
Shishir Kumar
Ranchi: सोशल नेटवर्किंग साइट आज की तारीख में किस मसलों पर बहस या विचारों को साझा करने का एकमंच मात्र नहीं रख गया है. बल्कि नेटवर्किंग साइट पर आपका फ्रेंड लिस्ट, फॉलोअर्स की संख्या आपकी लोकप्रियता का पैमाना भी है. जितने ज्यादा फॉलोअर्स उतने ज्यादा लोकप्रिय नेता या अभिनेता. लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि झारखंड राज्य के मुखिया रघुवर दास के ट्वीटर पर 80 हजार फॉलोअर्स फेक मतलब फर्जी हैं. सीएम रघुवर दास को ट्विटर पर फॉलो करनेवालों की संख्या 2,21000 है उसमें से 80 हजार फर्जी हैं. जबकि झारखंड बीजेपी के ट्विटर पर 38 फीसदी फॉलोअर्स फर्जी मिले है.
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रघुवर दास के 36 फीसदी फॉलोअर्स फर्जी
झारखंड में सीएम रघुवर दास सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर सबसे ज्यादा फॉलो किये जाने वाले नेता हैं और उनके फेक फॉलोअर्स की संख्या भी ज्यादा है. ट्विटर के ऑडिट में ये खुलासा हुआ है कि रघुवर दास के 2 लाख 21 हजार फॉलोअर्स में से 80 हजार फेक हैं. जबकि सूबे के पूर्व सीएम और बीजेपी के बड़े नेता अर्जुन मुंडा के ट्विटर पर फॉलो करनेवाले केवल 41 फीसदी लोग ही सही है, हालांकि उनके फॉलोअर्स की संख्या 90 हजार ही हैं. बात करें बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे की तो उनके फॉलोअर्स की संख्या काफी कम महज 13 हजार है, जिनमें से 5 हजार फेक हैं. वही रघुवर सरकार के सफल कार्यक्रमों में से एक माना जानेवाला मोमेंटम झारखंड, उसके ट्विटर अकाउंट पर भी फर्जी फॉलोअर्स की फेहरिस्त लम्बी है. इस ट्विटर हैंडल के 40 प्रतिशत फॉलोअर्स फर्जी पाये गये हैं.
झारखंड बीजेपी के 38 फीसदी फॉलोअर्स फर्जी
सीएम के फेक फॉलोअर्स के साथ-साथ झारखंड बीजेपी के ऑफिसयल ट्विटर हैंडल पर 31,275 फॉलोअर्स में से 12,000 फेक हैं. जबकि झारखंड कांग्रेस के महज 3000 फॉलोअर्स में से मात्र 150 फर्जी है. वही जेएमएम के ऑफिसयल ट्विटर हैंडल फर्जी फॉलोअर्स की संख्या केवल 5 फीसदी है. वही जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के फेक फॉलोअर्स की संख्या मात्र 74 है, हालांकि उनके केवल 2100 फॉलोअर्स हैं. जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार के 38 हजार में से 4 हाजर फॉलोअर्स फेक पाये गये. जेवीएम प्रमुख बाबूलाल मरांडी के 94 फीसदी फॉलोअर्स सही है.
कैसे काम करता है ट्विटर ऑडिट?
ट्विटर ऑडिट की वेबसाइट के मुताबिक इस टूल के जरिए 5,000 फॉलोअर्स का सैंपल लिया जाता है और उनका ट्वीटस, फॉलोअर्स, म्युचूअल फॉलोज और अन्य पैरामीटर्स के आधार पर आकलन किया जाता है. इससे पता चलता है कि कितने ट्विटर फॉलोअर फेक हैं और कितने वास्तविक. हालांकि यह एकदम सटीक तरीका नहीं है, लेकिन काफी हद तक इससे हकीकत पता चल सकती है.
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