
Sweta Kumari
Jamtara : बीते सितंबर 2017 में जामताड़ा एसपी जया राय के आवासीय कार्यालय में कार्यरत तीन महिला सिपाहियों ने एसपी के रीडर शशिकांत कुशवाहा पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इस मामले में आईजी सुमन गुप्ता ने कार्रवाई करते हुए रीडर को सस्पेंड कर दिया था. तब एसपी और पुलिस मुख्यालय के अफसरों ने आरोपी रीडर के पक्ष में फैसला लिया था. इस मामले में ताजा घटनाक्रम यह है कि जामताड़ा के एसपी और पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने डीजीपी को पत्र लिखकर आईजी सुमन गुप्ता की शिकायत की है. मीडिया में आयी खबर के मुताबिक आईजी पर एसपी और मामले से जुड़े कनीय अफसर ने आरोप लगाया है कि उन्होंने दुर्व्यवहार किया है.
मामले को दबाने के लिए एसपी ने गवाहों पर बयान बदलने तक का दवाब बनाया
न्यूज विंग को कुछ ऐसे तथ्य मिलें हैं, जिससे यह पता चलता है कि आईजी के खिलाफ शिकायत करने वाली जामताड़ा के एसपी जया राय इस मामले में गलत कर रही हैं. महिला सिपाहियों का यौन शोषण करने वाले पुलिसकर्मियों के पक्ष में खड़ी हैं. इतना ही नहीं मामले को दबाने के लिए एसपी ने गवाहों पर बयान बदलने तक का दवाब बनाया.

जो तथ्य सामने आये हैं, उसके मुताबिक महिला सिपाही पिंकी ने जब यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठायी, तब उसके खिलाफ चोरी की एक झूठी शिकायत दर्ज की गयी. इस मामले की जांच करने के लिए आईजी सुमन गुप्ता दो जून को नारायणपुर थाना क्षेत्र के लटैया गांव गयी थी. वहां पर कथित चोरी की शिकायत करने वाली महिला दुलारी देवी के भैंसुर ने आईजी को दिये बयान में कहा है कि उनके (आईजी के) पहुंचने से एक घंटा पहले एसपी जया राय भी लटैया गांव में आयी थीं. एसपी ने दुलारी देवी के भैंसुर रंजीत मंडल समेत अन्य गवाहों से कहा कि सभी को भगवान व बच्चे की कसम है, बयान बदल दो. अपने बयान में यह भी कहो कि महिला सिपाही पिंकी ने चोरी की थी.
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क्या है पूरा मामला
दरअसल पूरा मामला जामताड़ा की उन तीन महिला पुलिसकर्मियों का है, जिनकी ड्यूटी एसपी जया रॉय के आवासीय कार्यालय में लगी थी. कार्यस्थल पर ही प्रभारी सार्जेंट मेजर अशोक कुमार और एसपी के रीडर शशिकांत कुशवाहा के द्वारा यौन शोषण का शिकार बनी. शिकायत करने पर जिला के एसपी जया राय ने कोई कार्रवाई नहीं की. तब तीनों महिला सिपाही आईजी सुमन गुप्ता के पास पहुंची और मामले की शिकायत की. 6 दिसंबर को आईजी सुमन गुप्ता ने जब दोनों आरोपियों को निलंबित कर दिया, तब एसपी की नींद खुली. जैसे ही उन्हें इसकी सूचना मिली, उन्होंने शिकायत की जांच के लिए एक आंतरिक कमेटी का गठन कर दिया. आंतरिक कमेटी ने आरोपियों को क्लीन चीट दे दिया और आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों को डीजीपी के स्तर से निलंबन मुक्त कर दिया गया.
