JharkhandMain SliderRanchi

46,79893 छात्रों में 6 लाख को मिल रहा डिजिटल कंटेंट, 2 मिनट में 30 सेकेंड भी वीडियो नहीं देखते बच्चे

Ranchi : झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग का डिजिटल एजुकेशन बेकार साबित हो रहा है. प्रतिमाह लगभग तीन लाख रुपये खर्च करने के बाद भी 40 लाख से अधिक स्टूडेंट्स इसका लाभ नहीं ले रहे हैं. हालांकि विभाग यह दावा करता है कि 11,44,944 बच्चों तक वे डिजिटल कंटेंट उपलब्ध करा रहे हैं.

जबकि डिजिटल कंटेंट का लाभ लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या मात्र 6 लाख है. विभिन्न स्कूलों के व्हाट्स एप ग्रुप के एडमिन शिक्षकों की मानें तो वीडियो क्लास में 2 मिनट का जो वीडियो डाला जाता है, उस वीडियो को बच्चे औसतन 30 सेकेंड भी नहीं देख रहे हैं.

इसे भी पढ़ें –अवमानना केसः SC ने प्रशांत भूषण पर लगाया एक रुपये का जुर्माना, नहीं भरने पर तीन महीनों की जेल

रांची के 230137 स्टूडेंट्स में से 60157 ही ले रहे लाभ

झारखंड के जिस शहर से पूरा राज्य संचालित होता है. वहां भी डिजिटल कंटेंट का लाभ स्टूडेंट्स नहीं ले रहे हैं. राजधानी रांची जिला में 18 ब्लॉक हैं. इन 18 ब्लॉक में 2552 सरकारी स्कूल हैं, जहां 230137 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं. इनमें से केवल 60157 स्टूडेंट्स तक ही डिजिटल कंटेंट मिल रहा है.

वहीं अन्य जिलों की बात करें तो चतरा में 203264 स्टूडेंट्स में से 49551, हजारीबाग में 217989 स्टूडेंट्स में से 75561, पाकुड़ में 149230 स्टूडेंट्स में से 25223, रामगढ़ में 94006 स्टूडेंट्स में से 25770, खूंटी में 64069 स्टूडेंट्स में से 17945, सिमडेगा में 60546 स्टूडेंट्स में से 15409, पलामू में 399371 स्टूडेंट्स में से 89266, बोकारो में 207814 स्टूडेंट्स में से 53995, गढ़वा में 242684 स्टूडेंट्स में से 67788, धनबाद में 261736 स्टूडेंट्स में 73494, गिरिडीह में 424061 स्टूडेंट्स में से 101753, लातेहार में 145631 स्टूडेंट्स में से 35395, पूर्वी सिंहभम में 184246 में से 63304, देवघर में 272685 में से 63473, कोडरमा में 113762 में से 32116, सरायकेला में 145997 में से 38069, गोड्डा में 220011 स्टूडेंट्स में से 39512, गुमला में 134755 स्टूडेंट्स में से 25197, दुमका में 227650 में से 37977, साहिबगंज में 206627 स्टूडेंट्स में से 30296, जामताड़ा में 131330 स्टूडेंट्स में से 29900, लोहरदगा में 76683 स्टूडेंट्स में से 23609 और पश्चिमी सिंहभूम में 265609 स्टूडेंट्स में से 70184 स्टूडेंट्स ही डीजी-साथ प्रोग्राम के तहत डिजिटल कटेंट से पढ़ाई कर पा रहे हैं.

स्मार्टफोन है ही नहीं तो कैसे करें पढ़ाई

सरकारी स्कूलों के बच्चों तक ऑनलाइन एजुकेशन का लाभ नहीं मिलने की वजह स्मार्टफोन नहीं होना है. जब तक लोगों का कामकाज शुरू नहीं हुआ था, तब तक तो बच्चे अभिभावक से मोबाइल लेकर पढ़ाई कर लेते थे. पर अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होते ही बड़ी संख्या में स्कूल के व्हाट्स एप ग्रुप से बच्चे/अभिभावक हट गये हैं.

स्कूल प्रिंसिपल के आंकड़ों के मुताबिक, नामकुम प्रखंड के प्राथमिक और माध्यमिक क्लास के 160 स्कूलों से 1500 से अधिक स्टूडेंट्स ने बीते 25 दिनों में व्हाट्स एप ग्रुप से लेफ्ट किया है. अभिभावकों का कहना है कि हम काम करें या बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल देकर बैठे रहें. वहीं अभिभावक इंटरनेट डेटा के खर्च बढ़ने की वजह से भी ग्रुप छोड़ रहे हैं.

विभाग कह रहा ऑनलाइन एजुकेशन ही एकमात्र विकल्प

ऑनलाइन एजुकेशन के प्रति स्टूडेंट्स की उदासीनता को शिक्षा विभाग गंभीरता से ले रहा है. विभाग ने शिक्षकों को व्हाट्सएप ग्रुप से छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को जुड़े रहने की प्रेरणा देने को कहा है. वहीं विभाग का कहना है कि ऑनलाइन एजुकेशन ही एकमात्र विकल्प है.

शिक्षा विभाग की ओर से पहले जो कंटेंट सुबह 10 बजे के बाद दिया जाता था, उसे अब नौ बजे दे रहा है. इसके बावजूद नियमित रूप से कंटेंट देखने वाले छात्र-छात्राओं में गिरावट आयी है.

इसे भी पढ़ें –आपको पता है- कोरोना काल में हमारे मूल अधिकार छीने जा रहे हैं?

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: