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‘अमेरिकी उपग्रहों को आगे भी प्रक्षेपित करते रहेंगे’

श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश): अमेरिकी कंपनियां टेरा बेला (गूगल की कंपनी) और प्लैनेट लैब के उपग्रहों का भारत द्वारा बुधवार को किया गया प्रक्षेपण केवल एक बार की बात नहीं है, बल्कि यह आगे भी जारी रहेगा। अंतरिक्ष एजेंसी के अधिकारियों ने यह बात कही।

इसरो प्रणोदन केंद्र और एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के अध्यक्ष सह कार्यकारी निदेशक एस. राकेश ने कहा, “हम प्लैनेट लैब और अन्य कंपनियों के साथ उनके उपग्रह के प्रक्षेपण को लेकर बातचीत कर रहे हैं।”

एंट्रिक्स कॉरपोरेशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वाणिज्यिक इकाई है।

भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) ने बुधवार को 20 उपग्रहों को उनकी कक्षा में प्रक्षेपित किया, जिसमें टेरा बेला का स्काईसैट जेन2-1, प्लैनेट लैब के 12 डोव उपग्रह शामिल थे, जिसमें से प्रत्येक का वजन 4.7 किलोग्राम था। इसके साथ ही भारतीय काटरेसैट उपग्रह को भी इसने उसकी कक्षा में स्थापित किया।

टेरा बेला के स्काईसैट जेन2-1 का वजन 110 किलोग्राम है। यह एक छोटा अर्थ इमेजिंग उपग्रह है, जो एक मीटर से कम के रेजोल्यूशन से धरती की तस्वीरें खींचने में सक्षम है, साथ ही हाई डेफिनेशन वीडियो भी खींच सकता है।

दोनों ही कंपनियों की योजना आगे भी कई उपग्रह प्रक्षेपित करने की है।

इसरो के चेयरमैन ए. एस. किरण कुमार ने कहा कि दुनिया भर में धरती की निगरानी करनेवाले उपग्रहों का आकार और भार तेजी से घट रहा है और इसरो भी अपने उपग्रहों का आकार घटा रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “हम निजी कंपनी की तरह काम नहीं कर सकते। हमारी सरकार की जरूरत के हिसाब से हमें कुछ न्यूनतम जरूरतें पूरी करनी होती हैं।”

यह पूछे जाने पर अगले पांच साल में उपग्रह प्रक्षेपण को लेकर इसरो की क्या योजना है? कुमार ने कहा कि वे कम से कम 70 उपग्रहों के प्रक्षेपण की उम्मीद कर रहे हैं।

वर्तमान में भारत के 34 उपग्रह अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित हैं, जो संचार, धरती की निगरानी, नौवहन और अंतरिक्ष विज्ञान उपग्रह का काम कर रहे हैं।

भारत में फिलहाल दो प्रक्षेपण स्थल हैं। प्रक्षेपण क्षमता बढ़ाने के लिए तीसरे प्रक्षेपण स्थल के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी नए प्रक्षेपण यान एसेंबली इमारत बना रही है, जिससे प्रक्षेपण यान एसेंबलिंग के काम में तेजी आएगी।

कुमार ने आगे कहा, “एक बार वर्तमान अड़चनें दूर हो जाएं और अगर हमें नए प्रक्षेपण स्थल की जरूरत होगी, तो हम जरूर उसकी तैयारी करेंगे।”

उनके मुताबिक, कक्षा में स्थापित किए जाने वाले अगले पीएसएलवी रॉकेट में मौसम की निगरानी और स्कैटसैट उपग्रह भविष्यवाणी का काम करेगा।

उन्होंने कहा कि भारत द्वारा निर्मित दक्षिण पूर्व एशियाई उपग्रह दिसंबर 2016 से मार्च 2017 के बीच प्रक्षेपित किया जाएगा।

भारत के खुद के अंतरिक्ष केंद्र की योजना के बारे में कुमार ने कहा कि यह इसरो की दीर्घकालिक योजनाओं और सरकार द्वारा प्राप्त धन और अन्य पहलुओं पर निर्भर करता है।
(वेंकटचारी जगन्नाथन)

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