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सरकारी नौकरी मिलने के बाद पहली बार अपने गाँव पहुंची अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रोपनी कुमारी, नन्हे बच्चों को दिया हॉकी बॉल और स्टिक बैग

अंतरराष्ट्रीय खिलाडी पूर्णिमा और अंजनी भी सिखला रही फुटबॉल गेम

Simdega: अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रोपनी कुमारी इन दिनों सिमडेगा के अपने गाँव में है. सिमडेगा जिला के ठेठईटांगर प्रखंड अंतर्गत जामबहार में उनका घर है. कुछ माह पहले ही दक्षिण पूर्व रेलवे, रांची में उसे नौकरी मिली है. नौकरी मिलने के बाद वह पहली बार अपने घर आई हुई है. गांव पहुंचने के साथ ही रोपनी ग्रामीणों के द्वारा श्रमदान से निर्मित खेल मैदान में संचालित आत्म निर्भर हॉकी प्रशिक्षण केंद्र जामबहार के नन्हे मुन्ने हॉकी खिलाड़ियों के बीच पहुंची. उन्हें हॉकी का प्रशिक्षण भी दे रही है. नन्हे हॉकी खिलाड़ियों को हॉकी बॉल, स्टिक बैग और मिठाई देकर उन्हें प्रोत्साहित भी किया. बचपन से ही आर्थिक विपन्नता देख चुकी और बचपन में ही पिता का साया खोने वाली रोपनी खुद विपरीत परिस्थितियों से पली बढ़ी है. बच्चों के अलावा रोपनी ने गांव के ही कुछ बुजुर्गों को धोती और  साड़ी देकर सम्मानित किया जिसके लिए उसकी सराहना हुई.

पूर्णिमा और अंजनी भी बढ़ा रही बच्चों का उत्साह

जामबहार गांव की ही अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी पूर्णिमा कुमारी जो FIFA जूनियर वर्ल्ड कप सहित कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जूनियर भारतीय महिला फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी है, वह भी बच्चों को फुटबॉल का गुर सीखा रही है. राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी अंजनी कुमारी जो ग्रीष्म अवकाश में घर आई है, वे भी इसमें मदद कर रही हैं.

मोबाइल और कुरीतियों से दूर रहने पर सफलता

हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी बुधवार को अगले सुबह आत्म निर्भर हॉकी प्रशिक्षण केंद्र, जामबहार में अभ्यास कर रहे बच्चों के खेल मैदान पहुंचे. इनका मनोबल बढ़ाया. साथ ही इनके प्रशिक्षण के लिए इनके लिए कुछ नियमावली भी बनाई ताकि बच्चे नियमित रूप से मैदान आए. इसके अलावा मनोज ने खिलाड़ियों, उनके अभिभावकों और ग्रामीणों के साथ एक बैठक भी की. कहा कि आपलोग अपने बच्चों को नियमित रूप से   प्रत्येक दिन सुबह-शाम प्रशिक्षण के लिए मैदान भेजें. बच्चों को मोबाइल और विभिन्न कुरीतियों से दूर रखें और उनमें खेल मैदान आने की आदत डालें. इससे आगे चलकर और बच्चे भी रोपनी कुमारी और पूर्णिमा कुमारी बन सकेंगे. पढ़ाई के साथ खेल से भी कैरियर बन सकता है.

किसी भी खिलाड़ी को खेल में लंबे कैरियर के लिए बचपन से ही पौष्टिक आहार की आवश्यकता है. पर आर्थिक अभाव के कारण दूध दही, काजू, किसमिस या सेव अंगूर नहीं दे पाते हैं. लेकिन गांव के आस-पास आसानी से उपलब्ध होने वाले मडूआ, मूनगा साग, सुनसुनिया साग, करमी साग, बैंग साग, चकोड़ गुंडा,  मूंगफली, चना, प्रत्येक दिन दो- तीन पीस सुखा हुआ महुआ, बरसात के दिनों में नदी नाला में मिलने वाले छोटी मछली, केंकडा,  घोंघी,सेतुवा, खुखड़ी, पुटु डूमर, केंदू, चार, जामुन, पपीता,  इत्यादि जैसे पौष्टिक आहार निःशुल्क प्राप्त कर उनका नियमित या उपलब्धता अनुसार सेवन कर सकते हैं.

गर्मी की छुट्टियों में गाँव आए शिक्षक सहदेव मांझी ने भी कहा कि बच्चों को नियमित रूप से मैदान और स्कूल भेजना चाहिए. उनकी ओर से हमेशा की तरह आगे भी सहयोग रहेगा.

गांव में श्रमदान से मैदान

गौरतलब है कि जामबहार गाँव  की जनसंख्या करीब 800 की है. 100 से भी अधिक परिवार वाले इस गांव में रोपनी कुमारी पहली महिला है जिसे सरकारी नौकरी मिली है. इससे इस गांव और पास के फरसपनी इत्यादि गांव के लोग काफी उत्साहित हैं. पिछले सप्ताह हॉकी सिमडेगा द्वारा आयोजित मिनी सब जूनियर ग्रास रूट डेवलपमेंट हॉकी प्रतियोगिता में यहां के खिलाड़ियों ने भाग लिया था. हॉकी सिमडेगा के साथ मिलकर स्थानीय निवासी सहदेव मांझी के मार्गदर्शन से  तीन वर्ष पहले इस गांव में निजी जमीन को श्रमदान से समतल कर खेल मैदान का निर्माण किया गया. आत्म निर्भर हॉकी प्रशिक्षण केंद्र, जामबहार की शुरुआत की गई थी. इधर कुछ माह प्रशिक्षण बंद था लेकिन हॉकी सिमडेगा द्वारा आयोजित मिनी सब जूनियर ग्रास रूट डेवलप हॉकी प्रतियोगिता से एक नई ऊर्जा आई है. पुनः प्रशिक्षण शुरू किया गया है. यह भी ज्ञात है कि रोपनी कुमारी भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य है. वह जूनियर एशिया कप और जूनियर विश्व कप में भारतीय जूनियर महिला टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी है.

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