
Dhanbad : धनबाद में हुए फर्जी शिक्षक नियुक्ति मामले में तत्कालिन डीएसई बांके बिहारी सिंह को दोषी करार दिया गया है. इस मामले को लेकर न्यूज विंग ने 9 मई को ही “धनबाद फर्जी शिक्षक नियुक्ति : कई बर्खास्त लेकिन अबतक पद पर बने हैं आरोपी तत्कालिन डीएसई, कार्रवाई के नाम पर हुआ तबादला” शीर्षक के साथ खबर छपी थी. फर्जी तरीके से शिक्षकों की बहाली का आरोप राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष नीलकंठ मंडल दवारा लगाया गया था. खबर लिखे जाने के बाद शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव देवेंद्र भूषण सिंह की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय कमेटी को दी गयी थी. आरोपी तत्कालीन डीएसई बांके बिहारी प्रसाद वर्तमान में जमशेदपुर में जिला शिक्षा अधीक्षक हैं.
धनबाद जिला में 945 प्राथमिक शिक्षकों की बहाली साल 2016 में की गयी थी. जिसमें जांच के दौरान 158 नियुक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गये थे. जबकि उस वक्त तक सिर्फ टेट एवं मैट्रिक के प्रमाण पत्रों की ही जांच हुई थी. जबकि इंटर और स्नातक के प्रमाणपत्रों की जांच नहीं की गयी थी.. अभी भी प्रमाण पत्रों के जांच में फर्जी प्रमाण पत्रों के जांच में फर्जी शिक्षकों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है.
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रिपोर्ट में साफ लिखा है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय सेअभिलेख प्राप्त
जो रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी ने क्षेत्रिय शिक्षा उपनिदेशक हजारीबाग को सौंपी गयी थी. उसमें साफ तौर पर लिखा गया था कि जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय अभिलेख से ये प्राप्त हुआ है कि 130 टेट प्रमाण पत्र एवं 11 मैट्रिक के अलावा इंटर के जाली प्रमाणपत्र के आधार पर प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बाद सेवामुक्त कर प्राथमिकी भी दर्ज की गई है. 13 सालों में मैट्रिक करने वाली अभ्यर्थी सोनी कुमारी, नर्सरी टीचर ट्रेनिंग के आधार पर नियुक्त हुए अजय राणा व अन्य अभ्यर्थियों के मामले में डीएसई कार्यालय संदेह के घेरे में है. आरडीडीई के निर्देश पर डीईओ डा. माधुरी कुमारी ने डीएसई कार्यालय जाकर जांच की. जांच में कई मामले सही पाए जाने की बात कही जा रही है. प्रथम दृष्टया यह माना जा रहा है कि नीलकंठ मंडल ने तत्कालीन डीएसई बांके बिहारी सिंह पर नियुक्ति में गड़बड़ी का जो आरोप लगाया है. वह बिंदुवार सही मिल रहा है. हालांकि वर्तमान डीएसई विनीत कुमार ने अजय राणा, सुरेश मुंडा, प्रेमलाल हेम्ब्रम, सोनी कुमारी को बर्खास्त कर दिया है.
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समय रहते होती कार्रवाई तो फर्जी नियुक्ति पर लग सकती थी रोक
फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त कर्मियों की सेवा तो समाप्त कर दी गई है. लेकिन वैसे अभ्यर्थी जिनका प्रमाण पत्र काउंसिलिंग में ही संदेहास्पद पाया गया, लेकिन कार्रवाई करने की बजाये बांड भरवाकर छोड़ दिया गया, यदि उसी समय तत्काल कार्रवाई होती तो दूसरे फर्जी आवेदकों के प्रवेश पर रोक लग सकती थी और इतने बड़े पैमाने पर फर्जी नियुक्ति नहीं हो पाती. ज्ञात हो कि काउंसिलिंग के दौरान अभ्यर्थी राजेश कुमार तथा पुरुषोत्तम कुमार सहित छह अभ्यर्थियों को बांड भरवाकर छोड़ दिया था.
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बदली गयी काउंसिलिंग की सूचना
वहीं जिला शिक्षा कार्यालय के अभिलेख के अनुसार, शिक्षकों की नियुक्ति हेतु विज्ञापन संख्या 11/ 2015 से लेकर 20/ 2015 तक आठ विज्ञापन प्रकाशित किए गए. जिसमें विज्ञप्ति संख्या क्रमांक आठ में ये स्पष्ट किया है कि डीपीई योग्यताधारी जिनका चयन गैर पारा श्रेणी में किया गया है, उनके आवेदन में पारा शिक्षक का कॉलम खाली है, साथ ही डीपीई का प्रमाण पत्र भी संलग्न नहीं किया गया है. ऐसे में एक घोषणा पत्र जारी करना होता है, जिसमें ये स्पष्ट होता है कि ये योग्यता कैसे हासिल की गई. ये विज्ञापन में अंकित है, लेकिन ऐसा किया नहीं गया है.
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