

Ranchi : 11 साल गुजरने के बाद भी कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है. इस वजह से प्रदेश का हायर एजुकेशन पटरी से उतरता नजर आ रहा है. इस मसले पर रांची यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोवीसी (प्रतिकुलपति) डॉ वीपी शरण ने अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा कि कॉलेजों में शिक्षकों की बहाली जल्द होनी चाहिये. 2008 के बाद से कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है. नियुक्ति के लिये जेपीएससी के भरोसे रहना उचित नहीं. शिक्षकों की बहाली कॉलेज सर्विस कमिशन के जरीये होनी चाहिये. पड़ोसी राज्य बिहार में कॉलेज सर्विस कमिशन के जरीये ही शिक्षकों की बहाली की जा रही है.
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निजी शिक्षण संस्थानों से पीछे हैं राज्य के यूनिवर्सिटी
निजी विश्वविद्यालयों व संस्थानों की तुलना में प्रदेश के विश्वविद्यालय काफी पीछे हैं. उदाहरण के तौर पर देंखें तो बीआईटी मेसरा सहित अन्य निजी संस्थानों में छात्रों का शत-प्रतिशत प्लेसमेंट होता है. वहीं प्रदेश के विश्वविद्यालय के छात्रों का प्लेसमेंट नहीं के बराबर होता है.
इसकी वजह क्वालिटी और एजुकेशन के साथ प्रैक्टिकल नॉलेज का नहीं होना है. दूसरी वजह यह भी है कि शिक्षक अपने आप को अपग्रेड नहीं कर पा रहे हैं. टीचरों के अपग्रेडेशन के लिये एक्सचेंज प्रोग्राम का होना जरूरी है. इससे टीचर भी देश और दुनिया की नई शिक्षण व्यवस्था को जान पायेंगे.
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उच्च शिक्षा में हर विभागों की होनी चाहिये जवाबदेही
उच्च शिक्षा में हर विषयों के विभागों की जवाबदेही तय होनी चाहिये. कक्षाएं रेगुलर हों. रजिस्टर मेनटेन हो. इसकी प्रोपर मॉनिटरिंग जरूरी है. इसके अलावा फॉरेन लैंग्वेज के लिये अलग से विभाग बनाने की जरूरत है. वर्तमान में चाइनीज और जपानी भाषा की काफी डिमांड है.
फॉरेन लैंग्वेज में काफी काम करने की जरूरत है. वोकेशनल कोर्स का भी ढ़ांचा खड़ा करना होगा. जिससे छात्रों को रोजगार परक शिक्षा मिल सके. आज की तारीख में एक्सआईएसएस और एक्सएलआरआई के छात्रों की डिमांड की वजह यह है कि उन्हें प्रोफेशनल तरीके से तैयार किया जाता है. जबकि राज्य के यूनिवर्सिटी में इस तरह की व्यवस्था नहीं है.
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स्कील इंडिया, डिजिटल इंडिया को भी जमीं पर उतारना होगा
छात्रों के स्वरोजगार के लिये स्कील इंडिया और डिजिटल इंडिया को भी जमीं पर उतारना होगा, जिससे छात्रों को रोजगार मिल सके या खुद वे स्वरोजगार कर सकें.
छात्रों को मिलने वाले एजुकेशन लोन को भी सरल करना होगा. क्योंकि लोन का रेट ऑफ इंटरेस्ट काफी अधिक है. इससे प्रदेश के ट्राइबल छात्र वंचित हो रहे हैं.
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सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों की बराबरी में लाना होगा
हायर एजुकेशन की जड़ मजबूत करने के लिये पहले जड़ मजबूत करने की जरूरत है. सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों की बराबरी में लाना होगा. आज सरकारी स्कूलों में टीचरों के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर का आभाव है.
जबकि सरकार में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के अलग-अलग विभाग भी बनाये गयें हैं, लेकिन इसकी प्रोपर मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है. टीचर के आभाव में रेगुलर क्लासेस भी नहीं हो रहे हैं. इसलिये पूरी शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिये ग्रास रूट लेवल पर काम करना होगा.
डॉ. वीपी शरण (पूर्व प्रोवीसी, (रांची यूनिवर्सिटी) से बातचीत पर आधारित




