नई दिल्ली, 14 फरवरी | निर्वाचन आयोग के साथ जारी विवाद समाप्त करने की एक कोशिश के तहत केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने भले ही पत्र लिखकर अपने बयान पर खेद जताया हो लेकिन सूत्रों की मानें तो आयोग इस मामले के निपटारे से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जवाब का इंतजार कर रहा है। उल्लेखनीय है कि खुर्शीद ने आयोग से कहा है कि वह आयोग की बुद्धिमत्ता के आगे नतमस्तक हैं और उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण सम्बंधी अपने बयान पर उन्हें खेद है।
निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “सच्चाई यह है कि आयोग ने खुर्शीद को नोटिस भेजा था। इसके बाद उसने राष्ट्रपति के पास अपनी शिकायत भेजी और राष्ट्रपति ने इसे प्रधानमंत्री के पास भेज दिया।”
अधिकारी ने बताया, “जाहिर तौर पर आयोग प्रधानमंत्री के जवाब का इंतजार करेगा कि आखिर इस पर उनका क्या रुख है।”
खुर्शीद ने सोमवार को निर्वाचन आयोग को एक पत्र लिखा था, जिसे आयोग ने मंगलवार को जारी किया। खुर्शीद ने पत्र में कहा है, “मैं इस मामले को दुर्भाग्यपूर्ण मानता हूं और बयान पर खेद प्रकट करता हूं। मैं निर्वाचन आयोग की बुद्धिमत्ता के आगे नतमस्तक हूं।”
कांग्रेसी खेमे में ऐसी चर्चा है कि खुर्शीद के पत्र के बाद निर्वाचन आयोग इस मुद्दे को यहीं बंद कर सकता है जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) खुर्शीद के इस्तीफे की मांग पर अड़ी हु़ई है।
भाजपा नेता बलबीर पुंज ने संवाददाताओं से कहा, “सिर्फ खेद भर जताने से नहीं चलेगा। खुर्शीद या तो माफी मांगें या उन्हें बर्खास्त किया जाए।”
ज्ञात हो कि निर्वाचन आयोग ने अल्पसंख्यकों के लिए नौ प्रतिशत आरक्षण से सम्बंधित बयान देने के लिए खुर्शीद को चेतावनी दी थी। लेकिन जब खुर्शीद अपने बयान पर कायम रहे और उन्होंने कहा कि वह इसके लिए फांसी पर भी चढ़ने को तैयार हैं, तो आयोग ने उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील को पत्र लिखा।
राष्ट्रपति ने आयोग का पत्र प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास भेज दिया था। (आईएएनएस)




