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झारखण्ड में मगही, भोजपुरी का राजनैतिक खेल

|| जिता उराँव || 
इन दिनों झारखण्ड में मगही, भोजपुरी एवं मैथिली की टेट परीक्षा को लेकर बवेला मचा हुआ है। उक्त टेट परीक्षा में झारखण्ड के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा लिया गया और परीक्षाफल प्रकाशित भी हुआ। इसी बीच नये मंत्रिमंडल की नर्इ शिक्षामंत्री ने वैधानिक तरीके से समीक्षा कर मगही और भोजपुरी की टेट परीक्षा को असंगत ठहराया है। शिक्षामंत्री के इस बयान पर अधिक से अधिक राजनैतिक पाटियाँ शिक्षामंत्री गीताश्री उराँव के खिलाफ खड़ी हैं। विपक्ष तो विपक्ष, सत्ता पक्ष के भी, यहाँ तक कि झारखण्ड की कांग्रेस पार्टी भी गीताश्री उराँव को अंतिम चेतावनी दे रखी है। पूर्व शिक्षामंत्री बन्धु तिर्की का कहना है कि मगही और भोजपुरी की टेट परीक्षा का निर्णय मधु कोड़ा जी की सरकार के समय हुआ है।

इस मुद्दे पर झारखण्ड की आम जनता जानना चाहती है कि सरकार किसी नियम कानून के तहत चलती है या राजनैतिक पार्टियों के पीछे-पीछे चलती है। इस टेट परीक्षा प्रकरण में दो अलग-अलग शिक्षा मंत्री का बयान सरकारी सिस्टम का घोर मजाक है। झारखण्ड की आम जनता जानना चाहती है कि झारखण्ड एकेडमिक कॉन्सिल, मगही और भोजपुरी की टेट परीक्षा, कॉन्सिल की परीक्षा नियमावली के कौन से नियमों के तहत परीक्षा ली गयी है। क्या, यह सबों के लिए सामान्य कानून है या मगही, भोजपुरी एवं अंगिका के लिए नियम में फेर बदल किया गया है। यदि फेरबदल किया गया है तो वह नियम क्या है? यदि झारखण्ड एकेडमिक कॉन्सिल की परीक्षा नियमावली में मगही, भोजपुरी एवं मैथिली की टेट परीक्षा के लिए संशोधन हुए हैं तो सरकार इसे स्पष्ट करे और नहीं तो सरकार में शामिल राजनैतिक पार्टियाँ, अंगिका और भोजपुरी की टेट परीक्षा के लिए विशेष कानून बनायें।

झारखण्ड एकेडमिक कॉन्सिल की परीक्षा नियमावली कंडिका 20 (viii) ds vuqlkj & No person shall be appointed an examiner unless he/she has atleast three years of teaching experience in a recognized Institution. इस कंडिका के अनुसार मगही, भोजपुरी एवं मैथिली की टेट परीक्षा का परीक्षाफल असंगत है क्योंकि मगही, भोजपुरी एवं मैथिली विषय की पढ़ार्इ झारखण्ड में नहीं होती है। फलत: झारखण्ड में इसके शिक्षक नहीं हैं। और जब शिक्षक ही नहीं हैं तो परीक्षक कहाँ से आये तथा परीक्षाफल कैसे निकला?

एकेडमिक कॉन्सिल की दूसरी परीक्षा नियमावली कंडिका 20 (vi) ds vuqlkj & Provided further that in special circumstances where teachers with requisite qualification and experience are not available the chairman may appoint a person known for scholarship in the subject. इस कंडिका के अनुसार एकेडमिक कॉन्सिल के अध्यक्ष को यह शक्ति प्रदान है कि वे विशेष परिस्थिति में अपने शक्ति का प्रयोग करें। यदि कॉन्सिल के अध्यक्ष महोदय ने इस धारा का प्रयोग किया है तो अध्यक्ष महोदय को राज्य की जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

वर्तमान शिक्षामंत्री गीताश्री उराँव के खिलाफ राजनैतिक पाटियों के तेवर काफी कड़े हैं। सिर्फ उन्हीं को दोषी क्यों बनाया जा रहा है? क्या, सिर्फ इसलिए कि वह एक आदिवासी महिला हैं? क्या, सिर्फ इसलिए कि वह एक महिला विधायक एवं मंत्री हैं। क्या, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने सच्ची बात को निडर होकर कानूनी तरीके से कार्य करना चाहा? इन बातों पर सरकार एवं राजनैतिक पार्टियों का रूख स्पस्ट होना चाहिए।

लेखक जिता उराँव का परिचय:
सेवानिवृत पुलिस उपाधीक्षक,

सचिव, अद्दी कुँड़ुख़ चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, झारखण्ड

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