
Ranchi : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बांग्लादेश में पिछले दिनों हुई हिंसक घटनाओं पर चिंता जताई है. संघ के सह प्रांत कार्यवाह राकेश लाल ने बुधवार को संघ कार्यालय श्रीनिकेतन, रांची के सभागार में प्रेस वार्ता में कहा कि कार्यकारी मंडल की वर्ष में दो बार बैठक होती है. एक प्रतिनिधि सभा से पहले और दूसरा दशहरा और दीपावली के बीच में. कोरोना के कारण पिछले साल बैठक नहीं हो सकी थी. कोरोना काल में संघ के स्वयंसेवकों ने लाखों की संख्या में सेवा कार्य किए. कोरोना के कारण संघ कार्य का विस्तार भी बाधित हुआ, शाखाएं ठीक से नहीं लग पाईं.
मंडल की बैठक में बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमलों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया है. वहां हिन्दू समाज पर आक्रमण अचानक घटित घटना नहीं है. फेक न्यूज के आधार पर साम्प्रदायिक उन्माद पैदा करने की कोशिश की गई है. ये हिन्दू समाज के निर्मूलन का योजनाबद्ध प्रयास था.
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बैठक में बांग्लादेश के व्यापक इस्लामीकरण के जिहादी संगठनों के षडयंत्र की घोर निंदा की गई है. मंडल ने भारत सरकार से भी अनुरोध किया कि उपलब्ध सभी राजनयिक माध्यमों का उपयोग करते हुए बांग्लादेश में हो रहे आक्रमणों व मानवाधिकार हनन के बारे में विश्व भर के हिन्दू समाज एवं संस्थाओं की चिंताओं से बांग्लादेश सरकार को अवगत करायें.
वहां के हिन्दू और बौद्ध समाज की सुरक्षा सुनिश्चित कराई जाये. पत्रकार वार्ता में प्रान्त प्रचार प्रमुख धनन्जय कुमार सिंह भी उपस्थित थे.
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झारखंड में लग रही 664 शाखाएं
राकेश लाल ने संघ के कार्यवृत के बारे में बताया. कहा कि देश में अभी 34 हजार स्थानों पर दैनिक शाखा, साप्ताहिक मिलन 18490 स्थानों पर, मासिक मंडली 7905 स्थानों पर यानि कुल 55 हजार स्थानों पर संघ का प्रत्यक्ष कार्य दिखता है. अभी देश भर में 54382 दैनिक शाखाएं लग रही हैं. झारखंड में कुल 750 स्थानों पर संघ का प्रत्यक्ष कार्य चल रहा है. अभी झारखंड में 664 दैनिक शाखाएं लग रही हैं.
देश स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मना रहा है. इस निमित्त संघ के स्वयंसेवक समाज व विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेंगे, स्वतंत्र रूप से भी आयोजन होंगे. स्वतंत्रता आंदोलन के अज्ञात सेनानियों का जीवन समाज के सामने लाया जाएगा. भारत का स्वतंत्रता आंदोलन विश्व में विशिष्ट रहा है जो सबसे लंबे समय तक चला है.
आंदोलन में देश की एकात्मता प्रकट हुई. यह आंदोलन केवल अंग्रेजों के खिलाफ नहीं था, अपितु भारत के ‘स्व’ का आंदोलन था. इसलिए स्वदेशी आंदोलन उसमें जुड़ गया, स्व-भाषा, स्व-संस्कृति का आंदोलन जुड़ गया.
ऐसे में इसकी जानकारी व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास होगा.सिक्ख पंथ के नवम गुरु गुरु श्री तेगबहादुर जी के 400वें प्रकाश वर्ष पर संघ सम्पूर्ण समाज के साथ मिलकर कार्यक्रमों के आयोजन करेगा.
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