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महंगाई पर सियासत, कांग्रेस निकाल रही साइकिल रैली, भाजपा कह रही- वैट में हो कमी

RANCHI: राज्य में महंगाई पर सियासत जारी है. पेट्रोल-डीजल की कीमत 100 की सूई छूने को है. इसे लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दल भाजपा आमने-सामने हैं. कांग्रेस, झामुमो और राजद इसके लिये पूरी तरह से केंद्र को दोषी ठहरा रहे हैं. विरोध जताने को साइकिल रैली निकाल रहे हैं. हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा. बैलगाड़ी की सवारी हो रही है. गैस चूल्हा पर लकड़ी जलाकर खाना बनाये जाने का भी कार्यक्रम चलाया गया. पर भाजपा इससे इतर राज्य सरकार के मिसमैनेजमेंट पर सवाल उठा रही है. पर इकोनॉमिस्ट मानते हैं कि यह सब पॉलिटिकल स्टंट ज्यादा है. कायदे से अर्थव्यवस्था की हालत इतनी भी पतली नहीं है जितना प्रचार हो रहा है.

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संकट से उबारना केंद्र की जिम्मेदारीः महागठबंधन

मंत्री रामेश्वर उरांव के मुताबिक केंद्र की भाजपा सरकार महंगाई के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील है. केंद्र देश की जनता को आर्थिक संकट से उबारने की बजाये उसे मारने में लगा है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों को केन्द्र सरकार जानबूझकर जीएसटी के अंतर्गत नहीं लाना चाहती. अगर यह जीएसटी के अंतर्गत आ जायेगा तो इसके पैसे से पीएम नरेंद्र मोदी की बिलासिता रुक जाएगी.

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कांग्रेस विधायक दल के नेता और मंत्री आलमगीर आलम के अनुसार केन्द्र सरकार महंगाई पर अंकुश के लिए कोई नीति नहीं तैयार कर रही है. सात साल पहले 2014 में अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल थी. उस दौरान केंद्र में यूपीए सरकार थी. केंद्र ने उस समय 70 रुपए से नीचे की कीमत पर देश की जनता को पेट्रोल उपलब्ध कराया था. देश के लगभग दो सौ शहरों में पेट्रोल 100 रुपये से पार कर गया है, डीजल भी 98 रुपया प्रति लीटर तक है. जनवरी 2021 से 7 जुलाई तक मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमत 69 बार बढ़ाई है.

राजद नेता और पूर्व मंत्री राधा कृष्ण किशोर कहते हैं कि RBI ने तेल के दामों में उछाल पर कमी के लिये सुझाव भी दिये हैं. उसने इसकी मुख्य वजह पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाये जाने वाले टैक्स को बतायी है. केंद्रीय उत्पाद शुल्क औऱ अधिभार कम करने से ही राहत मिलेगी. केंद्र इसके लिये तैयार नहीं.

वैट कम करे राज्य सरकारः भाजपा

भाजपा प्रदेश महामंत्री आदित्य साहू के मुताबिक राज्य में कांग्रेस पार्टी पेट्रोल-डीजल के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रही है. अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए कांग्रेस दिखावा कर रही है. राज्य सरकार पेट्रोल डीजल पर 23 प्रतिशत वैट वसूल रही है. कांग्रेस के समर्थन से चलने वाली सरकार मूल्य वर्धित कर VAT घटाकर जनता को राहत दे. कोरोना काल में महामारी से लड़ने के अनेक उपाय केंद्र की ओर से किये गए. 18 वर्ष से ऊपर के देश के सभी नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन सुनिश्चित कराया गया. देश के 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई.

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पेट्रोल डीजल का महंगाई से ज्यादा वास्ता नहीः हरिश्वर

अर्थशास्त्री हरिश्वर दयाल के मुताबिक पूर्व में पेट्रोल डीजल की कीमतों पर सरकारी नियंत्रण रहता था जो अब बाजार के हिसाब से तय होता है. स्टेट टैक्स के लिये इस पर वैट जरूरी है. इससे रेवेन्यू पाने में आसानी होती है. एक्साइज ड्यूटी पर टैक्स बढ़ाने से इसका साइड इफेक्ट होने लगता है. तस्करी बढ़ने लगती है. रजिस्ट्रेशन से भी बहुत ज्यादा राजस्व नहीं मिलता. पेट्रोल जीएसटी के दायरे में नहीं है. इसे सेंटर डिसाइड करता है. कभी वह इसे राज्यों पर फेकता है तो कभी राज्य उस पर.

आरबीआई के हिसाब से महंगाई दर के लिये 2 से 6 प्रतिशत तक का दायरा रखा गया है. कुछ हद तक अभी यह 6 फीसदी से कुछ ही अधिक है. ऐसे में यह तो माना जा सकता है कि एक सीमा तक महंगाई दिख रही. 2020-21 में कोरोना की पहली लहर आयी थी. इस त्रासदी के कारण अप्रैल-मई में अर्थव्यवस्था पर कुछ असर आया. पर सितंबर-अक्टूबर में सुधार आया. पर फिर इस साल अप्रैल-मई में इसका संकट बढा. पर अब जो स्थिति है, कोरोना की आगे चुनौती आये ना आय़े, कई आर्थिक गतिविधियां जारी ही रहेंगी. जारी वित्तीय वर्ष में 10 फीसदी ग्रोथ रेट ना भी रहे तो 9 फीसदी से अधिक जरूर रहना है. फिलहाल महंगाई पर राजनीतिक शोर ज्यादा ही है.

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