Read Next
21/12/2025
भारत के पुल : कठिनाइयों पर स्थापत्य की विजय
30/11/2025
रांची : किंग कोहली के विराट शतक और कुलदीप के 4 विकेटों से जीता भारत, 17 रनों से मिली जीत
26/11/2025
क्रिकेटर विराट कोहली पहुंचे रांची, 30 नवंबर को होने वाले वनडे मुकाबले में आएंगे नजर
23/11/2025
ED के 44 ठिकानों पर हुई रेड में मिले 14 करोड़ से अधिक नकद और कोयला घोटाला के बड़े सबूत
20/11/2025
नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, 26 मंत्रियों में तीन महिला और एक मुस्लिम चेहरा शामिल
18/11/2025
अल फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद सिद्दीकी मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ईडी की रेड के बाद हुई गिरफ्तारी
18/11/2025
एक करोड़ का इनामी नक्सली कमांडर हिडमा और उसकी पत्नी हुई ढेर
17/11/2025
अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला में झारखंड पवेलियन में लाइव तसर सिल्क डेमो ने खींचा आगंतुकों का ध्यान
15/11/2025
बिहार चुनाव में एनडीए की रिकॉर्ड जीत पर बोले पीएम मोदी, बिहार ने गर्दा उड़ा दिया
13/11/2025
सुप्रीम कोर्ट का झारखंड सरकार को निर्देश, सारंडा वन क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य के रूप में करें अधिसूचित
Back to top button
New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में मंगलवार को सुनवाई शुरू की. इस मामले को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के प्रयास विफल रहा था. जिसके बाद अब छह अगस्त से इसमें रोजाना सुनवाई होगी.
इसे भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का विरोधः JNU में आधी रात लगे 370 वापस लाओ के नारे
सुनवाई में कौन-कौन हैं शामिल
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि चलिए हम सुनवाई शुरू करते हैं. इस पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर भी शामिल हैं.
पीठ ने तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट पर दो अगस्त को संज्ञान लिया था कि करीब चार महीने तक चली मध्यस्थता की कार्यवाही में कोई अंतिम समाधान नहीं निकला. मध्यस्थता पैनल की अध्यक्षता शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला कर रहे थे.
इसे भी पढ़ें- उन्नाव रेप केस : सड़क दुर्घटना में घायल पीड़िता के वकील को विशेष एयर एंबुलेंस से भेजा गया दिल्ली
लाइव प्रसारण को कोर्ट ने किया खारिज
राम मंदिर मामले के लाइव प्रसारण की मांग की गयी थी. जिसके कोर्ट ने खारिज कर दिया और कहा कि इस मामले में लाइव प्रसारण नहीं किया जायेगा. वहीं सुनवाई शुरू होते ही निर्मोही अखाड़े की तरफ से सुशील कुमार जैन ने अपनी बात रखनी शुरू की.
जिसमें यह बात कही गयी कि 16 दिसंबर 1949 को जन्मभूमि पर बनाई गई मस्जिद में आखिरी बार नमाज पढ़ी गयी थी. जिसके बाद 1961 में वक्फ बोर्ड ने अपना दावा दाखिल किया था. लेकिन हम ही उस स्थान पर सदियों से पूजा करते आ रहे हैं, हमारे पुजारी ही प्रबंधन को संभाल रहे थे. जिसके बाद 6 दिसंबर, 1992 को कुछ शरारती तत्वों द्वारा रामजन्मभूमि के विवादित ढांचे को गिरा दिया गया था.