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गढ़वा: बरगड़ प्रखंड के परसवार पंचायत में मनरेगा के तहत चली योजनाओं में 17 लाख का गबन

Pravin Kumar, Garhwa: सरकार की विकास योजना की जमीनी हकीकत खुलकर सामने आ रही है. जो योजनाएं धरातल पर हैं ही नहीं उन योजनाओं के धन सरकारी खाते से निकाल लिये गये हैं. यही नहीं मजदूरों के नाम पर भी लाखों रुपये की निकासी की गयी है. जिन मजदूरों के नाम से पैसे की निकासी की गयी उन्‍हें किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं थी. पहले इनके फर्जी अकाउंट खोल कर अकाउंट में पैसे डाले गये और फिर प्रखंड पंचायत के पदाधिकारियों की मिली भगत से 17 लाख चौरासी हजार रुपये का गबन किया गया.

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ऑडिट के दौरान सामने आया मामला

झारखंड छत्तीसगढ़ सीमा के पास गढ़वा जिले के बरगड़ प्रखंड के चार पंचायतों में सोशल ऑडिट किया गया. सरकारी योजना की धनराशि की हो रही बंदर बांट की जमीनी हकीकत सोशल ऑडिट टीम ने सामने लाया. परसवार पंचायत में की गयी सोशल ऑडिट में मनरेगा के तहत सरकारी धन की लूट के मामले सामने आये, जो सरकारी विकास के दावों को खोखला साबित करते हैं. क्षेत्र में 2016 और 17 वित्त वर्ष में मुख्य कार्य डोभा निर्माण था. इस डोभा निर्माण के संबंध में सरकार ने राष्‍ट्रीय मंच पर भी अपनी बात रखी थी और कहा था कि जल संरक्षण की दिशा में झारखंड अग्रणी कार्य कर रहा है, जबकि इसकी जमीनी हकीकत बिल्कुल इसके विपरीत है.

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पंचायत के संजय कुजूर का आवेदन डोभा निर्माण योजना के तहत स्वीकृत किया गया था. इसकी कुल लागत 20 हजार 67 रुपए थी. लेकिन इस योजना में भुगतान 42 हजार 84 रुपए किया गया. जबकि योजना के अनुसार राशि की स्वीकृति 22 हजार 267 रूपये की थी. इस गड़बड़ी पर उठे सवाल सिर्फ पंचायत सेवक या रोजगार सेवक की दायित्व बताकर टाला नहीं जा सकता है. इसमें मुखिया से लेकर तमाम अधिकारी की मिली भगत को लोग आसानी से समझ रहे हैं. पंचायत में ऐसी योजनाओं को भी लागू किया गया, जिसे ग्राम सभा से पास नहीं किया गया था. उपरी तौर पर ऐसी योजनाओं को स्वीकृति प्रदान कर 8 लाख 94 हजार 256 रुपये की निकासी की गयी, जो ग्राम सभा के रजिस्टर में दर्ज तक नहीं है.

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: डोभा निर्माण के नाम पर महेंद्र प्रजापति सुलोचना देवी को 16020 रुपए का भुगतान किया गया और यह राशि उनके खाते से निकाल ली गयी. इस मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं.

: बिना काम किये तीन लाख 45 हजार 159 रुपये की मजदूरी का भुगतान किया गया.

: जिनके नाम पर डोभा निर्माण की राशि निकाली गयी उन्‍होंने बैंक में खाता भी नहीं खुलवाया था. फर्जी बैंक खाता खोल कर 30 मजदूरों के नाम पर राशि की निकासी की गयी.

: पंचायत की 35 योजनाओं में 8 लाख 94 हजार 256 रुपये की योजना लागू कर दी गयी जो ग्राम सभा के रजिस्टर में दर्ज तक नहीं.

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क्या कहते हैं, प्रखंड विकास पदाधिकारी, विपिन कुमार भारती

बरगड़ प्रखंड के चार पंचायतों और चार गांवों में सोशल ऑडिट किया गया, जिसमें योजना लागू करने में घोर अनियमितता और गड़बड़ी की शिकायत के बाद मामला सोशल ऑडिट के माध्यम से उजागर हुआ. योजनाओं के सही ढंग से निगरानी नहीं होने के कारण मुखिया से लेकर रोजगार सेवक तक की इसमें हुई गड़बड़ी की जिम्‍मेदारी बनती है. अत: सभी पर कार्रवाई की जायेगी. डोभा निर्माण के कार्य में भारी अनियमितता बरती गयी. लाखों रुपये के सरकारी धन का गबन किया गया जिसका प्रमाणित दस्तावेज सोशल ऑडिट की टीम ने जमा किया है. साथ ही तमाम योजनाओं में जहां पर गड़बड़ी हुई है और जिन्‍होंने गड़बड़ी की है, उन लोगों से पूरी राशि रिकवरी का आदेश जूरी सदस्यों ने दे दिया है.

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परसवार मुखिया ललिता बखला कहती हैं कि मुझे योजनाओं की जानकारी नहीं थी. पेमेंट के दिन रोजगार सेवक मास्टर रोल में हस्ताक्षर कराने के लिए मेरे पास दस्तावेज लाया करते थे. इसी कारण योजनाओं के पैसों के बंदर बांट की जानकारी हमें नहीं है.

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