मामले की शुरूआत सितंबर 2017 में ही हो गयी थी
पूरे मामले की शुरूआत सितंबर 2017 से शुरू हुई. जब एसपी के आवासीय कार्यालय में कार्यरत तीन महिला पुलिसकर्मियों ने एसपी जया राय के रीडर शशिकांत कुशवाहा पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. एसपी जया राय से इस बारे में महिला पुलिसकर्मियों ने मिलकर शिकायत भी करना चाहा, लेकिन रीडर ने उन्हें कभी मिलने नहीं दिया. दरअसल एसपी के गोपनीय आवासीय कार्यालय में रीडर आये दिन महिला पुलिसकर्मियों को भद्दी- भद्दी बातें कहा करता था और इशारों–इशारों में सेक्सुअल संबंध बनाने की बात करता था. लेकिन महिला पुलिसकर्मियों के साफ मना करने और झिड़क देने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दिया करता था. साथ ही एसपी मैडम (जया राय ) से कहकर पोस्टिंग जिला मुख्यालय से दूर करवाकर परेशान करवाने की धमकी दिया करता था.
महिला पुलिसकर्मियों से क्या कहता था एसपी का रीडर शशिकांत कुशावाहा
1. बताओ तुम्हारा पीरियड की तारीख क्या है.
2. मेरे साथ एक बार अकेले में समय बिताओ तो तुन्हें अच्छी पोस्टिंग दिलवा दूंगा.
3. मेरी बात तुम्हें समझ नहीं आती, एक बार खुद को मेरे सुपुर्द कर दो तो फिर देखो कितना ऐश करवाता हूं.
4. इसके अलावा रीडर कुशवाहा अक्सर महिला पुलिसकर्मियों को जबरन अनचाहा स्पर्श करता था और ड्यूटी में लंच टाइम में अकेला पाकर पास आकर बैठना और परेशान करना उसकी आदत थी.
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पुलिसकर्मियों को रीडर ने एसपी से मिलने नहीं दिया
इस पूरे मामले की शिकायत कई बार महिला पुलिसकर्मियों ने एसपी से मिलकर करना चाहा तो रीडर ने उन्हें मिलने नहीं दिया. फिर इन महिला पुलिसकर्मियों ने जया राय को फोन करके पूरे मामले से अवगत कराया. लेकिन एसपी होने के नाते जया राय ने मामले में कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की. फिर भी महिला पुलिसकर्मी लगातार उनसे कार्रवाई करने की मांग दोहराती रहीं.
इन सबके बीच सभी महिला पुलिसकर्मियों ने आईजी रेल सह दुमका प्रक्षेत्र, दुमका सुमन गुप्ता से मिलकर अपनी समस्या को सामने रखा और साथ ही इस संदर्भ में 5 दिसंबर 2017 को एक लिखित आवेदन दिया. जिसमें साफ तौर पर लिखा था कि किस तरह से जामताड़ा गोपनीय रीडर शशिकांत कुशवाहा और प्रभारी सार्जेंट मेजर अशोक कुमार ने उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया. इस मामले के संज्ञान में आते ही आईजी ने पूरे तथ्यों से वाकिफ होते हुए दोनों आरोपियों को 6 दिसंबर 2017 को निलंबित कर दिया. लेकिन ठीक 6 दिसंबर के ही दिन निलंबन के आदेश पर एसपी जया राय ने आरोपियों का बचाव करते हुए उसी दिन एक आंतरिक कमिटि का गठन कर दिया. और खुद उस कमिटी की परजाइडिंग ऑफिसर बन गयीं. साथ ही एसडीपीओ पूज्य प्रकाश और महिला थाना प्रभारी विजया कुजूर को कमेटी का सदस्य बना दिया.
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आंतरिक कमेटी गठित करने का क्या है नियम
कार्यस्थल पर यौन शोषण की शिकायतों की जांच के लिए आंतरिक कमेटी बनाने का नियम है. नियम के अनुसार तो हर कार्यालय में यह कमेटी पहले से गठित होनी चाहिए. लेकिन जामताड़ा में इस नियम का पालन नहीं किया जाता है. किसी भी आंतरिक कमिटि के गठन में एक स्वतंत्र सदस्य (जो किसी भी सरकारी पद पर स्थापित ना हो) को रखने का नियम है. एसपी जया राय ने इस मामले में इसका पालन नहीं किया. साथ ही इस तरह के मामले में महिला अधिकारियों को सदस्य बनाया जाता है, लेकिन एसपी ने यहां भी एसडीपीओ पूज्य प्रकाश को कमिटी का सदस्य बनाया. जो कि पुरुष हैं. यानि कि कुल मिलाकर आंतरिक कमिटि का गठन ही पूरी तरह से अवैध था. तो ऐसे में जांच पूरी तरह से सवालों के घेरे में है.
