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मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले से बरी हुए असीमानंद बंगाल में करेंगे भाजपा के लिए प्रचार

News Wing Desk

देश की सियासी पंडितों के बीच हाल ही में ये चर्चा शुरू हुई थी कि बीजेपी उदारवादी हिंदुत्व के सिद्धांत में असफलता मिलने के बाद अब फिर से आक्रामक हिंदुत्व की ओर लौट रही है. चर्चा के इस विषय को इस खबर से और भी बल मिलेगा कि अब बंगाल में होने वाले पंचायत चुनावों में बीजेपी की ओर से हिंदुत्व का झंडा थामकर मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में हाल ही में बरी हुए स्वामी असीमानंद प्रचार करेंगे. बीजेपी राज्य में अपना आधार मजबूत करने को लेकर उन्हें साथ लाने की तैयारी कर रही है. स्वामी असीमानंद मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से आते है, जहां उनका परिवार अभी भी रहता है. सोमवार को एनआईए की विशेष अदालत ने हैदराबाद के मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में असीमानंद सहित पांच आरोपियों को बरी कर दिया था. 2007 की उस घटना में नौ लोगों की मौत हुई थी, जबकि 58 लोग घायल हुए थे. पूर्व में आरएसएस से जुड़े रहे असीमानंद को 2010 में सीबीआई ने विस्फोट के सिलसिले में गिरफ्तार किया था. बाद में यह मामला एनआईए को सौंप दिया गया.

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बीजेपी को उम्मीद, हिंदुत्व की विचारधारा को मिलेगी ताकत

खबर है कि कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद असीमानंद जल्द ही बंगाल का रुख करेंगे. राज्य भाजपा इकाई चाहती है कि असीमानंद चुनाव प्रचार के दौरान बंगाल के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर पार्टी की विचारधारा का प्रचार करें. इतना ही नहीं बीजेपी ने पहले से ही उनकी यात्राओं की योजना भी बना रखी है. भाजपा सूत्रों की माने तो असीमानंद के साथ आकर काम करने से राज्य में पार्टी की हिंदुत्व विचारधारा को एक नयी ताकत मिलेगी. वहीं बीजेपी के सामने 2019 के लोकसभा चुनाव का भी लक्ष्य है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है,  ‘उनके पास बेहतरीन संगठनात्मक शक्ति है और उन्होंने कई सालों तक लोगों के बीच काम किया है. पंचायत चुनाव के बाद हम चाहते हैं कि वह बंगाल के आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी का आधार मजबूत करें.’ ये भी ध्यान देने की बात है कि असीमानंद के छोटे भाई सुशांत सरकार इस समय भाजपा की हुगली इकाई के सचिव हैं. उन्होंने कहा है कि हमारा पूरा परिवार संघ परिवार को समर्पित है. अगर मेरे भाई बंगाल आते हैं और यहां काम करना चाहते हैं तो हमें बहुत खुशी होगी.’

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आदिवासी इलाकों में असीमानंद ने बिताया है लंबा वक्त

बात केवल पंचायत चुनाव तक ही सीमित नहीं. बंगाल पंचायत चुनाव के बाद भाजपा पुरुलिया, बांकुरा और पश्चिम मिदनापुर सहित बंगाल के आदिवासी बहुल जिलों में उनकी संगठनात्मक शक्ति का इस्तेमाल करने का प्रोग्राम बना रही है. क्योंकि बंगाल के आदिवासियों के बीच असीमानंद ने काफी समय भी बिताया है.

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