Sonu Ansari
Khunti, 01 September :
– 13 अगस्त 2016 को सीएम ने कहा था, एक साल में बिरसा की जन्मभूमि व कर्मभूमि की सूरत बदल जाएगी.
– अब विभागों के सचिव तक लगा रहे हैं उलीहातू का चक्कर
आज से ठीक एक साल 16 दिन पहले (13 अगस्त 2016) को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में रघुवर सरकार ने बिरसा मुंडा के गांव उलीहातू और किताहातु में भव्य कार्यक्रम किया था. उलीहातू भगवान बिरसा की जन्मस्थली है और किताहतु उलगुलान आन्दोलन का प्रमुख केंद्र. कार्यक्रम में रघुवर दास ने दोनों गांव के विकास के लिए कई घोषणाएं की थीं. सीएम रघुवर दस ने कहा था कि एक साल के भीतर बिरसा की जन्मभूमि और कर्मभूमि की सूरत बदल जाएगी. गृह मंत्री व मुख्यमंत्री की घोषणा सभी अखबारों ने पहले पन्ने पर छपी थी. मुख्यमंत्री की खूब वाहवाही भी हुई थी.
अब एक साल से अधिक समय बीत चुका है. अचानक उलीहातू और किताहातू में बड़े-बड़े अफसरों की आवाजाही तेज हो गई है. सचिव स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों ने इन गांवों में मोर्चा संभाल रखा है. ऐसा क्या हुआ जो घोषणाओं के एक साल बाद अचानक प्रशासन की नींद खुल गई और विकास का जज्बा उनमें उमड़ पड़ा.
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क्या हुआ ऐसा कि अचानक रेस हुए अफसर
दरअसल, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 15 से 17 सितंबर के बीच झारखण्ड दौरे पर आनेवाले हैं. ऐसी संभावना है कि उस दौरान वे बिरसा की जन्मभूमि उलीहातू भी जाएंगे. बस, इस सूचना के बाद से ही प्रशासन की नींद उड़ गई है.
न्यूज़ विंग के रिपोर्टर ने अपनी पड़ताल में पाया कि बीते वर्ष सीएम ने जो घोषणाएं की थी, वह तो पूरी ही नहीं हुईं. साल भर तक अफसर सोए रहें. सीएम की घोषणाओं को पूरा करने की कोशिश एक बार भी नहीं की. अब भगवान बिरसा के जन्मभूमि व कर्मभूमि के महत्वपूर्ण परिसरों का रंग-रोगन कर चमकाने की कोशिश की जा रही है. स्कूल के फर्श पर टाईल्स लगाये जा रहे हैं. कल्याण विभाग के सचिव हिमानी पांडेय और पर्यटन विभाग सचिव राहुल शर्मा ने उलीहातू और डोम्बारी बुरु का दौरा कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए.
अब जरा प्रमुख घोषणाओं पर गौर किया जाये
घोषणा- 1 : बिरसा मुंडा के गांव उलीहातू के सभी 71 घरों को सरकार पक्का बनवाएगी. एक सप्ताह के अन्दर काम शुरू होगा.
क्या हुआ : अब तक काम शुरू नहीं हुआ.
घोषणा- 2 : गांव में बिजली और पानी की समुचित व्यवस्था की जाएगी.
क्या हुआ : नहीं हुआ.
घोषणा- 3 : बिरसा आवासीय विद्यालय में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरा जायेगी.
क्या हुआ : अब भी खाली हैं कई पद.
घोषणा- 4 : गांव में एम्बुलेंस देने की बात कही थी.
क्या हुआ : एम्बुलेंस नहीं मिला.
घोषणा- 5 : उलीहातू में जल्द ही अस्पताल खोला जाएगा.
क्या हुआ : अस्पताल नहीं खुला.
घोषणा- 6 : गृहमंत्री ने कीताहतु में कहा था कि झारखण्ड की हरियाली सूखने ना दें.
क्या हुआ : इस दिशा में भी कुछ काम नहीं हुआ.
