
Pravin kumar/ kumar gaurav
Ranchi : बोकारो स्टील प्लांट देश के नवरत्न कंपनियों में से एक है, लेकिन इस कंपनी में मजदूरों का हाल आज भी जार बेजार है. मजदूरों को केंद्रीय मजदूरी नहीं मिल पा रही है, वहीं दूसरी ओर ठेका मजदूरों को ना छुट्टी, ना पीएफ और ना ही ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है. मजदूर यूनियन से जुड़े मजदूरों को जरूर कुछ घोषित नियमों के तहत कुछ सुविधा मिल पा रही है, लेकिन अधिकांश मजदूर ठेकेदार के शोषण का शिकार हो रहे हैं. मजदूर अगर ठेकेदारों के विरोध में अगर बोलते हैं तो अगले ही दिन उनका गेट पास ले लिया जाता है. जब चाहे ठेकेदार मजदूरों को बैठा देते हैं. मजदूर संगठनों के अनुसार बोकारो स्टील प्लांट में औसतन 15 हजार मजदूर काम करते हैं. जिसे राज्य सरकार के द्वारा घोषित सड़क निर्माण की मजदूरी से भी कम भुगतान किया जाता है. बोकारो प्लांट ठेका मजदूरों की संख्या 15 हजार से कही अधिक होने के बाद भी 4500 से 5 हजार की संख्या में ही मजदूरों की गणना की जाती है, जिस वजह से इसमें कार्यरत 12 हजार मजदूरों का अधिकार ठेकेदार हड़प लेते हैं.
दो करोड़ आठ लाख का क्या है हिसाब
अगर कुशल श्रमिकों की मजदूरी को आधार बनाया जाये तो उन्हें राज्य सरकार के द्वारा घोषित मजदूरी 327.81 रुपये मिलनी चाहिए. लेकिन मजदूरों को मात्र 270 रुपया ही मिल पाता है. बोकारो सेल में करीब 20 हजार ठेका मजदूर कार्यरत हैं. अगर हम रोज के मजदूरों की संख्या को 15 हजार ही मानें तो प्रत्येक की मजदूरी से बचाए गए 58 रुपये जब सभी के जोड़ दिए जाते हैं तो प्रत्येक दिन के सात लाख पैंसठ हजार हो जाता है, जो महीने के 24 दिन के मजदूरी की दर के हिसाब से दो करोड़ आठ लाख रुपये मजदूरों का कौने गटक जा रहा है ये एक बड़ा सवाल है.
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नहीं आये मजदूरों के अच्छे दिन

बीएसएल में ठेका मजदूर अच्छे दिन की बाट आज भी जोह रहे हैं. केन्द्र सरकार की कंपनी होने के बावजूद राज्य सरकार के द्वारा घोषित मजदूरी से भी कम दिया जा रहा है. वहीं केंद्र सरकार की ओर से 19 जनवरी को ठेका मजदूरों के न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोत्तरी की अधिसूचना जारी की है. 19 जनवरी को ही सेल के पर्सनल विभाग ने कर्मी व अधिकारियों के महंगाई भत्ता में कटौती की अधिसूचना जारी की है. जिसे आज तक ठेका मजदूर के मामले में लागू नहीं किया.
क्या है राज्य में लागू मजदूरी दर
अकुशल मजदूरों के लिए एक दिन की राशि 237 रुपये है, वहीं अर्द्धकुशल मजदूरों को राज्य के नियमावली के हिसाब से 248.68 रुपये दिया जाना है. कुशल श्रमिकों को 327.81 रुपये दी जानी है. वहीं अतिकुशल श्रमिकों को 378.68 रुपये मजदूरी दी जानी तय है, पर बोकारो सेल के ठेका श्रमिकों को उनके हक का पूरा पैसा न देकर तय राशि से कम पैसे दिये जा रहे हैं. साथ ही उन्हें बताया भी नहीं जाता कि उन्हें किस कैटेगरी के लिए पैसे दिये जाते हैं. जो राशि श्रमिकों के लिए तय मजदूरी से लगभग 58 कम दिये जा रहे हैं.
