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नरेगा के लिए नियोजित डोभे मशीनों से ही क्यों खुदने चाहिए?

रांची: राज्य सरकार ने नरेगा के तहत बनने वाले डोभा में मशीनों के इस्तेमाल का निर्णय लिया है। पर इससे मजदूरों के हित कम होगा। आइये जानते हैं कि नरेगा के लिए नियोजित डोभे मशीनों से ही क्यों खोदे जाने चाहिए।

  1. नरेगा के लिए नियोजित डोभों को मशीन से खुदवाना रोजगार गारंटी कानून व ग्राम सभाओं, ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों व जिला परिषदों के संकल्पों का उल्लंघन है।
  2. नरेगा से डोभों का निर्माण योजना बनाओ अभियान में 2016—2017 के लिए आयी 14.5 करोड़ मानव दिवस की काम की मांग का एक भारी हिस्सा पूरा कर सकता है (हर डोभे में सृजित होने वाले मानव दिवस की संख्या तालिका में दी गयी है।)
  3. नरेगा से डोभों के निर्माण से बड़े स्तर पर रोजगार सृजित हो सकता है, जिसकी चल रहे सुखाड़ में बहुत आवश्यकता है और जो भूख, गरीबी व पलायन से कुछ राहत देगा (हर डोभे से सृजित होने वाली कुल मजदूरी के लिए तालिका देखें।)
  4. नरेगा से डोभों के निर्माण पर होने वाला खर्च कृषि विभाग द्वारा अनुमानित मशीन से डोभेां की खुदाई पर होने वाले खर्च से काफी कम है। (तुलना के लिए तालिका देखें।) यह भी ध्यान देने वाली बात है कि नरेगा से डोभे बनने का लगभग सारा खर्च केंद्र सरकार द्वारा उठाया जायेगा चुंकि उसे नरेगा के कामों में होने वाली सारी मजदूरी व सामग्री पर होने वाले खर्च का 75 प्रतिशत भुगतान करना होता है।
  5. झारखंड ने केंद्र सरकार को 2016—17 में नरेगा से 1.28 लाख डोभे बनाने का वादा किया है। अगर नरेगा के लिए नियोजित डोभे कृषि विभाग द्वारा बनते है। तो राज्य अपना यह लक्ष्य पूरा नहीं कर पायेगी।
  6. अगर मशीन से डोभे खुदेंगे तो कई लाभार्थी शोषण के शिकार होंगे चूंकि मशीन से डोभे खुदने का सारा खर्च लाभार्थी के खाते में डाला जाना है।
  7. मशीन से डोभे बनाने के निर्णय से नरेगा को कई प्रकार से हानि हो रही है। कुछ जिलों में तो नरेगा से किसी भी प्रकार का डोभा बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही। स्थानीय अधिकारी व कर्मी अभी नरेगा के काम खोलने के बजाय मशीन का प्रबंध करने में लगे हैं। जब गांव में मशीन घुसेगी तो उसका नरेगा में गैर कानूनी प्रयोग को रोकना और भी कठिन हो जायेगा।
  8. राज्य को अपनी राशि से मजदूरों को उन 47 हजार तालाबों की खुदाई पर लगाना चाहिए जिनको योजना बनाओ अभियान में मुख्यमंत्री के आदेश पर जीर्णोद्धार के लिए चिह्नित किया गया है।
  9. आखिर में, अगर इन डोभों को नरेगा से छिन लिया जायेगा तो योजना बनाओ अभियान, जो नरेगा व ग्राम पंचायतों को मिलने वाली राशि से कार्यान्वित होने वाली योजनाओं के नियोजन के लिए झारखंड का पहना राज्य व्यापी अभियान है, उसका उद्देश्य समाप्त हो जायेगा।

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