
Raipur: छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों की मुठभेड़ के बाद अपहृत किए गए जवान राकेश्वर सिंह को नक्सलियों ने छोड़ दिया है. बताया जा रहा है कि राकेश्वर इस समय तर्रेम में 168 वीं बटालियन के कैंप में है.
बीजापुर जिले के तर्रेम थाना क्षेत्र के टेकलगुड़ा में नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान जवान राकेश्वर मन्हास को अगवा कर लिया गया था. चार दिन बाद नक्सलियों ने उसकी तस्वीर जारी की पर रिहा नहीं किया था.
नक्सलियों ने पर्चा जारी कर कहा था कि सरकार जवान को छुड़ाने की लिए मध्यस्थ की नियुक्ति करे.

सरकार द्वारा गठित दो सदस्यीय मध्यस्थता टीम के सदस्य पद्मश्री धर्मपाल सैनी और गोंडवाना समाज के अध्यक्ष तेलम बरैया समेत सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में नक्सलियों ने जवान को रिहा किया गया है. जवान की रिहाई के लिए मध्यस्थता करने गई टीम के साथ बस्तर के 7 पत्रकारों की टीम भी है मौजूद रही. नक्सलियों के बुलावे पर जवान को रिहा कराने बस्तर के बीहड़ में वार्ता 11 सदस्यीय टीम के साथ पहुंची थी.
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माओवादियों के कब्जेि में आए कोबरा टीम के राकेश्वर सिंह मन्हास की रिहाई के लिए उनके परिवार वालो ने सरकार से अपील की थी. सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह मन्हास की मां और पत्नील ने सरकार से जल्द से जल्द उन्हें नक्सलियों से छुड़ाने की अपील की थी. जिसके बाद अचानक यह खबर आइ है कि नक्सलियों ने जवान को रीहा कर दिया है.
पुलिस और नक्सलियों के बीच 3 अप्रैल को हुई मुठभेड़ में 23 जवान शहीद हुए थे. मुठभेड़ नक्सलियों के भी पांच लोग मारे गए थे. मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों ने CRPF के कोबरा कमांडर राकेश्वर का अपहरण कर लिया था. इसके बाद माओवादी प्रवक्ता विकल्प ने मंगलवार को प्रेस नोट जारी कर कहा था कि पहले सरकार बातचीत के लिए मध्यस्थ का नाम घोषित करे.
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