भारत में घूसखोरी और भ्रष्टाचार की चर्चा अंतराष्ट्रीय स्तर पर छाती जा रही है. 2जी और राडिया प्रकरण, इलाहाबाद हाईकोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक तीखी टिप्पणी, आज बडे उदाहरण के रूप में सामने आ रहे हैं. हालांकि, आम आदमी तो दशकों से इसे झेल रहा है. इसी आकंडे को सैम्पल सर्वे के रूप में ट्रान्सपरेन्सी इंटरनेशनल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में पेश कर दिया है.
दुनिया भर में भ्रष्टाचार पर नजर रखनेवाली बहुचर्चित स्वयंसेवी संस्था ट्रान्सपरेन्सी इंटरनेशनल का मानना है कि भारत में भ्रष्टाचार और घूसखोरी पसरता ही जा रहा है. संस्था की सर्वेक्षण रिपोर्ट की मानें तो पिछले तीन वर्षों में भ्रष्टाचार का बैरोमीटर 75% ऊपर चढा है. पिछले एक साल का सर्वेक्षण बताता है कि 54 फीसदी लोग घूसखोरों के शिकार हुए.
सर्वाधिक भ्रष्ट सेक्टर रहा पोलिटिक्स, हालांकि पुलिस, जुडिशियरी और मीडिया भी कुछ ही पीछे हैं. भ्रष्टाचार रोकने में सरकार विफल रही. जबकि सबसे चौंकाने वाली जो बात सामने आयी है वह है, भ्रष्टाचार से निजात के लिये लोग अब भी सबसे अधिक आशान्वित हैं चौथे स्तंभ से, यानी प्रेस मीडिया से.
दुनिया भर के देशों में भ्रष्टाचार पर तीखी नजर रखने वाली बहुचर्चित स्वयंसेवी संस्था ट्रान्सपरेन्सी इंटरनेशनल ने गुरूवार 9 दिसंबर को अपना सालाना सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी किया. इसमें भारत दुनिया भर के 11 भ्रष्टतम देशों में शामिल है. इस श्रेणी में भारत के अलावा अन्य देश हैं- अफगानिस्तान, कम्बोडिया, कैमरून, इराक, लाइबेरिया, नाइजेरिया, पैलेस्टाइन, सेनेगल, सियेरा लियॉन और युगान्डा. यानी भ्रष्टाचार में अव्वल ये उस श्रेणी के देश हैं जहां 50 फीसदी से अधिक देशवासी घूसखोरों के शिकार हुए. भारत में यह सर्वेक्षण 66 हजार शहरियों के बीच 1 से 6 जुलाई के दौरान किया गया था.
सर्वेक्षण के अनुसार भ्रष्टाचार दुनिया भर में जारी है. सबसे अधिक भ्रष्टाचार बढ रहा है राजनीति में, पुलिस दूसरे नंबर पर, बिजनस और प्राइवेट सेक्टर तीसरे, जुडिशियरी (न्यायपालिका) चौथे, संसद पांचवें, सरकारी अधिकारी छठवें, एजुकेशन सिस्टम सातवें, प्रेस-मीडिया आठवें और धार्मिक संगठन नौंवे स्थान पर है.
जहां तक भ्रष्टाचार से निजात का सवाल पूछा गया तो सभी इससे मुक्ति चाहते हैं. वह कहते हैं कि उनकी आस है सरकार और मीडिया से. लेकिन, उनमें से सर्वाधिक, लगभग 50 फीसदी लोग मानते हैं कि सरकार इस मोर्चे पर विफल रही है. जबकि 29 फीसदी ने सफल बताया और 21% ने अनभिज्ञता जतायी.
भ्रष्टाचार से टक्कर लेने की क्षमता के सवाल पर सर्वाधिक 25 फीसदी लोगों ने प्रेस-मीडिया पर भरोसा जताया, 22% सरकार पर, 11% निजी क्षेत्र पर, 9% का भरोसा एनजीओ पर, 8% अंतराष्ट्रीय संगठनों पर 25% का किसी पर नहीं.
इस सर्वेक्षण में एक और खास बात सामने आयी है, भ्रष्टाचार के खिलाफ आम लोगों की भागीदारी को लेकर. भारत सहित एशियाई देशों के अधिकांश लोग यह तो मानते हैं कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगना चाहिए. ऐसे लोग 62 प्रतशित हैं. 60 प्रतशित यह भी मानते हैं कि अगर उनका कोई परिचित इस मोर्चे पर आगे बढे तो वह उसका समर्थन करने को तैयार हैं. लेकिन, इस 60 फीसदी से यह पूछा गया कि आप खुद क्यों नहीं आगे आते तो आधे लोगों ने हाथ खडे कर दिये. जिगरा वाले महज 31 फीसदी ने कहा कि उन्हें मौका मिला तो स्वयं आगे बढकर भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे.




