
NewDelhi : लोकसभा चुनाव से पूर्व पीएम मोदी के खिलाफ राजनीतिक महागठबंधन को माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने पलीता लगा दिया है. बता दें कि उन्होंने साफ तौर पर 2019 के लोकसभा चुनाव से पूर्व राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन बनाये जाने की संभावना से इनकार किया है. उनके अनुसार इस तरह का गठबंधन लोकसभा चुनाव के नतीजे की घोषणा के बाद ही संभव है. उनके बयान से सबसे ज़्यादा परेशानी कांग्रेस को हो गयी है. जान लें कि इससे पहले तेलांगना के सीएम केसीआर और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी चुनाव पूर्व महागठबंधन नकार चुके हैं.
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क्षेत्रीय धर्मनिरपेक्ष ताकतें आम चुनाव के बाद एक साथ आयेंगी
येचुरी ने मीडिया से बातचीत के क्रम में कहा कि यह मेरी निजी राय है कि भारत में चुनाव के पहले कोई भी महागठबंधन बनाना संभव नहीं है, क्योंकि हमारा देश विविधताओं वाला है. येचुरी ने कहा कि लोग केंद्र की जनविरोधी सरकार से छुटकारा पाना चाहते हैं लेकिन वैकल्पिक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार लोकसभा चुनाव के बाद ही बन सकती है. माकपा महासचिव ने कहा कि क्षेत्रीय धर्मनिरपेक्ष ताकतें आम चुनाव के बाद एक साथ आयेंगी. हालांकि उन्होंने वैकल्पिक धर्मनिरपेक्ष मोर्चा का नाम नहीं बताया.
तृणमूल की विश्वसनीयता नहीं
एक सवाल के जवाब कि क्या माकपा वैकल्पिक धर्मनिरपेक्ष मोर्चा का हिस्सा बनेगी, तो येचुरी ने कहा कि हमारी पार्टी ने केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दिया था. इससे पहले हमने 1989, 1996 और 2004 में गठबंधन वाली सरकार का समर्थन किया था. इस सवाल पर कि अगर तृणमूल कांग्रेस को विपक्षी मोर्चा में शामिल किया गया तो क्या माकपा उसका हिस्सा बनेगी? उन्होंने कहा कि तृणमूल और भाजपा में गुप्त तालमेल है. तृणमूल की भाजपा से लड़ने की विश्वसनीयता नहीं है. इसलिए दोनों से समझौता भी संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि हम किसी भी ऐसी पार्टी पर भरोसा नहीं कर सकते जिसने खुद अपने राज्य में लोकतंत्र की हत्या की हो.
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