।। स्कूलों के छात्रों एवं शिक्षकों ने जाना, आपदा के समय कैसे करें बचाव ।।
रांची : ‘‘जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार, रांची की ओर से मंगलवार को ‘‘ डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल पुन्दाग, सेंट फ्रांसिस स्कूल हरमू और टेन्डर हर्ट स्कूल तुपुदाना में ‘‘आपदा प्रबंधन एवं स्कूल सुरक्षा विषय’’ पर जागरुकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 400 से अधिक छात्र और शिक्षक शामिल हुए। कार्यक्रम के अन्तर्गत भूकम्प, आग, वज्रपात से बचाव के उपाय बताये गये। स्कूल स्तर पर आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी देने के साथ-साथ स्कूल स्तर पर विभिन्न आपदाओं से बचाव के लिये आवश्यक कार्य दल एवं उनकी भूमिका के बारे में प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी मनोज कुमार सिंह ने जानकारी कि इन्डो आस्ट्रेलियन प्लेट और यूरेशियन प्लेटों की आपस की टक्कर पिछले दिनों नेपाल एवं पाकिस्तान में आये भूकम्प की प्रमुख वजहें रही हैं। रांची जिला भी भूकम्प के जोन 3 में शामिल है इसलिये स्कूलों, अस्पतालों को भूकम्प के प्रति अधिक सतर्क करने की जरुरत है। उन्होंने स्कूल स्तर पर भूकम्प के नजरिये से जोखिम एवं खतरों के साथ साथ संरचनात्मक व गैर संरचनात्मक खतरे के बारे में भी जानकारी दी।
श्री सिंह ने शिक्षकों और बच्चों को बताया कि कक्षा से बाहर निकलने वाले दरवाजे के आसपास बधाएं नहीं होनी चाहिये जिससे बच्चे आसानी से खुले मैदान में जा सकें, कांच की खिड़की पर ग्रिल या परदे लगाये जाने चाहिये जिससे बच्चों को भूकम्प के समय चोटें न आयें, रासायनिक प्रयोगशाला कक्ष में केमिकल की बोतल को सुरक्षित तरह से रखना चाहिये, पुस्तकालय में रखे बुक कैबिनेट या आलमारी को दीवारों से फिक्स करना चाहिये जिससे भूकम्प के समय उनके गिरने से छात्रों को चोट न लगे। उन्होंने बताया कि स्कूलों के भवनों एवं कक्षाओं को नियमित अन्तराल पर जांच कर उसमें आवश्यक सुरक्षा उपाय किये जाना चाहिये।
मनोज कुमार सिंह ने आग से बचाव के बारे में प्रशिक्षण देते हुए आग लगने की प्रमुख वजहें, आग के प्रकार जैसे ज्वलनशील पदार्थ की आग, गैस की आग, तरल पदार्थ की आग, मेटल की आग व इलेक्ट्रिक आग की स्थिति में बचाव के किन साधनों का प्रयोग करना चाहिये इसकी जानकारी देते हुए आग बुझाने की विभिन्न विधियों व आग बुझाने में प्रयुक्त फायर एक्सटिंग्यूसर ए.बी.सी., सी.ओ.टू. का प्रदर्शन कर उसे चलाने के तरीकों के बारे में जानकारी दी।
अशोक कुमार शर्मा ने इस दौराना वज्रपात के लक्षण, वज्रपात से बचाव के उपाय और वज्रपात से पूर्व, वज्रपात के दौरान किये जाने वाले सुरक्षा उपायों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बिजली चमकने एवं गड़गड़ाहट की आवाज के बीच 15 सेकेन्ड से भी कम समय का अन्तर है तो ये अनुमान लगा लें कि वज्रपात की संभावना है ऐसे में घबड़ाकर ऊंचे एवं अकेले पेड़ के नीचे शरण नहीं लेना चाहिये। जब आप खुले आसमान में हों तब सदैव कम ऊंचाई वाले समूह में लगे पेड़ के नीचे चला जाना चाहिये या पास के किसी मजबूत छत वाले घर में जाना चाहिये, इस दौरान धातु के डंडी वाले छातों का प्रयोग नहीं करना चाहिये।
(प्रेस विज्ञप्ति)




