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Hazaribag, 22 August : हजारीबाग का ऐतिहासिक जय प्रकाश नारायण केंद्रीय कारा लगातार सुर्खियों में है. इस बार कारा के भीतर का टी-सेल चर्चा में है. इस सेल के कुछ रहस्य धीरे-धीरे बाहर अा रहे हैं. पांच अगस्त को टी-सेल में बंद सुशील श्रीवास्तव गिरोह का खास रियााज अंसारी द्वारा जेल के भीतर से ही रंगदारी वसूलने के खुलासे के बाद हजारीबाग की पुलिस भी यह स्वीकार करने लगी है कि भीतर में सबकुछ ठीक नहीं है. रियाज अंसारी पर भोला पांडेय की हत्या करने का भी अारोप है. हजारीबाग जेल में बंद संगठित गिरोह के अपराधियों, नक्सलियों द्वारा जेल के भीतर से फोन, स्मार्टफोन, इंटरनेट का इस्तेमाल कर धमकी देने, रंगदारी वसूली का काम किया जा रहा है. जुलाई माह के पहले सप्ताह मे भी जिला प्रशासन ने जेल मे तलाशी ली थी. तालाशी के दौरान दो फोन, चार्जर, पेन ड्राइव आदि सामान बरामद किया था.
भूत का प्लान- ऑपरेशन जेल ब्रेक हुआ था फेल
जेल के भीतर के टी-सेल के कई रहस्यों पर से भी पर्दा उठने लगा है. जो बड़े सलीके से सार्वजनिक होने से बचा लिया गया था. मामला पिछले साल 2016 के जुलाई माह का है. रात को अचानक टी-सेल के सटे दीवार के बगल मे अंडा सेल मे रात्रि ड्यूटी मे तैनात एक सिपाही को काला ड्रेस मे एक छायानुमा शख्स आते दिखा. जो उसके पास से होकर गुजर गया. पाही डर से चुप रहा और उस का पीछा किया. वह शख्स जेल के किनारे-किनारे बाउंड्री के चारों तरफ तीन चक्कर घुमा, फिर इधर-उधर घूम के टी-सेल में चला गया. इसी तरह दूसरे दिन भी हुआ. तीसरे दिन सिपाही ने उसको टोकना चाहा तभी उस शख्स ने सिपाही पर पिस्तौल तान दिया. सिपाही दौड़ते हुए भूत-भूत का हल्ला करते वहां से भाग गया. जेल मे चारों तरफ हड़कंप मच गया. चारों तरफ खोजबीन की जाने लगी. लेकिन कहीं कुछ नही मिला. घटना को जेल प्रशासन ने गंभीरता से लिया और इसकी तहकीकात की गयी. टी सेल की गतिविधियों पर नजर रखा जाने लगा.
फेविक्विक मंगवाता था डेविड
इसी बीच यह पता चला कि रांची जेल से आए खूंटी का डेविड साहू उर्फ बलराम साहू काफी मात्रा मे फेविक्विक मंगवाता है. इस बात से जेल प्रशासन का दिमाग ठनका और आनन-फानन मे टी-सेल के खिड़कियों के रडों की जांच की गयी. दरवाजा का एक रड कटा मिला. हल्का दबाव देने पर रड खुल गया. यह देखते ही प्रशासन के होश उड़ गए. तुरंत उससे कड़ाई से पूछताछ मे उसने जेल से भागने के प्रयास करने की बात बतायी. यह भी बताया की जेल के चारों तरफ घूम कर जेल के किसी अधिकारी को हाइजैक कर के जेल गेट खुलवाने की फिराक मे था. बताया जाता है की उसकी निशानदेही पर पिस्तौल, गोली और ग्रेनेड भी बरामद किया गया था. जेल प्रशासन ने इस घटना को गुप्त रखा. साथ ही इस घटना के बाद बलराम उर्फ डेविड को जेल के सात नंबर सेल मे कुछ दिनों के लिए रखा गया. बाद मे उसे विभागीय कार्रवाई के बाद दुमका जेल भेज दिया गया था.
विकास तिवारी को थी मारने की योजना
चर्चा यह भी था कि टी सेल के बगल मे अंडा सेल मे रह रहे पाण्डेय गिरोह के सरगना विकास तिवारी को मारने की योजना थी. जिसमें स्थानीय मदद श्रीवास्तव गिरोह और टी सेल मे बंद रियाज अंसारी ने ही की थी. बलराम उर्फ डेविड से रांची जेल मे पिस्तौल जब्त किया गया था. उसके बाद उसे हजारीबाग जेल गया था. इससे पूर्व यह घाटशिला जेल से फरार भी हो चुका है.




