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सुब्रमण्यम स्वामी की किताब में दावा, पीएम मोदी की टीम में अयोग्य और चापलूसों की भरमार

रूपा पब्लिकेशन से प्रकाशित सुब्रमण्यम स्वामी की किताब रिसेट: रिगेनिंग इंडियाज इकॉनोमिक लेगेसी का लोकार्पण 30 सितंबर को मुंबई में किया जायेगा.

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NewDelhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम में अयोग्य और चापलूसों की भरमार है.  मोदी के सहयोगी मंत्री और सलाहकार भी उन्हें न तो सही सलाह देते हैं और न ही उन्हें सच्चाई से रू-ब-रू कराते हैं।. पूर्व केंद्रीय मंत्री और  भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने यह दावा किया है.  खबरों के अनुसार सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी नयी किताब रिसेट: रिगेनिंग इंडियाज इकॉनोमिक लेगेसी में स्वामी ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी अपने पूर्ववर्ती डॉ मनमोहन सिंह से ठीक विपरीत हैं.

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मैक्रो इकॉनोमिक्स के अंतर-क्षेत्रीय गतिशील पेचीदगियों से वाकिफ नहीं

माइक्रो इकॉनोमिक्स से तो मोदी अनौपचारिक रूप से परिचित हैं पर मैक्रो इकॉनोमिक्स के अंतर-क्षेत्रीय गतिशील पेचीदगियों से वो वाकिफ नहीं हैं.  बावजूद इसके उन्होंने कठिन परिश्रम और जनमानस के बीच लोकप्रिय छवि के बलबुते बहुत सुधारात्मक कदम उठाये हैं. पीएम मोदी  पैसे के मामले में ईमानदार हैं. रूपा पब्लिकेशन से प्रकाशित सुब्रमण्यम स्वामी की इस किताब का लोकार्पण 30 सितंबर को मुंबई में किया जायेगा.

द प्रिंट में प्रकाशित स्वामी की किताब के उद्धरण के अनुसार शैक्षणिक रूप से आंशिक तौर पर पिछड़े होने की वजह से पीएम मोदी अपने दोस्तों और जड़हीन मंत्रियों पर ज्यादा निर्भर हैं, जो कभी उन्हें अर्थव्यवस्था के मसलों पर न तो सच्चाई बताते हैं और न ही उन्हें मैक्रो इकॉनोमिक्स की सही व्याख्या कर उन्हें उचित सलाह दे पाते हैं, जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत है.  इसी के बल पर इस आर्थिक संकट से पार पाया जा सकता है.

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नरेंद्र मोदी एक दबंग शख्सियत हैं

भाजपा के राज्यसभा सांसद स्वामी  ने लिखा है,अयोग्य सलाहाकारों की वजह से ही हमने नोटबंदी और जीएसटी की वजह से कई परेशानियां देखी हैं.  हालांकि, दोनों ने अर्थव्यवस्था की गति को तेज कर दिया है.  प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी एक दबंग शख्सियत हैं जो बिना राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के जीतते रहे हैं.

स्वामी ने अपनी किताब में लिखा है कि राजनीतिक तौर पर मुखर मोदी को अर्थव्यवस्था जैसे जटिल विषय पर अनिर्वाचित राजनीतिक सलाहकार और सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिनके बारे में वो भी बहुत कम जानते हैं.

स्वामी के अनुसार इनमें से कुछ तो मोटी तनख्वाह और भत्तों पर नियुक्त हुए हैं लेकिन असलियत में वे डरपोक अर्थशास्त्री हैं जो प्रधानमंत्री को वही चीजें बताते हैं जो वो सुनना चाहते हैं. लिखा है कि  यह देश को अंधेरे में रखने वाली भयावह स्थिति जैसी है.

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