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अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी बेंगलुरू के छात्रों सर्वेक्षण में खुलासा, झारखंड के प्रज्ञा केंद्रों में हो रही है अधिक वसूली

सिविल सोसाइटी प्रदान, विकास सहयोग केंद्र, ज्ञान विज्ञान समिति, आरडीए और अनिया सहायता केंद्र ने किया सहयोग

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Ranchi: अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी बेंगलुरू के 25 छात्रों ने झारखंड के प्रज्ञा केंद्रों के कार्यकलापों और उनकी गतिविधियों पर किये सर्वेक्षण को सार्वजनिक किया है. राज्य के सभी प्रमंडलों में दो-दो पंचायतों पर किये गये सर्वेक्षण में चौंकानेवाले तथ्य सामने आये हैं. राज्य में 4693 से अधिक प्रज्ञा केंद्र 24 जिलों में कार्यरत हैं. सर्वेक्षण में कहा गया है कि अधिकतर प्रज्ञा केंद्रों में सेवाओं के नाम पर अधिक शुल्क लिये जा रहे हैं. सर्वेक्षण में कहा गया है कि प्रज्ञा केंद्रों की सुविधाओं के बाद भी राज्य के 42 फीसदी ग्रामीणों को प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारियों के पास जाना पड़ रहा है. 55 फीसदी लोग यह मानते हैं कि केंद्रों पर मिलनेवाली सुविधाओं के  नाम पर अधिक समय लगता है. 63 प्रतिशत लोगों को केंद्रों से मिलनेवाली सेवाओं की प्राप्ति रसीद (रीसिप्ट) नहीं दी जाती है. सभी सेवाओं के नाम पर अधिक चार्ज लिये जाने के तथ्य भी सामने आये हैं.

केंद्रों को नहीं मिल रही बेहतर इंटरनेट सेवाएं

राज्य के प्रज्ञा केंद्रों पर इंटरनेट की सुविधाएं बेहतर नहीं है. खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी से पंचायत भवन में कार्यरत प्रज्ञा केंद्रों के संचालकों को परेशानी भी हो रही है. राज्य भर में 70 फीसदी केंद्र पंचायत भवनों में काम कर रहे हैं, जहां सुरक्षा भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है. इन केंद्रों को 12वीं उत्तीर्ण ग्रामीण स्तरीय उद्यमी (विलेज लेवल इंटरप्रेनुअर) चला रहे हैं. एक केंद्र की स्थापना में 87 हजार रुपये खर्च आता है. 54 प्रतिशत प्रज्ञा केंद्र संचालकों का यह प्राथमिक व्यवसाय नहीं है. केंद्रों में प्रमाण पत्र, बैंकिंग सेवाएं, आधार से संबंधित कार्य और अन्य कार्य के लिए अधिक पैसे लिये जा रहे हैं. बैंकिंग सुविधाओं के लिए 1000 रुपये की निकासी पर 35 रुपये चार्ज केंद्रों द्वारा लिये जा रहे हैं. आम केंद्रों पर सर्टिफिकेट, बैंकिंग, आधार अपडेशन, झारसेवा से संबंधित अन्य सर्विसेज, बिना रेट लिस्ट के काम हो रहे हैं.

आधार और बायोमेट्रिक्स से संबंधित समस्याएं अधिक

सर्वेक्षण में यह नतीजा भी आया है कि 81 फीसदी वीएलइ को आधार और बायोमेट्रिक्स से संबंधित समस्याएं हैं. 42 फीसदी को बायोमेट्रिक्स संबद्धता में परेशानी हो रही है. यह मामला भी सामने आया है कि तीन हजार रुपये का औसतन मुनाफा केंद्रों को हो रहा है. ग्रामीणों की यह शिकायत थी कि केंद्र के बंद रहने पर किसी से कंपलेन करने से कार्रवाई नहीं होती है. सर्वेक्षण में स्वंय सेवी संस्था प्रदान, विकास सहयोग केंद्र, ज्ञान विज्ञान समिति, आरडीए, मनीआ सहायता केंद्र और शोधार्थी तारामणि ने सहयोग किया.

प्रज्ञा केंद्रों में लिये जा रहे हैं अधिक पैसे

सर्टिफिकेट निर्गत करने पर71 फीसदी 
बैंकिंग सेवाओं के नाम पर45 फीसदी 
आधार कार्ड से जुड़ी सेवाएं67 फीसदी 
अन्य सेवाओं के नाम पर65 फीसदी 

 

सर्वेक्षण में सामने आये तथ्य

  • प्रज्ञा केंद्रों की सेवाओं के बावजूद जाना पड़ रहा है बीडीओ, सीओ और जिला कार्यालय
  • वन स्टॉप शॉप की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं
  • प्रज्ञा केंद्र में सुविधाओं के नाम पर पारदर्शिता नहीं
  • भ्रष्टाचार में किसी तरह की कोई कमी नहीं
  • समय पर नहीं मिलते कोई दस्तावेज

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