
Lucknow : उन्नाव रेप केस में सीबीआइ ने आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, अतुल सिंह, वीरेंद्र सिंह और शैलेंद्र सिंह कस्टडी में लेने की अर्जी दी है. साथ ही सीबीआइ ने पीड़िता के चाचा से भी पूछताछ की अनुमति मांगी है. गौरतलब है कि एक्सीडेंट केस में शिकायकर्ता पीड़िता के चाचा ही हैं.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को सड़क हादसे की जांच में राहत दी है. दरअसल, सीबीआइ ने सड़क हादसे केस को दिल्ली ट्रांसफर न करने की अर्जी दी थी. इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ की अर्जी के मंजूर करते हुए जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का समय दिया है.
सड़क दुर्घटना को रिक्रिएट कर जांच करेगी सीबीआइ
रोड एक्सीडेंट की जांच को लेकर सीबीआइ की एक टीम ज्वॉइंट डायरेक्टर के नेतृत्व में रायबरेली जायेगी. सीबीआइ टीम घटनास्थल पर जाकर एक्सीडेंट सीन को रिक्रिएट करेगी. वहीं सीएफएसएल की एक टीम साक्ष्यों को जुटाने के लिए रायबरेली पहुंच रही है.
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पीड़िता और वकील की हालत स्थिर
सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़िता और उसके वकील की हालत शुक्रवार को छठे दिन स्थिर बनी हुई है. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के मीडिया प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी ने शुक्रवार को बताया कि पीड़िता अब भी वेंटिलेटर पर है और उसे बुखार है लेकिन उसकी हालत स्थिर बनी हुई है. पीड़िता के वकील को अब वेंटिलेटर से हटा लिया गया है.
डॉ. तिवारी ने बताया कि पीड़िता को गुरुवार शाम वेंटिलेटर से कुछ समय के लिए हटाया गया था लेकिन उसकी हालत खराब होने के कारण उसे दोबारा वेंटिलेटर पर रख दिया गया.
पीड़िता के गले में छोटा सा छेद करके (ट्रैकियोस्टोमी) टयूब से उसे ऑक्सीजन दी जा रही है. पीड़िता को गुरुवार रात से हल्का बुखार है, लेकिन उसकी हालत स्थिर है. पीड़िता अभी बेहोश है. डॉक्टरों की टीम 24 घंटे उसकी स्थिति पर नजर रखे हुए है.
उन्होंने बताया कि घायल वकील महेंद्र सिंह को बृहस्पतिवार शाम वेंटिलेटर से हटा दिया गया था और उन्हें भी गले में छेद करके (ट्रैकियोस्टोमी) टयूब से ऑक्सीजन दी जा रही है. उनकी तबियत स्थिर है.
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क्या है ट्रैकियोस्टोमी विधि
डॉ. तिवारी ने बताया कि जब कोई भी मरीज चार दिन से ज्यादा वेंटिलेटर पर रहता है तो उसे ऑक्सीजन देने के लिये ट्रैकियोस्टोमी विधि का इस्तेमाल किया जाता है. इससे मरीज को पर्याप्त ऑक्सीजन भी मिलती रहती है और फेंफड़ों आदि की सफाई करने में भी आसानी होती है.
उन्होंने कहा कि हम पीड़िता और उसके वकील का इलाज करने में पूरी तरह से समर्थ है और केजीएमयू के सबसे अच्छे डाक्टरों की टीम दोनों का इलाज कर रही है. उन्होंने कहा कि पीड़िता और वकीलों के परिजन की भी यह इच्छा है कि दोनों का इलाज लखनऊ में ही कराया जाए.




