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रांची : शहर के होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित इंजीनियर नमोनाथ की पांच पुस्तकों के लोकार्पण समारोह का उद्घाटन करते हुए झारखण्ड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति हरीश चन्द्र मिश्र ने कहा कि मौलिक प्रतिभा एक ऐसी अमूल्य निधि है जिसे विभिन्न रचनात्मक कृतियों में भी रूपांतरित किया जा सकता है.
रूना प्रकाशन की ओर से नूतन मिश्रा द्वारा प्रस्तुत स्वागत, इ. नमोनाथ द्वारा प्रस्ताविकी, डॉ रानी झा द्वारा प्रस्तुत वंदना तथा स्वागताध्यक्ष विज्येंद्रनाथ झा द्वारा अतिथियों के पारंपरिक सत्कार के बाद मुख्य अतिथि के रूप में कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्विद्यालय के कुलपति डॉ देवनारायण झा ने कहा कि एक खनन वैज्ञानिक द्वारा रत्नों के वैज्ञानिक एवं विश्लेषनात्मक पक्ष को तो उजागर किया ही गया है साथ ही उन्होंने दो अनूठे मौलिक उपन्यास भी लिखे हैं जो लेखक की क्षमता के परिचायक हैं.
इस अवसर पर सेवानिवृत न्यायमूर्ति विक्रमादित्य प्रसाद, मैथिली के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रामदेव झा, हिंदी के प्रसिद्ध समालोचक डॉ रविभूषण, मैथिली के समालोचक मोहन भारद्वाज तथा प्रसिद्ध खनन विशेशज्ञ चंद्रशेखर झा ने क्रमशः रत्न मीमांसा, पवित्र माटी, तीसरा बुद्ध, तेसर बुद्ध एवं विश्व पटल पर ज्योतिष शीर्षक पुस्तकों का विमोचन किया. विमोचित पुस्तकों पर डॉ नारायण कुंवर, समालोचक डॉ भीमनाथ झा, श्रीमती कलावंती सिंह, डॉ शंकरदेव झा तथा डॉ रामचंद्र झा जैसे विद्वानों ने समीक्षा भी प्रस्तुत की.
समारोह की अध्यक्षता डॉ वीना ठाकुर ने की, उन्होंने लेखक द्वारा इन विविध रचनाओं की एक साथ प्रस्तुति की सराहना करते हुए भारतीय भाषाओँ में इस प्रकार की रचनाओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला. समारोह में डॉ दिलीप कुमार झा, कमलाकांत झा, ब्रह्मेन्द्र झा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए.
समारोह को सफल बनाने में डॉ संगीता, गार्गी सोम, सुनीता लोधा, अदिति नयन, आदर्श भास्कर एवं आदि भव्या की भूमिकाएं भी महत्वपूर्ण रहीं. प्रो. मृणाल पाठक एवं कमलाकांत झा ने मंच संचालन तथा झारखण्ड मैथिली मंच के महासचिव जयन्त कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया.