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भिलाई और दुर्गापुर के सेल प्लांट में मजदूरों को दी जाती है केंद्रीय मजदूरी दर
रामश्रय प्रसाद सिंह इस्पात कामगार यूनियन के जेनरल सेक्रेटरी ने बताया कि सेल में तीन तरह की मजदूरी दर है यूएस डब्लयू, एसएसडब्लयू, एस डब्लयू इनके यूनियन में लगभग 2000 मजदूर जुड़े हैं, जिन्हें तय राशि नहीं दी जाती है. वहीं सेल के ही दो अन्य प्लांट भिलाई और दुर्गापुर के ठेका श्रमिकों को केंद्रीय मजदूरी दी जाती है.
क्या कहते हैं मजदूर
पहचान जाहिर न करने की शर्त पर मजदूर कहते हैं कि पिछले चार-पांच साल से जो मजदूर काम कर रहे हैं, उन्हें भी 270 रुपये ही मजदूरी दी जा रही है, जबकि ऐसे लोगों को कम से कम 378.68 रुपये मिलने चाहिए, पर मजदूरी दी नहीं जाती और इसके खिलाफ आवाज उठाने पर काम से निकाल दिया जाता है. बोकारो सेल में काम करने वाले अधिकतर ठेका मजदूर बोकारो के स्लम इलाकों में रहते हैं, जिन्हें कंपनी की ओर से रहने की कोई सुविधा नहीं मिल पाती.
झारखंड में सेल के माइंस में ठेका मजदूरों को मिल रहा है केंद्रीय मजदूरी
जानकार बताते हैं कि झारखंड के ही सेल के अन्य माइंस चिड़िया माइंस, आरएमजी माइंस आदि में काम करने वाले मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी दर दी जाती है पर सेल के ही बोकारो के मजदूर इससे वंचित हैं और फटेहाल जिंदगी जीने को विवश हैं. सेल के स्थानीय प्लांट बोकारो में कार्यरत मजदूरों को केंद्रीय मजदूरी देने का मामला दिल्ली कॉर्पोरेट निर्धारित करता है, जिस वजह से अभी तक नहीं मिल पाता है. बोकारो सेल में करीब बीस हजार मजदूर हैं, जबकि दिखाया चार से साढ़े चार हजार जाता है.
बीडी प्रसाद सीटू
ठेका मजदूरों की मजदूरी के सवाल पर रिजनल लेबर कमिश्नर भी पहल कर चुके हैं. केंद्रीय मजदूरी दिलाने के पक्ष में हैं, लेकिन सेल की ओर से कहा जा रहा है कि हम केंद्रीय मजदूरी देने के बाध्य नहीं हैं, क्योंकि हम कॉर्पोरेशन के अंर्तगत नहीं आते. हमलोग समान काम के बदले समान मजदूरी के पक्ष में हैं और इसे लेकर यूनियन संघर्ष भी कर रहा है.
मनोहर चौधरी, जेनरल सेक्रेटरी, बोकारो इस्पात सेंट्रल वर्क्स यूनियन
मजदूरों को साप्ताहिक अवकाश के अलावा किसी भी प्रकार की छुट्टी बोकारो इस्पात प्लांट में नहीं मिलती और न ही किसी भी प्रकार का अलाउंस दिया जाता है. कॉन्ट्रैक्ट एक्ट कहता है कि सभी मजदूरों को पे स्लिप मिलनी चाहिए, प्रतिमाह मजदूरी भुगतान की तारिख भी तय होनी चाहिए, इन नियमों की सेल के ठेकेदारों के द्वारा अवहेलना की जाती है.
मिस्टर सितांसु ताहे अस्सिटेंट लेबर कमिश्नर
सिडयूल्ड इंप्लायमेंट के अंतर्गत नहीं आने के कारण ठेका मजदूरों को केंद्रीय मजदूरी दर नहीं मिल पा रही है, जबकि इस संबंध में सेल को विभाग के दवारा पत्राचार भी किया गया है.
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