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90 लाख खर्च कर RMSW 33 वार्डों में करती है सफाई, जबकि 20 वार्डों में निगम करता है 3 करोड़ खर्च

नगर आयुक्त ने माना ‘कंपनी को हटाने में निगम नहीं है सक्षम, सूडा में बनाया जा रहा आरएफपी’

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Ranchi: शहर के कई वार्डों में सफाई कार्य देख रही रांची एमएसडब्ल्यू (रांची नगर निगम और एस्सेल इंफ्रा का ज्वाइंट वेंचर) कंपनी को एक बार फिर अल्टीमेटम देते हुए कार्य विस्तार दिया गया है. इस विस्तार को लेकर पार्षदों के बीच नाराजगी है. जबकि हकीकत यह है कि निगम अभी भी सभी वार्डों में सफाई कार्य संभालने में सक्षम नहीं है.

निगम के अधिकारियों की बात मानें, तो 20 वार्डों में सॉलिड वेस्ट निस्पादन कार्य करने और सभी 53 वार्डों में सिवरेज-ड्रेनेज करने में निगम को अनुमानतः 3 करोड़ के करीब खर्च आता है. इसके विपरित कंपनी जितने वार्डों में सॉलिड वेस्ट कार्य देखती है, उसमें उसे करीब 90 लाख रूपये खर्च आता है. दोनों के कार्य क्षेत्र को देखने से एक बड़ी राशि का अंतर आता है. जिस कारण निगम अभी तक सभी वार्डों में कार्य का जिम्मा नहीं ले सका है. मालूम हो कि कुल 53 वार्डों में से 33 वार्डों का जिम्मा रांची एमएसडब्ल्यू को है. वहीं कुल 20 वार्डों में निगम सॉलिड वेस्ट और सिवरेज-ड्रेनेज का कार्य देखता है.

निगम सक्षम नहीं, इसलिए दिया गया विस्तार

बार-बार अल्टीमेटम देने के बाद एक बार फिर कंपनी को कार्य विस्तार दिये जाने के सवाल पर नगर आयुक्त ने भी स्वीकारा कि निगम अभी कुल 53 वार्डों में सफाई कार्य करने को सक्षम नहीं है. उन्होंने कहा कि यह सही है कि कंपनी का अभी तक सफाई कार्य में परफॉर्मेंस नहीं सुधरा है. जिस दिन निगम अपने को इसके लिए सक्षम बना लेगा कंपनी को टर्मिनेट कर दिया जाएगा.

उन्होंने बताया कि कंपनी को हटाने से पहले नगर विभाग अंतर्गत राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) में आरएपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) बनाने पर कार्य किया जा रहा है. इसके बाद नये कंपनी के लिए टेंडर निकाला जाएगा.

निगम अंतर्गत कार्यरत वार्डों में खर्च 3 करोड़ तक

सफाई कार्य में हो रही इतनी बड़ी राशि की जानकारी देते हुए नगर आयुक्त ने बताया कि निगम का अभी इसमें 3 करोड़ से अधिक की राशि खर्च होती है. इस खर्च में 20 वार्डों में सफाई कार्य सहित सभी वार्डों में सिवरेज-ड्रैनेज कार्य करना है. निगम संचालित एक वार्ड में कूड़ा उठाने में करीब 3500 रूपये प्रति टन खर्च करना पड़ता है. जबकि कंपनी अंतर्गत संचालित वार्डों में प्रति टन 1600 रूपये खर्च आता है. इन खर्चों में कर्मचारियों के वेतन, कूड़ा उठाने वाले ट्रैक्टरों का भाड़ा शामिल है. ऐसे में तक्काल कंपनी को हटाने से राजधानी के सफाई कार्य में बुरा प्रभाव पड़ सकता है.

वेतन सहित ट्रैक्टर भाड़े खर्च में जाती है बड़ी राशि

सूत्रों के मुताबिक, नगर निगम में वर्तमान में करीब 1800 कर्मचारी कार्यरत है. इन कर्मियों के वेतन भुगतान में निगम को एक बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है. इसके साथ निगम अपने अंतर्गत संचालित वार्डों में कूड़ा उठाने के लिए भाड़े पर ट्रैक्टर लेने का काम करता है. इन वार्डों में करीब 151 ट्रैक्टर प्रतिदिन कूड़ा उठाने काम करते है.

इसमें से 40 ट्रैक्टर निगम का है, वहीं 111 ट्रेक्टर भाड़े पर लिये जाते है. कूड़ा उठाने में एक ट्रैक्टर को 26 दिनों के लिए प्रतिदिन 666 रूपये खर्च करना पड़ता है. इस हिसाब से एक ट्रैक्टर पर महीना में करीब 17,300 खर्च आता है. अगर 111 ट्रैक्टर के हिसाब से देखें तो 19 से 20 लाख रूपये तक इस और निगम का खर्च आता है.

कार्य उत्तरदायित्व देने सहित ट्रैक्टर खरीदने पर हो रहा विचार

मेयर आशा लकड़ा की अध्यक्षता में हुए बैठक का हवाला देते हुए नगर आयुक्त ने कहा कि खर्च की राशि को कम करने के लिए निगम अपने हर स्तर पर कार्य कर रहा है. इसमें निगम अंतर्गत वार्डों में कूड़ा नहीं उठाने पर कौन सुपरवाइजर इसका जिम्मेवार होगा, इसपर विचार किया जा रहा है. इसके अलावा फांइनेंस कर निगम ट्रैक्टर खरीदने पर विचार कर रहा है. ऐसा होने पर निगम की एक बड़ी राशि की बचत होगी. अगर इस दिशा में निगम सफल होता है, तो कंपनी को हटाने पर निगम कार्रवाई करेगा.

पार्षदों में भी है कार्यशैली पर नाराजगी

कंपनी को दिये कार्य विस्तार पर पार्षदों के बीच नाराजगी भी देखी जा रही है. वार्ड 26 के पार्षद अरूण कुमार का कहना है कि कंपनी को यह मालूम है कि निगम अभी अपने स्तर पर कार्य संभालने को सक्षम नहीं है. इसी का फायद उठा कर कंपनी कार्य में लापरवाही बरती है. जरूरी है कि अधिकारी उच्च स्तरीय बैठक कर इसका निदान करें. वार्ड 52 के पार्षद निरंजन कुमार का कहना है कि उनके वार्ड में निगम सफाई कार्य देखती है. फिर भी बड़ी ऱाशि खर्च करने के बाद निगम का उनके वार्ड में सफाई कार्य एक दिखावा मात्र है. कई बार तो खुद के खर्च पर उन्हें सफाई कार्य करवानी पड़ती है. इसकी शिकायत निगम के स्वास्थ्य पदाधिकारी को भी दी गयी है, लेकिन इस और अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

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