पुणे: पुणे ब्लास्ट में अब तक पुख्ता सुराग नहीं मिल सके हैं. जांच एजेंसियाँ तफ्तीश में जुटी है. पुणे पुलिस भी ब्लास्ट से जुड़े सवालों के जवाब पाने की कोशिश में जुटी है. लेकिन सवाल जस के तस हैं.nहालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने दावा किया है पुणे ब्लास्ट की साजिश का जल्द ही पर्दाफ़ाश कर दिया जाएगा.
पुणे धमाकों में किसका हाथ है. धमाके का मकसद क्या था. क्या किसी बड़े धमाके से पहले की रिहर्सल के तौर पर किए गए थे पुणे में लो-इंटेसिटी के धमाके. ये सवाल अब तक बड़ी पहेली बने हुए हैं.
हालांकि, महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर आर पाटिल दावा कर रहे हैं कि जिन जगहों पर बम फटे थे. वहां से जांच एजेंसियों कुछ ऐसे अहम सुराग हाथ लगे हैं, जिनकी मदद से जल्द ही पुणे ब्लास्ट की साजिश से पर्दा उठ सकता है.
जांच एजेंसियाँ अपनी तफ्तीश को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश में जुटी हैं. उधर पुणे पुलिस ने ब्लास्ट में जख्मी हुए दयानंद पाटिल नाम के शख्स को अब तक क्लीन चिट नहीं दी है. बम उसके पॉलिथीन बैग में कैसे आया. बैग में बम रखे जाने की भनक उसे क्यों नहीं लगी. ऐसे कई सवालों के जवाब दयानंद और उसकी पत्नी से जानने की कोशिश हो रही है.
पाटिल के मुताबिक जांच हर पहलू से हो रही है. लेकिन धमाके वाली जगहों से अमोनियम नाइट्रेट नाम का केमिकल मिलने के बाद ये शक और गहरा गया है कि धमाके में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ हो सकता है, इसलिए क्योंकि ब्लास्ट के लिए अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल आईएम अकसर करता रहा है.
इस बीच अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से खबर है कि पुणे में धमाकों का तरीका लगभग वैसा ही है जैसा कि 2007 में यूपी के गोरखपुर में हुए धमाकों का था. गोरखपुर में भी सिलसिलेवार लोइंटेसिटी के धमाके हुए थे और इन धमाकों के लिए नई साइकिलों का सहारा लिया गया था. यहां भी विस्फोटकों में अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुआ था. जांच में इन धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन के हाथ होने का खुलासा हुआ था.
पुणे ब्लास्ट के लिए भी नई साइकिलों का इस्तेमाल किया गया है, एनआईए ने गृह मंत्रालय को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में इसका साफ जिक्र किया है. लिहाजा साइकिलों के जरिए भी दहशतगर्दों तक पहुंचने की कोशिश जारी है. खबर है कि पुणे पुलिस ने कस्बापेट इलाके की एक साइकिल दुकान के मालिक और उसके एक कर्मचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की है.




