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डीसी ने ग्राम प्रधानों की बैठक कर बताया, गांव में बाहरी लोगों को न घुसने देना गलत

sonu ansari
khunti, 02 September: कांकी घटना के बाद यह तो साफ हो गया की विभिन्न मुददों को लेकर प्रशासन और आदिवासी बहुत इलाकों के लोगों के बीच वैचारिक मतभेद है. प्रशासन लोगों की परेशानी समझ नहीं पा रही वहीं लोगों के मन में भी प्रशासन को लेकर भ्रांतियां पैदा हो रही है. बीते गुरूवार को ग्रामीणों और पुलिस के जवान सहित उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के बीच जो कुछ भी हुआ यह इस बात का ताजा और सटिक उदाहरण है.

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प्रशासन और आम लोगों के बीच पैदा हुई इसी खाई को कम करने या यूं कहें की इसे पाटने का बीड़ा प्रशासन ने उठाया है. इसके तहत खूंटी के नगर भवन में जिले के सभी 86 पंचायतों के ग्राम प्रधान के साथ सम्मान एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में पांचवी अनुसूची और पेशा कानून पर सविंधान में लिखित व्यवस्था की व्याख्या की गयी, ताकि ग्रामप्रधानों के मन में इसे लेकर जो भ्रम की स्थिती उत्पन्न हो गयी है, उसे खत्म किया जा सके. कार्यक्रम के बाद ग्राम प्रधानों को सम्मान स्वरूप एक एक पौधा और चादर दिया गया.

सुनें और देखें कार्यक्रम में क्या-क्या हुआ

डीसी ने पूरी कोशिश की कि ग्रामीण भ्रम की स्थिति से बाहर निकलें गांववालों के द्वारा खूंटी प्रखंड के कांकी गांव में एसपी, डीएसपी सहित कई पुलिसकर्मियों को बंधक बनाये जाने के बाद और सरकारी योजनाओं का बहिष्कार किये जाने के बाद जिला प्रशासन ने अडकी,खूंटी,कर्रा,मुरहू,तोरपा और रनिया के ग्राम प्रधानों के साथ बैठक कर ग्रामीणों में आपसी सामंजस्य स्थापित करने को लेकर ग्राम प्रधान और ग्रामीणों को कानून सम्बंधित जानकारियां दी और जो भ्रम ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के बीच था, उसे दूर करने की डीसी द्वारा पूरी कोशिश की गयी.

सरकारी योजनाओं को न मानने का फरमान जारी करना गलत

खूंटी में पेशा कानून को लेकर ग्रामीणों के बीच कथित रूप से कुछ बाहरी तत्वों द्वारा जो भ्रम फैलाया गया था उसे जिले के डीसी ने बड़ी गंभीरता और धर्य के साथ सुलझाने की कोशिश की. ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि जिस हक़ की लड़ाई की खातिर आप लोगों ने बाहरी लोगों को गांव में घूसने न देने व सरकारी योजनाओं को न मानने संबंधी फरमान जारी कर रखा है वह गलत है. उन्होंने गामीणों को बताया कि आपलोगों के हक के लिए प्रभु नारायण और प्रेमचंद्र मुर्मू ने जो याचिका दायर की उसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा चार महीने पहले ही लागू कर दिया गया है. कार्यक्रम में इस बात की जानकारी मिलते ही ग्राम प्रधान सहित यहां मौजूद सभी ग्रामीण उत्साहित नजर आये.

‘‘मुण्डा होन चि कुला होन’’ यानि यहां के लोग शेर की तरह हैं

इस कार्यक्रम के दौरान जिले के उपायुक्त ने ग्राम प्रधानों को कहा कि ‘‘मुण्डा होन चि कुला होन’’ यानि यहां के लोग शेर की तरह हैं और हम बिरसा मुण्डा के आदर्श पर चलें. साथ मिल कर प्रेम एवं आदर्श से खूंटी को उंचाई पर ले जाएं. कार्यक्रम में उपस्थित सभी ग्राम प्रधानों ने उपायुक्त के संबोधन को गौर से सुना और अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों के बीच इसकी सकारात्मक जानकारियां देने की बात कही.

कांकी घटना के बाद प्रशासन की नींद खुली

योजनाओं का बहिष्कार किये जाने का मामला खूंटी प्रखंड के भंडरा, शिलादोन पंचायत के बाद मुरीह पंचायत में शुरू हुआ और यहां पत्थरगड़ी कर ग्रामीणों को दिग्भ्रमित करने का काम किया गया. सैकड़ों ग्रामीणों पर पुलिस ने मामला दर्ज किया, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. कांकी घटना के बाद प्रशासन की नींद खुली और अब ग्रामीणों और प्रशासन के बीच पैदा हुई खाई को जिस तरह से पाटने का काम किया जा रहा है सराहनीय है लेकिन यदि यही कार्य प्रशासन ने पहले किया होता तो शायद कांकी की घटना घटित ही नहीं हुई होती. और सरकारी योजनाओं से वंचित होने के बजाय यहां के लोग इसका लाभ उठा रहे होते.

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