रांची : रांची बूटी रोड पर होटवार स्थित खेलगांव में फूड प्रोसेसिंग पर दो दिवसीय सम्मेलन का उदघाट्न करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने निवेशकों से झारखंड में खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) को बढ़ावा देने की अपील की। किसानों को एक की जगह दो या तीन फसल उपजाने की सलाह दी। उन्होंने राज्य की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड को अब खनिजों के अलावा फूड प्रोसेसिंग के लिए भी जाना जाएगा।
आयोजन में मुख्यमंत्री की बातें झारखंड के विकास पर केंद्रित दिखी। उन्होंने कहा कि झारखण्ड बदल रहा है। विकास की ओर उन्मुख इस राज्य में निवेशकों के लिए लाल फीताशाही की जगह अब लाल कालीन ने ले ली है। अब तय समयसीमा के भीतर काम दिखेगा। वहीं खाद्य-प्रसंस्करण उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों से उन्होंने कहा कि वे यहां उद्योग लगाकर प्राथमिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करें। इससे झारखंड विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा। श्री दास ने कहा कि झारखण्ड को देश-दुनिया में खान-खनिज के लिए जाना जाता है, अब झारखण्ड को फूड प्रोसेसिंग के लिए जाना जायेगा।
रांची के खेल गांव में शुरू हुए इस सम्मलेन में देश के करीब आठ राज्यों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। आयोजन स्थल में फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिये 50 से ज्यादा स्टॉल लगाये गये हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया का जिक्र करते हुये कहा कि यह मेक इन झारखंड से ही सफल साबित हो पायेगा। उन्होंने प्रदेश में कृषि, पर्यटन और आई.टी. के क्षेत्र में संभावना की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि कृषि रोजगार का सबसे बड़ा प्रक्षेत्र है और प्रदेश के किसान फूल और सब्जी का उत्पादन कर रोजगार के नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान एक के बजाय दो से तीन फसल का उत्पादन करें। इसके लिये किसानों को बागवानी या दूध उत्पादन के क्षेत्र में काम करने की जरुरत है। इसकी सफलता के लिये गांवों में कृषक समूह बनाये जाने का भी निर्देश दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड मटर के उत्पादन में देश का तीसरा और टमाटर के उत्पादन में छठा राज्य है। उन्होंने सम्मलेन में भाग लेने वाले उद्यमियों से राज्य में फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने और झारखंड में विकास के नए आयाम सृजित करने की अपील की।
इस अवसर पर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री टी. नंदकुमार ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुये निवेशकों को गांव की ओर जाना होगा। फूड प्रोसेसिंग उद्योग में छोटे निवेशों से भी बहुत ज्यादा लाभ की संभवानाएं हैं। आज खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भारत का सर्वाधिक तेज गति से विकसित होने वाला क्षेत्र है। यह परिवर्तन हमारी जनसंख्या में हो रहे बदलाव को देखते हुए जरुरी है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव राजीव गौबा ने झारखण्ड में खाद्य- प्रसस्करण उद्योग की संभावनाओं के संबंध में बताया। उद्योग सचिव श्रीमती हिमानी पाण्डेय ने स्वागत संबोधन किया। धन्यवाद ज्ञापन उद्योग निदेशक श्री के. रवि कुमार ने किया।




