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Ranchi, 24 August: रांची शहर में इंट्री के लिए बूटी मोड़ के बाद दो ही रास्ते हैं. एक कोकर की तरफ और दूसरा बरियातू की तरफ. उसमें बरियातु होकर इंट्री करना ज्यादा व्यस्त है. रांची प्रशासन सड़क को लेकर कितना सजग है उसका जीता-जागता उदाहरण देखने को मिलता है रिम्स के कुछ दूर पहले बने एक पॉट-होल को. ना जाने कब से पॉट-होल लोगों की परेशानी का कारण बना हुआ है. पिछले 4-5 महीनों में इस पॉट-होल की चपेट में आकर कई लोग छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं. ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी रांची प्रसासन को नहीं है. कई बार इसकी खबर अखबारों की सुर्खियां बटोर चुकी है. लेकिन फिर भी ये पॉट-होल बंद नहीं किया गया.
आइए आपको दिखाते हैं एक रिएलिटी चेक, जिसे रांची की ट्रैफिक व्यवस्था पर लंबे समय तक काम करने वाले राजेश दास ने किया है. देखें वीडियो
आंकड़े क्या कहते हैं
इस प्रकार की उदासीनता इसलिए भी ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि भारत की सड़कों पर हर साल 1.5 लाख लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है. 400 मौतें प्रतिदिन और 16 मौतें प्रति घंटे हो रही है जो कि एक बहुत ही डरावनी संख्या है. भारत की सरकार ने 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं से हो रही मौतों को आधा कर देने का ब्राजीलिया में संकल्प लिया हुआ है, इसके साथ उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के अभियान चलाए जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी सड़कों पर ब्लैक स्पॉट्स और पॉट होल्स की भरावट को लेकर राज्य सरकारों को साफ निर्देश जारी किए हुए हैं. बावजूद इसके झारखंड राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर किसी तरह की कोई गंभीरता नहीं दिखायी देती है. झारखंड एक छोटा प्रदेश है, इसलिए अगर यहां की सरकार सड़क सुरक्षा के विभिन्न आयामों को संजीदा तरीके से लागू करे तो ब्राजीलिया से भी ज्यादा बेहतर सड़क हमारे होंगे.




