल से राज्यों को केवल नुकसान ही झेलना पड़ा है
पत्र में हेमंत ने लिखा कि उन्होंने यह याद दिलाने की आवश्यकता नहीं है कि जीएसटी को देश के हित में ही लागू किया गया था. राज्यों ने अपने संसाधनों के नुकसान को झेलते हुए केंद्र के इस निर्णय को देशहित में समर्थन किया. जीएसटी लागू करते समय यह आश्वासन भी दिया गया कि अगले पांच वर्षो में केंद्र राज्यो को हुए नुकसान का भरपाई करेगी. लेकिन तीन साल होने को है, लेकिन राज्यों को केवल नुकसान ही झेलना पड़ा है. हेमंत ने कहा कि राज्यों को पूर्ण मुआवजा देने में केंद्र की अनिच्छा और अक्षमता, भारतीय संसद और अबतक जीएसटी काउंसिल की हुई सभी बैठकों में हुई प्रतिबद्धता के साथ विश्वासधात है.
उधार लेने की सलाह देकर राज्य पर डाला जा रहा है अतिरिक्त बोझ
हेमंत का कहना है कि कम खपत के साथ झारखंड एक विनिर्माण/भारी उद्योग आधारित राज्य है. लेकिन फिर भी जीएसटी को उठाकर राज्य को काफी नुकसान झेलना पड़ा है. दूसरी तरफ झारखंड एक पिछड़ा राज्य है. इस कोविड महामारी में भी राज्य सरकार अपने सीमित संसाधनों से सरकारी कर्मचारियों को वेतन मुश्किल से दे पा रही है. हमारी अर्थव्यवस्था अनिश्चित स्थिति में है. हर दिन सक्रिय कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है. इस समय अपने किसानों, असंगठित क्षेत्र, प्रवासी श्रमिकों और बेरोजगार युवाओं के लिए अधिक राशि की आवश्यकता है. ऊपर से केंद्र अब राज्य को उधार लेने की सलाह देकर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है. जबकि चाहिए कि जीएसटी लागू करने के समय वादों को याद करते हुए केंद्र अपनी संवैधानिक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए राज्यों को उधार और क्षतिपूर्ति का भुगतान करें.





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