रांची: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने शुक्रवा को रांची विश्व विद्यालय स्थित जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के स्वर्गीय रामदयाल मुण्डा अखड़ा में आयोजित करमा महोत्सव को सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार इस दिशा में प्रयासरत है कि उच्च विद्यालय तक की पढ़ार्इ में क्षेत्रीय भाषा अनिवार्य रूप समाहित की जाए तथा क्षेत्रीय भाषा आयोग का गठन भी शीघ्र किया जाएगा। राज्य सरकार में जन जातीय भाषाओं के लिए पुस्तकालय की भी स्थापना शीघ्र की जाएगी।
करमा पूजा के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह मात्र एक पर्व नहीं बल्कि आदि काल से हमारी संस्कृति का यह अभिन्न अंग है। कहा जाता है कि जब से यह सृष्टि है तब से यह पर्व मनाया जा रहा है। हम सभी प्रकृति के पुजारी हैं, हमने इन्हें मान दिया है, आदर दिया है और प्रकृति ने बदले में हमें जीवन दिया है। हमारे जीवन को खुशहाल बनाने में प्रकृति ने अहम भ्ाूमिका निभार्इ है। आज हमें यह संकल्प लेना है कि प्रकृति को बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे। ऐसी व्यवस्था हो कि प्रत्येक विधार्थी एवं शिक्षक सहित सभी उपस्थित जन इस हेतु एक वृक्ष अवश्य लगाएं और प्रकृति को बचाएं।
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय रामदयाल मुण्डा को इस अवसर पर याद करते हुए कहा कि सांस्कृतिक धरोहर को बचाने में उनका बहुत बड़ा योगदान है। आज हमें उनके विचारों को आत्मसात करने की आवश्यकता है। समाजिक धरोहरों को बचाए रखने को हमारे पुरखों ने हर सम्भव प्रयास किया है और हमें इस क्रम को आगे बढ़ाते जाना है। पर्यावरण पर आज पूरे विश्व् में शोध चल रहे हैं, जब कि हमारे पुरखों ने सदियों से इसे सुरक्षित रखा।
मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि जल,जंगल, जमीन से हमारी संस्कृति जुड़ी है। झारखण्ड को अपार खनिज सम्पदा के प्रदेश के रूप में जाना जाता है, परन्तु जितनी सम्पदा धरती के अन्दर है उससे कहीं अधिक सम्पदा धरती के उपर है। धरती के उपर के सम्पदाओं में भी असीम सम्भावनाएं हैं। तसर उत्पादन में झारखण्ड पूरे देश में सर्वश्रेष्ठ है वहीं करंज का मधु सर्वोत्कृष्ट माना जाता है। तसर एवं लाह उत्पादन के साथ हम विकास के नए आयाम
गढ़़ सकते हैं। पेड़, पर्वत, नदी, झरनों के रूप में प्रकृति हमारी संरक्षक बन हमारे साथ है और हमें नित-नए रास्ते दिखाती है। हमें अपनी संस्कृति को बचाते हुए इनके माध्यम से झारखण्ड का समग्र विकास करना होगा। विकास के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया गया है, परन्तु जल, जंगल, जमीन को बचाते हुए अर्थात प्रकृति को बचाते हुए हमें आगे बढ़ना है। सरकार का यह प्रयास है कि प्रकृति को अक्षुण्ण बनाए रखते हुए राज्य का समग्र विकास हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें हर सम्भव यह भी प्रयास करने है कि हमारे आने वाली पीढ़ी हमारे परम्परा को जाने एवं समझें। वह यह समझ सके कि हमारे पुरखों ने अपनी संस्कृति को कैसे बचाया और इस क्रम को वे आगे बढ़ाते रहें।
शिक्षक दिवस पर विश्व विद्यालय के शिक्षकों को शुभकामना देते हुए उन्होंने कहा कि अल्प अवधि में हमारी सरकार द्वारा अनेक अनछुए पहलुओं को छूने का प्रयास किया गया है। शीघ्र ही राज्य के एफिलिएटेड कॉलेजों को कन्स्टीचुएंट करने का प्रयास है। सरकार का यह भी प्रयास रहेगा कि विभिन्न भाषाओं के लेखकों को पुरस्कृत किया जाए साथ ही शोधार्थियों को अनुदान देने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने शिक्षकों को सरकार द्वारा बेहतर सुविधा दिए जाने की सम्भावनाओं के सम्बंध में कहा कि उनके सुझावों का स्वागत है और उनसे सहयोग की अपील की।
उन्होंने कहा कि राज्य में जन-जातीय भाषाओं के संरक्षण एवं विकास हेतु सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ प्रयासरत है। राज्य में उच्च विद्यालय तक की पढ़ार्इ में क्षेत्रीय भाषाओं को अनिवार्य किया जाएगा। भाषा हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। अत: संस्कृति के बचाव के साथ ही साथ भाषा के विकास पर बल दिया जाना नितांत आवश्यक है। क्षेत्रीय भाषाओं में किए जा रहे शोध में सहयोग हेतु जन-जातीय भाषाओं के लिए पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी। शिक्षक दिवस के अवसर पर ‘‘हो कविताओं का राष्ट्रीय स्वर‘‘ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर पूर्व सांसद सुबोध कान्त सहाय, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष समेत शिक्षकगण, विद्यार्थीगण एवं अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।




