सुरजीत सिंह
झारखंड में दो बड़े राजनीतिक दल (विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से) हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो). भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है और झामुमो क्षेत्रीय. पर दोनों दलों के नेताओं में राष्ट्रीय व क्षेत्रीय का अंतर नहीं दिखता. दोनों पार्टी के नेता तू सर्कस-तू सर्कस खेल रहे हैं. एक-दूसरे को बेनकाब करने की सिर्फ बातें करते हैं. बेनकाब करते नहीं. दो नवंबर को झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने भाजपा की सरकार को सर्कस बताया. कहा, सर्कस का एक शो खत्म होता है. दूसरे की तैयारी शुरु हो जाती है. संवाददाता सम्मेलन में जब एक पत्रकार ने पूछा कि मुख्यमंत्री का बेटा सरकारी दल के साथ मुंबई गया था, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है. हेमंत ने उस सवाल पर कोई जांच या गंभीर बात नहीं की. गोल-मटोल बात करके चुप हो गए. कुछ घंटे बाद भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव व दीनदयाल वर्णवाल ने प्रेस कांफ्रेंस की. कहा, झामुमो खुद सर्कस है. सोरेन परिवार उस सर्कस का रिंग मास्टर है. भाजपा के इन प्रवक्ताओँ ने हेमंत सोरेन के उस खुलासे पर कुछ नहीं कहा, जिसमें हेमंत ने कहा है कि एक खबर छापने पर एक अखबार के संपादक को धमकी दी गयी. कहा गया कि साल में 12 करोड़ का विज्ञापन विरोध में खबर छापने के लिए नहीं देते हैं.
दोनों पार्टी के नेताओं ने एक-दूसरे की पार्टी को सर्कस कहा. बात खत्म.
न भाजपा यह चुनौती देगी कि हेमंत आरोप को साबित करें और न ही हेमंत आगे बढ़ कर सबूत पेश करेंगे.
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है.
09 जुलाई 2017 को भाजपा ने झामुमो पर आरोप लगाया. 10 जुलाई 2017 को झामुमो ने भाजपा नेताओं की पोल खोलने की धमकी दी.
फिर बात खत्म. किस्सा खत्म. दोनों चुप.
18 अक्तूबर 2017 को हेमंत सोरेन ने भूख से मौत के सवाल पर सरकार को घेरा. कहा मुख्यमंत्री रघुवर दास राज्य के लिए अभिशाप बन गए हैं. कुछ घंटे बाद भाजपा के प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश ने प्रेस कांफ्रेंस कर हेमंत को चुप रहने की नसीहत देते हुए कहा कि अगर ज्यादा बोलेंगे, तो भाजपा उनकी पोल खोल देगी.
फिर बात खत्म. झामुमो भी चुप-भाजपा भी चुप.
भाजपा ने कई बार कहा है कि सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर हेमंत सोरेन समेत झामुमो नेताओं ने जमीन ली. मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद रघुवर दास ने कहा था कि आदिवासी की जमीन गलत तरीके से खरीदने वालों को वह जेल भेजेंगे. जांच कमेटी बनायी. कमेटी ने रिपोर्ट दी. अब तक कोई कार्रवाई सरकार के स्तर से की गयी है. इसकी सूचना नहीं है.
मुख्यमंत्री दर्जनों बार नहीं, 100 से अधिक बार कह चुके हैं. 14 साल तक राज्य पर राज करने वालों ने जनता को लूटा. हेमंत सोरेन का नाम भी लेते रहे हैं. इस सरकार के भी तीन साल हो गए. शायद ही किसी को याद आए कि सरकार ने हेमंत सोरेन या उनके किसी नजदीकी पर किसी तरह की कार्रवाई की हो.
इस बीच झारखंड की भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए 31 अक्टूबर को मोरहाबादी मैदान में विपक्षी पार्टियों की रैली हुई. हेमंत सोरेन को भी आमंत्रित किया गया था. लेकिन वह नहीं गए.
ये तथ्य झारखंड की जनता को कंफ्यूज कर रहे हैं. झारखंड के ये दोनों बड़े दल यही कर रहें हैं. भाजपा-झामुमो एक-दूसरे की विरोधी पार्टी है या दिखावे के लिए विरोध करती है. अंदर ही अंदर दोनों एक ही हैं. अतीत में जाने पर दोनों दलों के रिश्ते कई बार प्रगाढ़ होने के सबूत भी मिलते हैं. अंग्रेजी का एक शब्द है-commenselism. जिसका अर्थ होता है, तुम मुझे सेफ रखो-मैं तुझे नुकसान नहीं पहुंचाउंगा. एेसा लगता है दोनों दल के नेता इसी शिद्धांत पर चल रहें हैं. यूं कहें दोनों दलों के नेता जनता को बरगला रहे हैं. राज्य के मूल सवालों पर जनता का ध्यान नहीं जाए. इसलिए आपस में लड़ने, एक-दूसरे की पोल खोलने, देख लेने की धमकी देकर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि विरोधी हैं. ताकि लोग दोनों पार्टी के जुमलों पर ही चर्चा करते रहें. यह सारा खेल मूल मुद्दे, समस्या से लोगों का ध्यान हटाने का है. ताकि आम लोग न सरकार से सवाल कर सके और न ही विपक्ष से.
इन मुद्दों को नहीं उठाते भाजपा-झामुमो के नेता
– मनरेगा के मजदूरों (जिनकी स्थिति सुबह खाओ, शाम की जुगार करने वाली है) को पिछले डेढ़ माह से मजदूरी नहीं मिली है. सरकार पर 3066 करोड़ भुगतान बकाया है.
– रांची-जमशेदपुर रोड क्यों नहीं बन रहा. हाई कोर्ट हर सप्ताह फटकार लगा रही है. पर भाजपा-झामुमो दोनों चुप है.
– हजारीबाग-बरही फोरलेन रोड क्यों नहीं बन रहा.
– कुछ दिन पहले राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा था कि राज्य के 75 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. यह एक तरह से सरकारी की स्वीकारोक्ति है राज्य के हालात की. पर विपक्षी पार्टी झामुमो के लिए मुद्दा नहीं. भाजपा नेता भी चुप ही रहे.
– हेमंत सोरेन आदिवासी नेता हैं. आदिवासी की कल्याण की बात करते हैं. पर, उनके लिए भी राजधानी का आदिवासी मुहल्लों का सिमटता जाना व खत्म होना कोई मुद्दा नहीं है.
– डिजिटल इंडिया के नाम पर राज्य के एक लाख महिलाओं को घटिया मोबाइल फोन क्यों दिया गया. इसके लिए कौन जिम्मेदार है.
– झामुमो के लिए यह भी मुद्दा नहीं है, कि क्यों झारखंड में सोलर पावर का रेट देश में सबसे ज्यादा है. देश के दूसरे राज्यों में सोलर पावर का रेट 2.44 रुपये है, जबकि झारखंड सरकार निजी कंपनियों से 4.95 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदेगी.