घोषणा- 7 : बिरसा मुंडा के परिवार के चार सदस्यों को सहायक पुलिस की नौकरी दी जाएगी.
क्या हुआ : प्रक्रिया अधीन.
घोषणा- 8 : बाहर गए आदिवासियों को बुलाएंगे. रोजगार देंगे
क्या हुआ : ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. अफसर ने गांव की तब सुध ली जब अमित शाह के आने की हवा उड़ी.
घोषणा- 9 : बिरसा आवासीय विद्यालय के मैदान में पोलीग्रास लगायी जाएगी. साथ ही खेल की समुचित व्यवस्था की जाएगी.
क्या हुआ : न पोली ग्रास लगाए गए और ही खेल व्यवस्था को दुरुस्त किया गया.
लीपापोती व रंग-रोगन से सच्चाई को ढंकने का प्रयास
ऐसी खबर मिली कि अमित शाह के तीन दिवसीय दौरे के दौरान अमित शाह, मुख्यमंत्री रघुवर दस के साथ उलीहातू जायेंगे. इसके बाद से ही साल भर से सोये अधिकारी अचानक से रेस हो गए हैं. योजनाओं को हड़बड़ी में पूरा करने की कोशिश की जा रही. यह तेजी काम की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है. ऐसा लग रहा है कि अफसरों का मकसद बस सीएम और अमित शाह के सामने विकास कार्यों की हकीकत पर पर्दा डालना है. भगवान बिरसा के जन्मस्थली से लेकर कर्मस्थली सहित 9 गांवों को विकसित करने का काम आनन-फानन में शुरू कर दिया गया है.
सुनिए क्या कहते हैं कल्याण विभाग के सचिव
एक सवाल पर कल्याण विभाग के सचिव हिमानी पाण्डेय ने कहा कि केंद्र सरकार के द्वारा भुगतान नहीं होने कारण योजनाओं को शुरू करने में देरी हुई. लेकिन अब जल्द ही काम पूरा कर लिया जायेगा.
सचिव का वीडियो…………..
सुनिए क्या कहते हैं पर्यटन विभाग के सचिव
कांट्रेक्टर को काम में तेजी लाने को कहा गया है. पर्यटकों के विश्राम करने की व्यवस्था की जा रही है.
क्या कहते हैं बिरसा मुंडा के वंशज
राज्य की सभी सरकारों ने उलिहातू को आर्दश गांव बनाने का घोषणा की. बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा और रघुनाथ मुंडा कहते हैं कि यहां स्कूलों में शिक्षक नहीं आते जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा नहीं मिल पाती है. बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं. बिरसा मुंडा परपोती जौनी कुमारी कहती है कि चिकित्सा सुविधा नहीं होने की वजह से गांव के लोगों की जान चली जाती है. सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है. ग्राम प्रधान सामुयल पूर्ति गांव के युवकों को रोजगार नहीं मिलने से काफी दुखी हैं. कहते हैं कि सभी नेता आते हैं और उम्मीदों का झुनझुना थमा जाते हैं.
सिर्फ घोषणाएं हुई : अर्जुन
उलीहातू के ग्रामीण अर्जुन मुंडा ने कहा कि अगर ये काम पहले शुरू होता तो आज उलीहातू एक प्रमुख पर्यटन स्थल होता. साथ ही नक्सलवाद भी ख़त्म हो जाता. सीएम आये और सभी ने गांव के विकास की घोषणायें कीं लेकिन कुछ नहीं हुआ.
अब स्थिति यह है कि अमित साह के आने की सूचना पर काम युद्धस्तर पर हो रहा है. भगवान बिरसा की धरती पर एक साल के भीतर पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्रीमंत्री राजनाथ सिंह सहित कई दिग्गज राजनेता व मंत्री आये. सभी ने विकास सम्बन्धी घोषणाएं कीं पर जमीनी हकीकत को कोई भी इन गांवों में जाकर पता कर सकता है.




