
– मेरे माइक का वॉल्यूम फुल कर दिया जाये
– हम तो बैठे हुए ही हैं अध्यक्ष महोदय कभी जमीन पर तो कभी ऊपर
– “चाटुकरिता बंद करो, बंद करो, बंद करो.”
– “भ्रष्ट अफसरों के चमचे हाय-हाय”
– कभी बाप तो कभी बेटा मुख्यमंत्री रहा.
Akshay Kumar Jha
Ranchi: कुल मिला कर तीसरे दिन झारखंड विधानसभा की कार्यवाही 68 मिनट चली, लेकिन इस बीच वो सब हुआ जो सदन की मर्यादा को तार-तार करता है. तीन अधिकारियों के नाम पर तीन दिनों की कार्यवाही की बलि चढ़ चुकी है. सत्ता पक्ष अपनी जिद और विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा हुआ है. वातावरण ऐसा बना हुआ है जैसे दोनों पक्षों ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया हो. लिहाजा जानते हैं सदन में आज की हाईलाइट्स.
– मेरे माइक का वॉल्यूम फुल कर दिया जाये
– हम तो बैठे हुए ही हैं अध्यक्ष महोदय कभी जमीन पर तो कभी ऊपर
– “चाटुकरिता बंद करो, बंद करो, बंद करो.”
– “भ्रष्ट अफसरों के चमचे हाय-हाय”
– कभी बाप तो कभी बेटा मुख्यमंत्री रहा.
Akshay Kumar Jha
Ranchi: कुल मिला कर तीसरे दिन झारखंड विधानसभा की कार्यवाही 68 मिनट चली, लेकिन इस बीच वो सब हुआ जो सदन की मर्यादा को तार-तार करता है. तीन अधिकारियों के नाम पर तीन दिनों की कार्यवाही की बलि चढ़ चुकी है. सत्ता पक्ष अपनी जिद और विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा हुआ है. वातावरण ऐसा बना हुआ है जैसे दोनों पक्षों ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया हो. लिहाजा जानते हैं सदन में आज की हाईलाइट्स.
11.00 बजेः सदन में अध्यक्ष दिनेश उरांव दाखिल होते हैं. उनके आते ही प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन अपनी कुर्सी से उठ कर कहते हैं कि न्याय नहीं हो रहा है.
बीजेपी विधायक अनंत ओझाः विपक्ष अब दबंगई कर रहा है. इस बात पर विपक्ष जोरदार हंगामा करता है.
अध्यक्ष दिनेश उरांवः सदन की स्थिति प्रश्नकाल चलाने जैसी नहीं है.
जेवीएम विधायक प्रदीप यादवः सारे लोग जानते हैं कि हम यहां क्यों आए हैं. अधिकारियों पर कार्रवाई का मामला भी जनता से ही जुड़ा है. चुनाव आयोग के निर्देश की अनदेखी हो रही है. इसपर सत्ता पक्ष के विधायकों ने जमकर हंगामा किया. 11.20 बजे हंगामा इतना तेज होने लगा कि सदन की कार्यवाही 12.15 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी.
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दूसरी पाली 12.18 मिनट पर शुरू हुई
माले विधायक राजकुमार यादव ने अध्यक्ष के आते ही गिरिडीह के तीसरी प्रखंड में बुजुर्ग बुधनी की मौत को भूख से हुई मौत साबित करने में जुट गए.
अध्यक्ष ने सीएम से सदन में जवाब देने का आग्रह किया.
सीएमः रघुवर दास ने आश्वस्त किया कि हर सवाल का जवाब विपक्ष को मिलेगा.
अध्यक्ष ने विपक्ष के तरफ से लाए गये दो कार्यस्थगन प्रस्ताव को अमान्य कर दिया. पहला प्रस्ताव अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर चर्चा की थी और दूसरा प्रस्ताव सूबे में भूख से हो रहे मौत को लेकर थी.
प्रदीप यादव ने फिर से एक बार अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर बोलना शुरू कर दिया. सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी शोर मचाना शुरू कर दिया. नतीजतन अध्यक्ष ने 12.24 मिनट पर दो बजे तक कार्यवाही स्थगित कर दी.
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02.06 बजे अध्यक्ष सदन में दाखिल होते हैं.
हेमंत सोरेन फिर से एक बार कहते हैं अध्यक्ष महोदय न्याय नहीं मिल रहा है.
प्रदीप यादवः तीनों अधिकारियों को पदमुक्त करने की बात एक बार फिर से करते हैं. इसपर जोरदार हंगामा शुरू हो जाता है. अध्यक्ष हेमंत सोरेन से बैठने को कहते हैं. हेमंत जवाब देते हैं. “हम तो बैठे हुए ही हैं अध्यक्ष महोदय कभी जमीन पर तो कभी ऊपर.” हंगामा और तेज हो जाता है. सत्ता पक्ष के तरफ से नारेबाजी होने लगती है. “विकास विरोधी होश में आओ, होश में आओ, होश में आओ.”
