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बोकारो के खेरगोड़ा गांव के लोग सड़क, शौचालय, पानी और राशन की सुविधाओं से हैं महरूम

PRAKASH MISHRA

BOKARO: अच्छे दिन के सारे दावे चैनपूर पंचायत के खेरगोड़ा टोला में आकर फेल होते नजर आते हैं. यहां के लोग सड़क, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं. लगातार दो बार सांसद रहे पीएन सिंह की नजर इस टोले पर आज तक नहीं गई. इस टोला तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़क है. अगर बात इन पांच सालों की करें तो इस टोले में आजतक ना कोई सांसद पहुंचे और ना ही उनके कोई कार्यकर्ता. वहीं ग्रामीणों में इसे लेकर काफि आक्रोश है. उनका कहना है कि जिन्हें उन्होंने अपने जनप्रतिनिधि के रूप में चुना था वह उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सके.

टोले में हैं 35 परिवार, मात्र छह के पास है शौचालय

स्वच्छ भारत मिशन के तहत झारखंड और चास प्रखंड को ओडीएफ करने की मुहिम चली थी. लेकिन यह योजना भी खेरगोड़ा में आकर असफल साबित हो गई. इस टोले में रहने वाले 35 परिवारों में से मात्र छह परिवार को ही शौचालय मिल सका. जबकि कई लोगों के घरों में शौचालय निर्माण के लिए गड्डा तो किया गया लेकिन शौचालय नहीं बन सका. ऐसे में खुले में शौच मुक्त कैसे बनेगा गांव. जबकि झारखंड सरकार ने झारखंड को ओडीएफ घोषित भी कर दिया है.

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दो वर्षाें से परिवार को नहीं मिला राशन

सड़क और शौचालय के मामले में गांव को लोगों को परेशानी तो हो ही रही है. साथ ही राशन के मामले में भी उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है. गांव में दो परिवार ऐसे हैं जिनके पास राशन कार्ड है फिर भी उन्हें दो सालों से राशन नहीं मिल रहा है.

कार्डधारी राधिका देवी और मेनका देवी ने बताया कि उनका कार्ड काफी पहले बन गया था. लेकिन उसके बावजूद भी उन्हें एक डीलर से दूसरे डीलर के पास यह कहकर भेज दिया जाता है कि यहां राशन नहीं है. बार-बार डीलर की ओर से इस तरह की बात कही जाने के बाद पीड़ित परिवार ने राशन के लिए जाना ही छोड़ दिया. और कार्ड के बारे में कहा कि राशन कार्ड अब बेकार घर पर रखा रहता है. उसका इस्तेमान नहीं किया जा रहा है.

जबकि सरकार और उनके आपूर्ति विभाग के अधिकारी यह दावा करते नहीं थकते हैं कि जिनके पास कार्ड है उन्हें राशन मिल रहा है. गांव के लोगों का कहना है कि कई लोगों को राशन के लिए काफि दूर झोपरो गांव जाना पड़ता है. जहां पर भी कभी ही कभी राशन मिल पाता था. कई बार शिकायत करने के बाद पिछले दो महीनों से राशन मिल रहा है. लेकिन राधिका देवी और मेनका देवी का नाम कहां है यह पता नहीं चल रहा है. उन्हें राशन कार्ड का कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है.

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स्कूल के चापानल पर निर्भर हैं ग्रामीण

गांव के लोग स्कूल के एक चापानल पर निर्भर हैं. उन्हें पानी की विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. क्योंकि गांव का पुराना कुआं सूख चुका है और कई चापानल बेकार पड़े हुए हैं. ऐसे में गांव के स्कूल के पास बना हुआ चापानल ही ग्रामीणों का एक मात्र सहारा बना हुआ है. गांव में मनरेगा से एक कूप भी बन रहा लेकिन वह फिलहाल अर्धनिर्मित है. वहीं तालाब सूख चुका है. वर्षों पहले डीवीसी की ओर से मिट्टी का डैम बनाया गया था. जहां पर लोग दैनिक कार्यों का निपटारा करते हैं. लेकिन पीने के पानी के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है.

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