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आंतरिक जांच कमेटी के समक्ष महिला सिपाहियों ने पेश किए थे 10 ऑडियो-वीडियो सीडी
आंतरिक जांच कमेटी गठित होने के बाद महिला पुलिसकर्मियों ने 17 दिसंबर 2017 को SDPO पूज्य प्रकाश से मिलकर मामले की जानकारी दी थी. लेकिन उन्होंने इसे लिखित रूप में देने को कहा. तब महिलाकर्मियों ने 22 दिसंबर 2017 को ही पूरे मामले की जानकारी लिखित रूप में दिया. अपने लिखित बयान में महिला पुलिसकर्मियों ने साफ लिखा है कि किस तरह से एसपी के रीडर द्वारा उनका मानसिक और शारीरिक रूप से उत्पीड़न किया गया. लिखित बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि किस तरह रीडर ने उन्हें कॉम्प्रमाइज करने को कहा और नहीं मानने पर ड्यूटी के दौरान अंजाम भुगतने की बात कही गयी. वहीं इस कमिटि के गठित होने के बाद भी आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस मामले में महिला पुलिसकर्मियों ने 10 सीडी भी आंतरिक जांच कमिटि को सौंपा था. कमेटी, जिसके परजाइडिंग ऑफिसर खुद एसपी जया राय थी, उन्होंने आरोपियों द्वारा महिला सिपाहियों को कही गयी भद्दी–भद्दी बातों को सामान्य बातचीत बता दिया. साथ ही एसपी ने यौन शोषण के साक्ष्य नहीं होने की बात भी अपने निष्कर्ष में लिखा है. पूरे मामले की जांच काफी धीमी चल रही थी. काफी दिन तक की कार्रवाई ना होता देख महिला कर्मियों ने एसपी, डीआईजी, आईजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारियों से भी इसकी शिकायत की थी.
पूरे मामले की जांच के दौरान जो सीडी पीड़िताओं ने पेश किये थे , उसे देखने सुनने के बाद आईजी सुमन गुप्ता ने इसे सेक्सुअल हरासमेंट का मामला पाया. साथ ही उन्होंने पाया कि पूरे मामले में एसपी जया राय के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया गया, बल्कि इसकी सत्यता की जांच ना कराके मात्र इसे सामान्य वार्तालाप बताया गया. साथ ही उन्होंने कहा कि जबकि एक सीडी में गवाह द्वारा साफतौर पर बताया गया है कि कैसे रीडर के द्वारा एसपी के नाम पर पैसों की वसूली का जाती है और साथ ही स्कूटी भी ली गयी है. आईजी सुमन गुप्ता ने पूरे तथ्यों को देखते हुए पुलिस मुख्यालय को भेजे गए अपने रिपोर्ट में कहा था कि इस मामले में पहले ना तो कोई कानूनी कार्रवाई हुई और ना ही जांच में सामने आये तथ्यों पर ध्यान दिया गया.
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जया राय ने किया 4( 2 ) (ए ) (बी ) (सी ) का उल्लंघन कर किया आंतरिक कमिटि का गठन
जामताड़ा एसपी ने इस मामले में आईजी, संथानपरगना क्षेत्र सुमन गुप्ता द्वारा इस मामले में कार्यालय द्वारा जो निर्देश दिया गया था, उसका कोई अनुपालन नहीं किया. और ना ही मामले में कोई संज्ञान लिया है. आईजी ने पुलिस मुख्यालय को जो रिपोर्ट भेजी थी, उसमें साफ लिखा था कि एसपी ने आंतरिक कमेटी के गठन के क्रम में the sexual harassment of women at workplace (prevention, prohibitation and redressal) act-2013 के प्रावधानों (4( 2 ) (ए ) (बी ) (सी )) का उल्लंघन किया है. इस वजह से आईजी ने एसपी जया राय से स्पष्टीकरण की भी मांग की.
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