विधायक बिरंची नारायण को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापन देने को कहा जाता है. विपक्ष का हंगामा और तेज हो जाता है. बिरंची नारायण अपनी बात शुरू करने से पहले कहते हैं कि अध्यक्ष महोदय मेरे माइक का वॉल्यूम फुल कर दिया जाये. कारण सदन में जमकर शोर हो रहा था. विपक्ष नारेबाजी कर रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने ना हो बल्कि माइक वर्सेस नन माइक प्रतियोगिता चल रही हो. बिरंची नारायण जोर-जोर से अपनी बात रखने लगते हैं.
2.12 बजे पूरा विपक्ष उठकर वेल में आ जाता है. विपक्ष के सदस्य वेल में आकर बिरंची नारायण के बिल्कुल पास आ जाते हैं. विपक्ष जोर-जोर से नारेबाजी करने लगता है. नारे थे “चाटुकारिता बंद करो, बंद करो, बंद करो.” “भ्रष्ट अफसरों के चमचे हाय-हाय” हंगामा काफी तेज हो गया. सदन की मर्यादा को देखते हुए अध्यक्ष ने आखिर में बिरंची नारायण को बैठ जाने को कहा. बिरंची बैठ गए. नारेबाजी के शोर में सदन डूब गया. अध्यक्ष को अपनी कुर्सी से उठना पड़ा. अध्यक्ष के इस रुख के बाद विपक्ष के विधायक अपनी कुर्सी पर जा कर बैठ गये.
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इधर अधिकारी दीर्घा में सीएस राजबाला वर्मा भी बैठी थीं. अभी तक उनके चेहरे पर गंभीरता और चिंतन साफ देखा जा रहा था.
सीएम जवाब देने के लिए खड़े होते हैं. अपनी बात रखना शुरू करते हैं. कहाः राज्यपाल के अभिभाषण के वक्त टोका-टोकी नहीं करनी चाहिए थी. उनके अभिभाषण में यथार्थ का चित्रण होता है. चुनाव के वक्त जो भी वादा किया था. सभी पूरे किए. तीन सालों में स्थिति बदली है. ना मैं ज्ञानी हूं और ना मेरी सरकार, लेकिन हम ईमानदारी से जनता की सेवा कर रहे हैं. मेरे बारे में बोला गया कि मैं विवश और लाचार हूं, लेकिन मैं बता दूं कि मैं उतना कमजोर भी नहीं हूं. किसी वंशवाद और परिवार का बेटा-बेटी नहीं हूं. मैं 22 सालों से सदन से जुड़ा हुआ हूं. झारखंड को अच्छी तरह से जानता हूं. ये भी जानता हूं कि झारखंड को किसने बेचने का काम किया और किसने खरीदने का काम किया. झारखंड में एक बार नहीं बल्कि बार-बार दागी सीएस को रखा गया है.
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प्रदीप यादवः तो क्या जो गलती दूसरे लोग करेंगे वो गलती आप भी करेंगे. इससे आपको माफी नहीं मिलेगी. ये बेतुकी बात कर रहे हैं.
सीएमः हाय-तौबा मचा रहा है और हमको उपदेश दे रहा है. कभी बाप तो कभी बेटा मुख्यमंत्री रहा. इस पर हेमंत सोरेन ने कहा कि अब इनका बेटा नालायक है तो हमलोग क्या करें. सीएम ने कहा कितना आदिवासियों के लिए काम किया सब जानता है. दूसरे दागी अफसरों को सीएस बनाया. इतने बार सीएम होने के बाद भी कुछ नहीं किया. इसलिए हमलोग इधर हैं (सत्ता पक्ष की तरफ) और 2024 तक इधर ही रहेंगे. विपक्ष वेल में लगातार हंगामा कर रहा था. नारेबाजी हो रही थी. सीएम ने हंगामे के दौरान सरयू राय का नाम लिया. कहा कि हमारे यहां खुली चर्चा होती है. यहां लोकतंत्र कायम है. क्या हेमंत और स्टीफन में मतभेद नहीं है. प्रदीप के साथ हेमंत का मतभेद नहीं है.
अध्यक्ष के टोकने पर सीएम ने कहाः आप टोकिये मत. अब खड़ा हूं तो बोलने दीजिए. 15 साल से सीबीआई नोटिस दे रही है. किसी सरकार ने इसपर अधिकारी से जवाब पूछने की हिम्मत नहीं जतायी. इनपर (सीएस) पर कोई आरोप नहीं है. बस कोषागार के निरीक्षण में चूक की बात है. हमने सीएस को शो-काउज दिया. 15 दिनों के अंदर जवाब मांगा. जवाब मिला. जो भी कार्रवाई होगी. कानूनसंगत होगी. कानून से बढ़कर कोई नहीं है. रघुवर दास भी नहीं. बकोरिया का मामला कोर्ट में है. गृह विभाग को फिर भी जांच के लिए कहा गया है. (इधर हंगामा अपने चरम पर था. विपक्ष नारेबाजी के साथ-साथ सीएम की बातों को गलत भी ठहरा रहा था). सीएम ने कहा कोई चले ना चले झारखंड चल पड़ा है. हाथी उड़ चला है.
अब अधिकारी दीर्घा में बैठे सीएस राजबाला वर्मा के चेहरे पर मुस्कुराहट आती है. जैसे जेठ की दोपहर में तपती जमीन पर बारिश की कुछ बूंदें.
सदन कल के लिए स्थगित कर दिया जाता है.
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