
Akshay Kumar Jha
Ranchi/lalpania: आए दिन मीडिया में टीटीपीएस (तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन) को लेकर खबरें आ रही हैं कि टीटीपीएस कोयला नहीं होने की वजह से बंद होने की कगार पर है. एक यूनिट पूरी तरह से ठप है और दूसरी सीसीएल (सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड) के रहमो करम पर किसी तरह से सांसे ले रही है. वजह टीटीपीएस की तरफ से सीसीएल को कोयले का पैसा नहीं दिया जाना बताया जा रहा है. यह एक कारण जरूर हो सकता है. लेकिन टीटीपीएस की कुछ बातों पर गौर फरमायें तो ये साफ हो जाएगा कि कोयला महज बहाना है, मकसद टीटीपीएस को बंद कराना है. टीटीपीएस में कोयले की कमी के अलावा ऐसी हजारों कमियां हैं, जिसे दुरुस्त करने पर प्रबंधन का जरा भी ध्यान नहीं है. अगर ये सारी कमियां प्रबंधन दुरुस्त कर देता है, तो टीटीपीएस की 90 फीसदी समस्या खत्म हो जाएगी.
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टीटीपीएस को बंद कराने में लगा है प्रबंधन
– किसी भी थर्मल पावर में बिजली उत्पादन में बॉयलर की भूमिका अहम होती है. टीटीपीएस में लगा बॉयलर राम भरोसे चल रहा है. इसमें इतने लिकेज हैं कि बॉयलर को मुकम्मल हवा मिल ही नहीं पा रही है. लिकेज होने की वजह से एनर्जी बन ही नहीं पाती है. जिस वजह से बॉयलर लोड नहीं ले पाता है. इसे दुरुस्त करने के लिए प्रबंधन ने कभी कोई कदम नहीं उठाया.
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– जब से प्लांट में काम शुरू हुआ है, उस समय से एक बार भी यूएटी (यूनिट ऑक्जलरी ट्रांस्फरमर) की सर्विसिंग ही नहीं हुई है. जिससे करोड़ों रुपए में खरीदा गया ट्रांस्फरमर खरीदने के बाद से ही बेकार पड़ा हुआ है. मामूली ट्रांस्फरमर को भी अगर चार्ज नहीं किया जाए तो वो खराब हो जाता है. इसकी सर्विसिंग कराने में प्रबंधन ने कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी.
– थर्मल पावर स्टेशन में सबसे बड़ी समस्या बिजली उत्पादन के बाद बच गए छाई से होती है. हर पावर स्टेशन में इसे डिस्पोज करने की कोई ना कोई व्यवस्था होती है. लेकिन टीटीपीएस में ऐश (छाई) डिस्पोज करने की प्रक्रिया पर प्रबंधन जरा भी गंभीर नहीं दिखता, जिस वजह से छाई बहकर पास की नदियों में जाकर मिल रहा है.
– टीटीपीएस को सीसीएल की तरफ से सप्लाई होने वाला कोयला अमूमन काफी घटिया क्वालिटी का होता है. सीसीएल से टीटीपीएस 3500 कैलोरी की क्षमता वाला कोयला डिमांड करता है. लेकिन सीसीएल काफी ही लो क्वॉलिटी का कोयला टीटीपीएस को सप्लाई करता है. बकाया होने की वजह से टीटीपीएस प्रबंधन कभी भी सीसीएल से इस बात पर ऐतराज नहीं जताता है.
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– पुराना डीजी होने की वजह से करीब एक साल पहले टीटीपीएस में एक बड़ा हादसा टला. टीटीपीएस को इस घटना के बाद करीब 200 करोड़ का घाटा हुआ. दूसरा कोई भी प्रबंधन होता तो इस बात से सबक लेकर प्लांट में नया डीजी लाता. जबकि नए डीजी के विभाग की तरफ से प्लांट प्रबंधन को पहले से ही आवेदन दिया हुआ था. बावजूद इसके प्रबंधन के कान में जू नहीं रेंगा. इसके उलट प्रबंधन ने हादसे के लिए कनिय अधिकारियों पर कार्रवाई की और उसी विभाग के सीनियर अधिकारी को प्रमोशन देकर जीएम बना दिया गया. आज भी प्लांट में नए डीजी को लेकर कोई गंभीर नहीं है.
– टीटीपीएस की चिमनी की प्लांट बनने के बाद से ही कभी सफाई नहीं की गयी. इससे चिमनी के ऊपर चढ़ने के रास्ते में छाई जम जाने की वजह से कोई चिमनी पर अब चढ़ ही नहीं सकता. राम भरोसे चिमनी काम कर रहा है. किसी भी दिन टीटीपीएस की चिमनी काम करना बंद कर सकती है.
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