– पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री का राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी को प्रत्युत्तर –
दिल्ली/रांची: झारखण्ड में जन्तुओं की 36 लुप्तप्राय प्रजातियां और 64 संकटापन्न प्रादप प्रजातियां हैं। केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री प्रकाश जावडेकर ने आज राज्यसभा में सांसद परिमल नथवाणी द्वारा पूछे गये प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
मंत्रीजी ने बताया कि झारखण्ड में 36 लुप्तप्राय प्रजातियां, जैसे कि बाघ, गंगा नदी की डॉलफिन, जंगलीबालू, एशियाई हाथी, विशाल भारतीय गिलहरी, उड़ती गिलहरी, माउस डियर (हिरन), मार्श हेरियर्स डार्टर, वाइट नेक्ड स्टॉर्क, फलवस व्हिसलिंग डक, फ्रेरूजिनस पोचर्ड, बंगाल फ्लोरिकन, ग्रेटर एडजुटेंट, लैसर एडजुटेंट, नोर्डमैनस् ग्रीनशैंक, ब्लैक-बेल्लिड टेर्न, इजिप्शियन गिध्ध, रेड-हेडेड गिद्ध, हिमालयन गिद्ध्, वाइट-रम्पड गिद्ध्, इंडियन गिद्ध्, इंडियन स्पॉटेड ईगल, ग्रेटर स्पॉर्टेड ईगल, ईस्टर्न इम्पीरियल ईगल, पल्लास फिश ईगल, ग्रीन अवाडावट, ब्रिस्टलेड ग्रास वार्बलर, रिवर लैपविंग, लैसर एडजुटैट, रिवर टेर्न, ओरिएण्टल वाइट इबिस, ब्लैक बेल्लिड टेर्न, फ्लैप शैल कछुए, करेट और रसल वाईपर हैं।
सांदर नथवाणी के निवेदन के अनुसार, इन्टरनेशनल युनियन फॉर कन्जर्वेशन आॅफ नेचर (आईयुसीएन) के आकलन के अनुसार, पिछले दो वर्षों में भारत में लुप्तप्राय प्रजातियों की संख्या में 17 की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2013 में लुप्तप्राय प्रजातियों की संख्या 648 थी 2015 में बढ़कर 665 हो गई है। लुप्तप्राय स्तनपायी प्रजातियों की संख्या 95 से 98, पक्षियों संख्या 80 से 88, सरीसृप की संख्या 52 से 53, उभयचर की संख्या 74 से 75, मछलियों की संख्या 213 से 216, घोंघा की संख्या 6 से बढ़कर 7 हुई है, ऐसा विभागीय केंद्रीय मंत्री बताया।
श्री नथवाणी पिछले दो वर्षों के दौरान लुप्तप्राय प्रजातियों की संख्या में हुई वृद्धि, प्रजातियों के पर्यावास के क्षेत्रों सहित उनके नाम, देश में खनन कार्यों के कारण वन्य जीवों के पर्यावास पर असर, सरकार द्वारा वन्यजीवों के पर्यावासों को नुकसान/नष्ट होने से बचाने के लिए किये जा रहे प्रयास के बारे में जानकारी मांगी थी।
मंत्रीजी ने बताया कि भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बी.एस.आई) के पास उपलब्ध आंकडों के अनुसार देश में दर्ज किए गए संवहनी पादपों (एंजियोस्पर्मस, जिमनोस्पर्मस, पेटरिडोफाइटस) की 19156 प्रजातियों में से 1236 प्रजातियां संकटापन्न श्रेणियों जैसे कि अत्यधिक लुप्तप्राय, असुरक्षित आदि की है। झारखण्ड प्रदेश की स्थानीय संकटापन्न पादन प्रजातियों में 64 पादप प्रजातियां शामिल हैं जो फाबासिएइ, पोआसिएइ, रानुनकुलासिएइ, एपियासिएइ, जेन्टियानासिएइ, जिन्गिबेरासिएइ, रोसासिएइ, बरबेरिडासिएइ, बरबेनासिएइ, ओलियासिएइ, ओचिडासिएइ, ड्रसेरासिएइ, सेलेस्ट्रासिएइ, कॉमेलिनासिएइ, सलिकासिएइ, टाकासिएइ और वायोलासिएइ के परिवारों से हैं।
श्री नथवाणी के निवेदन के अनुसार, माननीय उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के भीतर तथा राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों की सीमाओं से 1 किमी के दायरे के अंदर खनन कार्यों को निशिद्ध कर दिया है।
(प्रेस विज्ञप्ति)




