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प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस की लोकप्रियता बंगाल में बढ़ा दी, ममता परेशान 

Kolkata  :  पश्चिम बंगाल  की सीएम  ममता बनर्जी इस बात से बेहद परेशान हैं कि  पश्चिम बंगाल  में आरएसएस की शाखाओं में शामिल होनेवालों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है . राजनीतिक गलियारों में इस बात की  चर्चा है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने का फायदा आज आरएसएस को हो रहा है. बता दें कि नागपुर में प्रणब मुखर्जी के दौरे के बाद आरएसएस में शामिल होने के लिए सबसे ज्यादा आवेदन पश्चिम बंगाल से ही आ रहे हैं.  इस बात का जिक्र आरएसएस द्वारा  पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी  को  भेजे गये धन्यवाद पत्र में  किया गया है .   पत्र संघ के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने पूर्व राष्ट्रपति को भेजा है . उन्होंने पत्र में  श्री मुखर्जी के विचार वन इंडिया और भारतीय संस्कृति की तारीफ की. पत्र के अंत में  वैद्य ने संघ में शामिल होने के लिए लोगों में बढ़ी दिलचस्पी का जिक्र किया है . अब  लोगों के रुख से मुख्‍यमयंत्री ममता बनर्जी की परेशानी बढ़ गयी हैं .  अगर इसी तरह से पश्चिम बंगाल के लोगों का संघ से जुड़ने का सिलसिला जारी रहा, तो 2019 में होने वाले चुनावों में टीएमसी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. 

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20 दिनों में अंदर पश्चिम बंगाल में 600 नयी शाखाएं खुल गयी 

 इस संबंध में  पश्चिम बंगाल में आरएसएस के पश्चिम बंगाल यूनिट के मीडिया प्रभारी बिपलब रॉय बताया कि हमें एक से छह जून तक औसतन 378 आवेदन रोजाना प्राप्त हुए. बताया कि सात जून को सबसे ज्यादा 1779 आवेदन आये.  प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस के नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण लेने वाले काडर को  सात जून को ही संबोधित किया था. खबरों के अनुसार नागपुर कार्यक्रम से पूर्व पश्चिम बंगाल में सात सौ शाखाएं और तीन सौ शाखाएं उत्तरी बंगाल में थीं.  पूर्व राष्ट्रपति के संघ के कार्यक्रम में जाने के बाद अब 1,200 और 400 शाखाएं दक्षिण और उत्तर बंगाल में चलती हैं.  यानी नागपुर कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति के शामिल होने के 20 दिनों में अंदर पश्चिम बंगाल में 600 नयी शाखाएं खुल गयी हैं.  इसे ममता बनर्जी का सिरदर्द बताया जा रहा  है.  

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