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इन 11 तथ्यों से जानें कितने खराब हैं देश के हालात, मोदी सरकार ने कहां पहुंचा दिया आपको

Girish Malviya
देश किस कदर आर्थिक संकट से जूझ रहा है यह आपको गोदी मीडिया बिल्कुल नहीं बतायेगा! गलत आर्थिक नीतियों और बिना सोचे समझे गए निर्णय के कारण हालत बद से बदतर होती जा रही है.

देश का रेवेन्यू कलेक्शन घटता ही जा रहा है और इस कारण से सरकार के पास अब अपने कर्मचारियों को वेतन भत्ते पेंशन आदि तक देने की समस्या खड़ी हो गयी है.

एक बार पढ़ लीजिए कि हालात कितने खराब हो चुके हैं. ये ऐसी खबरें हैं जो राष्ट्रवाद , पाकिस्तान और हिन्दू मुस्लिम की बहस में कहीं नीचे दबी रह गयी हैं.

पहली खबर है कि सैलरी संकट से बुरी तरह जूझ रहे BSNL और MTNL कर्मचारियों की इस साल दिवाली काली होने जा रही है. 22 हजार एमटीएनएल कर्मचारियों को पिछले दो महीने (अगस्त व सितंबर, 2019) से वेतन नहीं मिला है. वहीं, 1.58 लाख बीएसएनएल कर्मचारियों को पिछले माह तनख्वाह नहीं मिल पायी है.

रेलवे के पास वेतन देने को पैसा नहीं है इस कारण वह तीन लाख कर्मचारियों की छटनी करने जा रहा है, रेल मंत्रालय ने वेतन पर लगने वाला भारी-भरकम खर्च घटाने के लिए अपनी ‘नॉन कोर’ गतिविधियों को आउटसोर्स करने की तैयारी कर ली है. दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक इसके तहत विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की जरूरत का आकलन किया जा रहा है.

एयर इंडिया के पास अक्टूबर के बाद सैलेरी देने का पैसा नहीं बचा है. खबर है कि पायलट अपनी सैलरी और प्रमोशन से बेहद नाराज चल रहे हैं. इसके चलते करीब 120 पायलटों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है.

कोल इंडिया एवं अनुषंगी कंपनियों में कभी सात लाख से अधिक कामगार हुआ करते थे. अब आंकड़ा चार लाख से कम होने को है. बावजूद इसके कोल इंडिया में मैनपावर अभी भी जरूरत से ज्यादा हैं.

यह कोल इंडिया की विजन रिपोर्ट एवं एचआर पॉलिसी में हैं. विजन 2020 में स्पष्ट है कि अधिकारी और स्टेट्यूटरी पोस्ट यानी माइनिंग सरदार, ओवरमैन, सर्वेयर जैसे पदों पर ही बहाली होगी. लेकिन वहां भर्ती नहीं की जा रही है बल्कि छटनी की प्रक्रिया बड़े पैमाने पर जारी हैं.

सेना और अर्धसैनिक बलों को मोदी सरकार बहुत सुविधा देने की बात करती है. असलियत यह है कि सीआरपीएफ (CRPF) कर्मियों के राशन भत्ते पर सरकार की कैंची चली है.

सरकार की ओर से एक सूचना जारी कर कहा गया है कि सितंबर में मंथली सैलरी में मिलने वाला उनका राशन अलाउंस नहीं मिलेगा. सी.आर.पी.एफ. कर्मी हर महीने 3500 रुपए के इस भत्ते का इस्तेमाल कैंटीन और मेस से खाना खरीदने में करते हैं.

सोमवार से हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के लगभग 20,000 कर्मियों ने सोमवार को वेतन में संशोधन की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी हैं.

कुछ दिन पहले सेना के लिए साजोसामान का निर्माण करने वाली पुणे स्थित तीन बड़ी कंपनियों ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. इन कंपनियों के तकरीबन सात हजार कर्मचारी आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) में मोदी सरकार के ‘कार्पोरेटाइजेशन’ के फैसले के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल पर बैठ गये हैं. इन कंपनियों के अलावा पिछले दिनों देशभर की 41 आर्डिनेंस फैक्ट्रियों के करीब 82000 कर्मचारी हड़ताल पर चले गये थे.

चंद्रयान की बात करने वाली सरकार इसरो के वैज्ञानिकों की सैलरी काट रही है. केंद्र सरकार ने 12 जून 2019 को जारी एक आदेश में कहा है कि इसरो वैज्ञानिकों को 1996 से दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि के रूप में मिल रही प्रोत्साहन राशि अब नहीं मिलेगी.

इंडिया पोस्ट यानी डाक विभाग की हालत तो बीएसएनएल और एयर इंडिया से भी खराब होने को हैं वित्त वर्ष 2019 में इंडिया पोस्ट के रेवेन्यू और खर्च के बीच का अंतर 15,000 करोड़ रुपए के स्तर तक पहुंच गया.

इंडिया पोस्ट में 4.33 लाख इंप्लाइज की वर्कफोर्स काम करती है. 1.56 लाख पोस्ट ऑफिसेस के नेटवर्क हैं उन्हें भी जल्द वेतन से संबंधित समस्याएं झेलनी पड़ सकती है.

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में नकदी संकट इतना गहरा गया है कि नकदी का प्रवाह बढ़ाने के लिए कर्मचारियों को भुगतान किये जाने वाले लीव एनकैशमेंट को स्थगित कर दिया है. वहीं, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने पिछले 2-3 साल से लीव एनकैशमेंट पर रोक लगा रखी है.

देश की 10 सबसे बड़ी सरकारी कंपनियों (PSU) के कुल कर्ज में गत पांच साल में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. उनका कुल कर्ज मार्च 2014 में 4.38 लाख करोड़ रुपए था, जो मार्च 2019 में बढ़कर 6.15 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है. इसलिए अब इन्हें बेचने की नोबत आ गयी है.

समझिए कि संकट कितना गहराता जा रहा है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने वित्त मंत्रालय से 9,100 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया चुकाने का अनुरोध किया है.

यह राशि केंद्र सरकार की पेंशन योजनाओं के अंतर्गत बकाया है. ईपीएफओ ने वित्त मंत्रालय को एक पत्र लिखकर यह मांग की है यानी पेंशन देने को भी पैसे उपलब्धता अब मुश्किल में पड़ गयी है.

मोदी सरकार अब सभी मंत्रालयों और विभागों से हर महीने ऐसे कर्मचारियों की लिस्ट मांगने जा रही हैं जिन्हें समय से पहले रिटायर किया जा सकता है.

यह है देश की असली हालत.
बाकी सब अच्छा है, ऑल इज वेल, सब चंगा सी

(यह लेख Girish Malviya के facbook Wall से लिया गया है और यह लेखक के निजी विचार हैं. यह जरुरी नहीं कि लेख में उल्लेखित तथ्यों और विचारों से न्यूज विंग सहमत हो)

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