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तीन तलाक पर अलग से कानून बनाने की जरुरत नहीं: मंत्री

News Wing
New Delhi, 10 September:  मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक की प्रथा को उच्चतम न्यायालय द्वारा असंवैधानिक घोषित किये जाने के बाद इस संबंध में कोई कानून बनाने का प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. विधि एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार तीन तलाक के मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले से सरकार संतुष्ट है और ऐसी स्थिति में अलग से कोई काननू बनाने की जरूरत नहीं है.

सरकार के पास कानून बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने ‘पीटीआई भाषा’ को एक साक्षात्कार में बताया कि उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक को असंवैधानिक मानते हुये इसे अमान्य घोषित कर दिया है. ऐसी स्थिति में हमें अलग से कानून बनाने की कोई जरूरत नहीं है. इस संबंध में सरकार के पास फिलहाल कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.

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भेदभाव का प्रावधान नहीं

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने 3:2 बहुमत के फैसले में हाल ही में तीन तलाक को गैर-कानूनी मानते हुये इसे अमान्य घोषित कर दिया था जबकि अल्पमत के फैसले में केन्द्र सरकार को छह महीने के भीतर इस बारे में एक कानून बनाने का निर्देश दिया था. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का रूख अगर उच्चतम न्यायालय के फैसले से अलग रहता तो इस पर विचार किया जा सकता था. लेकिन सरकार इस निर्णय से सहमत है. सरकार का मानना है कि संविधान के तहत धर्म के आधार पर असमानता और भेदभाव का प्रावधान या अधिकार नहीं होना चाहिए.

तीन तलाक असंवैधानिक

न्यायालय में सरकार के हलफनामे का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा, ‘‘भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अपने हलफनामे में साफ कहा था कि तीन तलाक संविधान सम्मत नहीं है और यह असंवैधानिक है. संविधान में प्रदत्त समता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और इसका इसमें हनन होता है. गौरतलब है कि मुस्लिम समाज में शादीशुदा जीवन में एक बार में तीन तलाक वाली प्रथा रही है. इसमें शौहर अपनी पत्नी को एक ही बार में तीन तलाक कहकर उससे अलग होते रहे हैं.

समानता का हो अधिकार

राज्यमंत्री ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री का मानना है कि हमारी मुस्लिम बहन-बेटियों को भी समानता का अधिकार है और उन्हें भी इस हक से जीने का अधिकार है. धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता और यह मानवाधिकार का भी उल्लंघन हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुये ये भी कहा कि कई मुस्लिम देशों ने भी इसे अपने यहां अमान्य घोषित कर रखा है. पाकिस्तान जैसे मुस्लिम राष्ट्र भी इस मामले में काफी उदारवादी हैं. ऐसे में उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक पर जो फैसला सुनाया है हम उसका स्वागत करते हैं.

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