लखनऊ: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी अब पूरी तरह परिवार की पार्टी में ही तब्दील होती हुई नजर आ रही है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लेकर परिवार के छह सदस्य पहले से ही यूपी की सियासत में दखल दिए बैठे हैं. अब सातवां नाम सामने आया है रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव का. अक्षय ने हाल ही में 25 साल की उम्र पूरी की है और फिरोजाबाद लोकसभा सीट से पार्टी का टिकट मांग लिया है. माना जा रहा है कि 2014 में पार्टी के उम्मीदवार वही होगें.
पहले मुलायम, फिर रामगोपाल, शिवपाल, अखिलेश यादव, धर्मेद्र यादव और सबसे आखिर में डिंपल यादव. जी हां, यूपी में राज कर रही समाजवादी पार्टी की यही तस्वीर है. बात समाजवाद की लेकिन पार्टी में परिवारवाद का भरपूर इस्तेमाल. पर सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ है. यादव परिवार अब मुलायम के भाई रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को मैदान में उतारने की जुटा है. अक्षय ने 25 साल की उम्र पूरी होते ही 2014 के लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद की सीट से टिकट मांग लिया है. हालांकि अक्षय ने ये आवेदन खामोशी से एक आम कार्यकर्ता की तरह दिया है लेकिन पार्टी के स्थानीय नेताओं के रुख से लग रहा है कि मुहर अक्षय के नाम पर ही लगेगी.
फिरोजाबाद वही इलाका है जहां की जनता से मुलायम सिंह के परिवारवाद के फार्मूले को पिछली मर्तबा नकार दिया था. दरअसल अखिलेश यादव के छोड़ने के चलते ये लोकसभा सीट खाली हुई थी. और यादव परिवार ने बजाए किसी कार्यकर्ता को टिकट देने के, यहां से डिंपल यादव को चुनाव मैदान में उतार दिया था. नतीजा डिंपल को राजबब्बर से हारना पड़ा.
पहले से ही परिवारवाद के आरोपों से घिरी समाजवादी पार्टी अब इस फैसले को लेकर भी सवालों के घेरे में है. बीजेपी जहां खुलकर हमला बोल रही है तो वहीं कांग्रेस के सुर थोड़े नरम हैं. राजनीति में परिवारवाद अब कोई अजूबी बात नहीं रह गयी है. कांग्रेस और बीजेपी जैसी बड़ी पार्टियां भी अब इस परंपरा को कबूल कर चुकी है. मुलायम सरीखे नेता, जिन्होंने खुद से संघर्ष कर सियासत में एक मुकाम पाया है वो अब खुद ही वंशवाद और परिवारवाद की पहचान बन चुके हैं. लेकिन सवाल उन कार्यकर्ताओं का है जो किसी भी पार्टी के लिए खून पसीना एक करते हैं लेकिन उनपर आखिर तक ठप्पा कार्यकर्ता का ही लगा रहता है. मुहर लगती है तो बड़े नेता के बेटे, बेटी या किसी रिश्तेदार के नाम पर ही.




