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एचइसी घाटे में नहीं है, इसे नहीं बेचेगी सरकारः अनंत गीते

Ranchi: एचइसी घाटे में नहीं है. जितने ऑर्डर मिले हैं, उससे आनेवाले दिनों में एचइसी को लाभ होगा. ये बातें केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते ने कही हैं. उन्होंने कहा है कि एचइसी को किसी भी हाल में बेचा नहीं जायेगा. मंत्री ने यह भी कहा कि एचइसी के उत्थान को लेकर नीति आयोग ने भीएक रिपोर्ट बनायी है, यह रिपोर्ट सरकार के पास है. सरकार इसमें विनिवेश पर विचार कर रही है. हालांकि सरकार ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है.

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एचइसी और कर्मचारियों के हित में निर्णय लेगी सरकार  

केंद्रीय मंत्री ने कहा यह भी कहा है कि सरकार कोई भी निर्णय एचइसी और कर्मचारियों के हित को देखते हुए लेगी.  ध्यान में रखते हुए ही लेगी इसलिए किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है. कर्मचारियों को किसी भी बात के लिए डरने की जरूरत नहीं है.

फायदे में चल रही ई कंपनियों में भी पांच से 15 फीसदी तक विनिवेश का फैसला 

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते ने यह भी कहा है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के किसी भी उपक्रम को नहीं बेचेगी. सभी का स्वामित्व अपने पास रखेगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने फायदे में चल रही ई कंपनियों में भी पांच से 15 प्रतिशत तक विनिवेश का फैसला करने का मन बना चुकी  है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कंपनियों को उबारने के लिए उनका प्रबंधन निजी हाथों में भी सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गयी है. लेकिन इनका भी स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा.

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दो बार बीआइएफआर में जा चुका है एचइसी

एचइसीआर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से वर्ष 1992 से 96 तक बीआइएफआर में था. फिर दूसरी बार 2003 से 2006 तक बीआइएफआर में गया.

एचइसी के दूसरी  बार बीआइएफआर में जाने के बाद राज्य सरकार ने एचइसी की आर्थिक स्थिति में  सुधार के उद्देश्य से 100 एकड़ जमीन के लिए उसे 743  करोड़ रुपये देने का फैसला किया था. जिसमें 214 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है.

वित्तीय वर्ष 2014-15 से ही एचइसी घाटे में चल रहा है. दिसंबर 2017 तक का कंपनी का अनुमानित घाटा 140 करोड़ रुपये का है.

एचइसी के कर्मचारियों का वेतन पुनरीक्षण मद का करीब 200 करोड़ रुपये बकाया है.

एचइसी पर कच्चा माल मद में 100 करोड़ का बकाया है.

अभी 1400 करोड़ का कार्यादेश है.

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