
Soumitra Roy
दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था का जहाज़ तेजी से डूब रहा है. सरकार चुपचाप यह देख रही है.
शेयर बाजार में भारतीय कंपनियों का मार्किट कैप यानी शेयरों का बाज़ार भाव सोमवार को 6 लाख करोड़ रुपये कम हुआ है. पिछले 2 महीने में यह सबसे बड़ी गिरावट है. सोमवार को 88 कंपनियों के शेयर सबसे निचले स्तर पर आ गये. वहीं 354 अन्य कंपनियों के शेयर भी गले तक डूब आये हैं.
बाज़ार को थामने के लिए मोदी सरकार से 10 लाख करोड़ के तत्काल राहत पैकेज की ज़रूरत है. यह देश के जीडीपी का 5% है. मोदी सरकार यह कदम उठाने में हिचक रही है. कल मोदीजी के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ग्रोथ 1-2% रहेगी. बाद में उत्पादन शुरू होने पर यह बढ़ेगी.
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उन्होंने शेयर बाजार की उठापटक को आर्थिक बुनियाद को न हिला पाने वाला बताया. मोदी सरकार की यही भाषा पिछले डेढ़ महीने से रही है.
CII के एक स्नैप पोल में 45% सीईओ का मानना है कि देश को कोरोना से उबरने में एक साल से ज़्यादा लगेंगे. 54% का कहना है कि उनके सेक्टर्स में नौकरियां जाएंगी. 45% का कहना है कि 15-30% तक छंटाई हो सकती है.
फिर मांग कैसे पैदा होगी ?
बेरोजगार भारत के पास खर्च के लिए पैसा कैसे आएगा? क्या देश का 28% मध्यम वर्ग ही खर्च करेगा, जिसमें से 14% निम्न मध्यम वर्ग के लोग हैं? छंटाई की सबसे ज़्यादा मार निम्न मध्यम वर्ग को ही पड़नी है. एक अनुमान के मुताबिक, करीब 5 करोड़ नौकरियां इसी निम्न मध्यम वर्ग की जाएगी.
मोदी सरकार चुप है. राहुल गांधी बोल रहे हैं. बता और समझा रहे हैं और मोदी की मूर्ख सेना यानी ट्रोल आर्मी उन्हें गालियां दी रही है. दिक्कत यह है कि सरकार राहुल गांधी की नहीं, मोदी की है. UPA सरकार को लकवाग्रस्त बोलने वाले आज मुंह छिपाए बैठे हैं.
डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.
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