News Wing
Bhopal, 13 August: विस्थापितों की लड़ाई लड़ने वाली नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर को आजादी की रात मध्यप्रदेश की धार जेल में काटनी होगी. न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, मेधा पर चार मामले दर्ज किए गए हैं, एक में जमानत मिल गई है, तीन पर सुनवाई 17 अगस्त को होगी, यानी 14-15 अगस्त की रात को वे जेल में रहेंगी.
ज्ञात हो कि सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने से नर्मदा घाटी के लगभग 192 गांव में निवासरत 40 हजार परिवार के डूब में आना तय है. इन परिवारों के पुनर्वास के इंतजाम सरकार को करना था, मगर हुई सिर्फ खानापूर्ति. आलम यह है कि पुनर्वास स्थलों पर सुविधाएं नाममात्र की है, टीन के कमरे बना दिए गए हैं, बिजली का अता-पता नहीं है, शिक्षा व स्वास्थ्य का कोई इंतजाम नहीं है.
लिहाजा, पहले पुनर्वास स्थलों पर बेहतर इंतजाम और फिर विस्थापन की मांग को लेकर मेधा पाटकर 27 जुलाई से धार जिले के चिखल्दा में मेधा उपवास पर बैठीं थी. उनके उपवास के 10 दिन तक तो प्रशासन और सरकार ने गौर नहीं किया, मगर हालत बिगड़ने पर उन्हें भारी पुलिस बल का प्रयोग कर जबरिया उपचार के नाम पर इंदौर के बॉम्बे अस्पताल ले जाया गया.
मेधा को आईसीयू में रखा गया और किसी से मिलने नहीं दिया गया. वे जब इंदौर से कार से बड़वानी जा रही थीं, तो उन्हें धार जिले की सीमा में शांति भंग होने की आशंका के चलते गिरफ्तार कर धार जेल भेज दिया गया.
मेधा गुरुवार से धार जेल में है, शुक्रवार को तकनीकी गड़बड़ी के चलते वीडियो कॉफ्रेंसिग से उनकी पेशी नहीं हो पाई थी. शनिवार को धार न्यायालय से एक प्रकरण में उन्हें जमानत मिल गई और तीन पर सुनवाई होनी है. तारीख 17 अगस्त तय की गई है.




